प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी पुलिस ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए हरियाणा से करीब 48 दिनों से लापता एक व्यक्ति को सकुशल उसके परिजनों से मिलाया। कोतवाली देवप्रयाग पुलिस की तत्परता से बिछड़ा परिवार फिर एकजुट हो सका। परिजनों ने पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित कार्रवाई की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पुलिस के अनुसार 30 जुलाई 2026 को कोतवाली देवप्रयाग के सामने एक व्यक्ति संदिग्ध एवं असहाय अवस्था में घूमता हुआ दिखाई दिया। ड्यूटी पर तैनात मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तत्काल उसे सुरक्षित कोतवाली लाकर उसकी देखभाल कराई स्नान और भोजन की व्यवस्था की तथा मानसिक रूप से सहज होने के बाद आत्मीयता से बातचीत कर उसकी पहचान करने का प्रयास किया। सीमित जानकारी और ऑनलाइन माध्यमों से की गई गहन पड़ताल में पता चला कि उक्त व्यक्ति धर्मवीर निवासी ग्राम बरसत थाना घरौंदा जनपद करनाल (हरियाणा) है। उसकी गुमशुदगी 13 जून 2026 से थाना घरौंदा में दर्ज थी और परिवार पिछले करीब डेढ़ माह से उसकी तलाश कर रहा था। पहचान की पुष्टि होने के बाद मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत ने तत्काल थाना घरौंदा पुलिस और धर्मवीर के परिजनों से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही धर्मवीर का पुत्र राहुल कोतवाली देवप्रयाग पहुंचा। आवश्यक वैधानिक और पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद धर्मवीर को सकुशल उसके सुपुर्द कर दिया गया। करीब 48 दिनों बाद अपने परिजन को सुरक्षित देखकर परिवार भावुक हो उठा। परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस और विशेष रूप से मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत की संवेदनशीलता तत्परता और मानवीय व्यवहार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। देवप्रयाग पुलिस के इस सराहनीय कार्य की स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि यह केवल कर्तव्य पालन नहीं बल्कि उत्तराखंड पुलिस की मित्र पुलिस की उस भावना का उदाहरण है जिसमें हर जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी पुलिस ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए हरियाणा से करीब 48 दिनों से लापता एक व्यक्ति को सकुशल उसके परिजनों से मिलाया। कोतवाली देवप्रयाग पुलिस की तत्परता से बिछड़ा परिवार फिर एकजुट हो सका। परिजनों ने पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित कार्रवाई की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पुलिस के अनुसार 30 जुलाई 2026 को कोतवाली देवप्रयाग के सामने एक व्यक्ति संदिग्ध एवं असहाय अवस्था में घूमता हुआ दिखाई दिया। ड्यूटी पर तैनात मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तत्काल उसे सुरक्षित कोतवाली लाकर उसकी देखभाल कराई स्नान और भोजन की व्यवस्था की तथा मानसिक रूप से सहज होने के बाद आत्मीयता से बातचीत कर उसकी पहचान करने का प्रयास किया। सीमित जानकारी और ऑनलाइन माध्यमों से की गई गहन पड़ताल में पता चला कि उक्त व्यक्ति धर्मवीर निवासी ग्राम बरसत थाना घरौंदा जनपद करनाल (हरियाणा) है। उसकी गुमशुदगी 13 जून 2026 से थाना घरौंदा में दर्ज थी और परिवार पिछले करीब डेढ़ माह से उसकी तलाश कर रहा था। पहचान की पुष्टि होने के बाद मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत ने तत्काल थाना घरौंदा पुलिस और धर्मवीर के परिजनों से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही धर्मवीर का पुत्र राहुल कोतवाली देवप्रयाग पहुंचा। आवश्यक वैधानिक और पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद धर्मवीर को सकुशल उसके सुपुर्द कर दिया गया। करीब 48 दिनों बाद अपने परिजन को सुरक्षित देखकर परिवार भावुक हो उठा। परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस और विशेष रूप से मुख्य आरक्षी विपेन्द्र रावत की संवेदनशीलता तत्परता और मानवीय व्यवहार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। देवप्रयाग पुलिस के इस सराहनीय कार्य की स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि यह केवल कर्तव्य पालन नहीं बल्कि उत्तराखंड पुलिस की मित्र पुलिस की उस भावना का उदाहरण है जिसमें हर जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।