प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी उत्तराखण्ड के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान प्रणाली एनसीआईकेएस-2026 विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 31 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं साहित्यकारों एवं शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में उसकी भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.ऋषि मोहन भटनागर चेयरमैन फ्यूट्रेड इनोवेशन स्टूडियोज़ को-फाउंडर (इंडिया) एवं ग्लोबल सीटीओ एए2आईटी तथा चेयरमैन एवं फाउंडर आईईटी फ्यूचर टेक पैनल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निदेशक प्रो.पी.वी.बी.सुब्रह्मण्यम तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन विभागाध्यक्ष प्रो.महेन्द्र बाबू कुरुवा मौजूद रहे। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव हरि मौल आज़ाद आयोजन समिति के संयोजक डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी एवं डॉ.मीनाक्षी राणा तथा आयोजन सचिव डॉ.रेणु भदोला डंगवाल डॉ.जागृति सहारिया डॉ.कुसुम शर्मा एवं डॉ.अनुप्रिया वर्मा सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता विभागाध्यक्ष शिक्षक कर्मचारी और शोधार्थी उपस्थित रहे। सम्मेलन की संयोजक एवं मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ.मीनाक्षी राणा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्पाठ पुनर्व्याख्या और समकालीन संदर्भों में उसके गंभीर अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन सचिव डॉ.रेणु भदोला डंगवाल ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आज सतत विकास नैतिक नेतृत्व पर्यावरण संरक्षण शिक्षा स्वास्थ्य साहित्य संस्कृति तथा प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्षम है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली विज्ञान प्रौद्योगिकी दर्शन संस्कृति और नैतिक मूल्यों का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत करती है। उन्होंने इस क्षेत्र में समावेशी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो.पी.वी.बी.सुब्रह्मण्यम ने संस्कृत साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इस ज्ञान-संपदा के संरक्षण पुनर्व्याख्या और व्यापक प्रसार की आवश्यकता बताई। वहीं प्रो.महेन्द्र बाबू कुरुवा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की व्याख्या एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा तथा व्यावसायिक व्यवहार से जोड़ने पर बल दिया। मुख्य अतिथि डॉ.ऋषि मोहन भटनागर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उभरती प्रौद्योगिकियों तथा तीव्र वैश्विक परिवर्तन के दौर में भारतीय ज्ञान प्रणाली की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा से प्रेरणा लेकर आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार करने का आह्वान किया। सम्मेलन के दौरान यूकॉस्ट (यूसीओएसटी) देहरादून के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ.डी.पी.उनियाल श्री एस.के.वर्मा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी के प्रो.डॉ.अवनीश कुमार चतुर्वेदी एनआईटी कुरुक्षेत्र के डॉ.यशचन्द्र द्विवेदी एमएनआईटी जयपुर की डॉ.ऋतु गोयल तथा सीवीएम विश्वविद्यालय गुजरात की डॉ.पूजा चौधरी ने अपने विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रो.मुकेश कुमार शर्मा शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती न्याय वेदान्त महाविद्यालय काशी से संबद्ध चैतन्य मुकुन्दानन्द जी महाराज तथा उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ.बृजेश सती ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान हाइब्रिड मोड में कुल 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें योग एवं समग्र स्वास्थ्य मनोविज्ञान साहित्य भाषाविज्ञान भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन गणित खगोल विज्ञान कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगणकीय विज्ञान वास्तुकला सुशासन नेतृत्व सांस्कृतिक धरोहर सतत विकास चेतना अध्ययन तथा डिजिटल वेलनेस जैसे विषयों पर देशभर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए। सम्मेलन के लिए 100 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए जिनमें से 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। समापन सत्र में डॉ.अनुप्रिया वी.ए.ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी। संस्थान के कुलसचिव हरि मौल आज़ाद तथा अनुसंधान एवं परामर्श अधिष्ठाता डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने भी आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अनुसंधान नवाचार और वैश्विक विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी उत्तराखण्ड के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान प्रणाली एनसीआईकेएस-2026 विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 31 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं साहित्यकारों एवं शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में उसकी भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.ऋषि मोहन भटनागर चेयरमैन फ्यूट्रेड इनोवेशन स्टूडियोज़ को-फाउंडर (इंडिया) एवं ग्लोबल सीटीओ एए2आईटी तथा चेयरमैन एवं फाउंडर आईईटी फ्यूचर टेक पैनल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निदेशक प्रो.पी.वी.बी.सुब्रह्मण्यम तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन विभागाध्यक्ष प्रो.महेन्द्र बाबू कुरुवा मौजूद रहे। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव हरि मौल आज़ाद आयोजन समिति के संयोजक डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी एवं डॉ.मीनाक्षी राणा तथा आयोजन सचिव डॉ.रेणु भदोला डंगवाल डॉ.जागृति सहारिया डॉ.कुसुम शर्मा एवं डॉ.अनुप्रिया वर्मा सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता विभागाध्यक्ष शिक्षक कर्मचारी और शोधार्थी उपस्थित रहे। सम्मेलन की संयोजक एवं मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ.मीनाक्षी राणा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्पाठ पुनर्व्याख्या और समकालीन संदर्भों में उसके गंभीर अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन सचिव डॉ.रेणु भदोला डंगवाल ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आज सतत विकास नैतिक नेतृत्व पर्यावरण संरक्षण शिक्षा स्वास्थ्य साहित्य संस्कृति तथा प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्षम है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली विज्ञान प्रौद्योगिकी दर्शन संस्कृति और नैतिक मूल्यों का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत करती है। उन्होंने इस क्षेत्र में समावेशी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो.पी.वी.बी.सुब्रह्मण्यम ने संस्कृत साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इस ज्ञान-संपदा के संरक्षण पुनर्व्याख्या और व्यापक प्रसार की आवश्यकता बताई। वहीं प्रो.महेन्द्र बाबू कुरुवा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की व्याख्या एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा तथा व्यावसायिक व्यवहार से जोड़ने पर बल दिया। मुख्य अतिथि डॉ.ऋषि मोहन भटनागर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उभरती प्रौद्योगिकियों तथा तीव्र वैश्विक परिवर्तन के दौर में भारतीय ज्ञान प्रणाली की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा से प्रेरणा लेकर आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार करने का आह्वान किया। सम्मेलन के दौरान यूकॉस्ट (यूसीओएसटी) देहरादून के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ.डी.पी.उनियाल श्री एस.के.वर्मा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी के प्रो.डॉ.अवनीश कुमार चतुर्वेदी एनआईटी कुरुक्षेत्र के डॉ.यशचन्द्र द्विवेदी एमएनआईटी जयपुर की डॉ.ऋतु गोयल तथा सीवीएम विश्वविद्यालय गुजरात की डॉ.पूजा चौधरी ने अपने विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रो.मुकेश कुमार शर्मा शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती न्याय वेदान्त महाविद्यालय काशी से संबद्ध चैतन्य मुकुन्दानन्द जी महाराज तथा उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ.बृजेश सती ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान हाइब्रिड मोड में कुल 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें योग एवं समग्र स्वास्थ्य मनोविज्ञान साहित्य भाषाविज्ञान भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन गणित खगोल विज्ञान कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगणकीय विज्ञान वास्तुकला सुशासन नेतृत्व सांस्कृतिक धरोहर सतत विकास चेतना अध्ययन तथा डिजिटल वेलनेस जैसे विषयों पर देशभर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए। सम्मेलन के लिए 100 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए जिनमें से 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। समापन सत्र में डॉ.अनुप्रिया वी.ए.ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर करुणेश कुमार शुक्ला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी। संस्थान के कुलसचिव हरि मौल आज़ाद तथा अनुसंधान एवं परामर्श अधिष्ठाता डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने भी आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अनुसंधान नवाचार और वैश्विक विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।