प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। सामान्य गर्भावस्था में जहां शिशु करीब 39 से 40 सप्ताह में जन्म लेता है वहीं समय से काफी पहले दुनिया में आने वाले नवजातों के लिए जिंदगी की पहली सांस से ही संघर्ष शुरू हो जाता है। फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने संक्रमण से लड़ने की क्षमता बेहद कम होने और कई अंगों के अपरिपक्व रहने के कारण ऐसे बच्चों को बचाना चिकित्सकों के लिए भी बड़ी चुनौती होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय श्रीनगर का बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड ऐसे ही नाजुक नवजातों के लिए जीवन की उम्मीद बनकर सामने आया है। बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में पिछले एक वर्ष के दौरान 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का उपचार किया गया है। इनमें से कुछ नवजात रुद्रप्रयाग जनपद से गंभीर हालत में रेफर होकर यहां पहुंचे। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी वेंटिलेटर सपोर्ट आवश्यक दवाओं पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव के प्रयासों से कई नवजातों को नया जीवन मिला है। रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के लिए 16 जून का दिन चिंता और भय से भरा था। अल्पना की डिलीवरी महज 25 सप्ताह में हो गई। समय से करीब 14 से 15 सप्ताह पहले जन्मे इस नवजात का वजन केवल 700 ग्राम था। जन्म के बाद बच्चे की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। उसे बेहतर उपचार के लिए बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में भर्ती कराया गया। करीब दो माह तक चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसका वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और वह मां का दूध भी पीने लगा। बच्चे की हालत स्थिर होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अपने नवजात को स्वस्थ अवस्था में घर ले जाने का समय आया तो मां अल्पना की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि अस्पताल में सभी ने उनके बच्चे को अपने बच्चे की तरह संभाला और उपचार किया। दूसरे मामले में रुद्रप्रयाग जनपद के पीएचसी बसुकेदार में तैनात चिकित्सक डॉ.कृतिका की डिलीवरी 27 सप्ताह में सीएचसी अगस्त्यमुनि में हुई। समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात की हालत गंभीर थी। बेहतर उपचार के लिए बच्चे को बेस चिकित्सालय श्रीनगर रेफर किया गया। 24 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती नवजात का चिकित्सकों ने उपचार किया और उसकी हालत में सुधार आया। बच्चे के स्वस्थ होने पर परिजनों ने बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताया। डॉ.कृतिका के पति एवं डिप्टी कमांडेंट ऋषभ बिष्ट ने कहा कि नीक्कू वार्ड में नवजात को लगातार बेहतर चिकित्सकीय सेवाएं मिलीं। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर स्थिति में बच्चे को यहां जिस तरह की देखभाल मिली उससे परिवार को बड़ी राहत मिली। इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले से आई विनीता की भी प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई। उनका नवजात 20 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती हुआ जो उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर चला गया। वहीं 30 जुलाई को रुद्रप्रयाग से रेफर होकर आई ललिता ने 28 सप्ताह में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। दोनों नवजात बेहद नाजुक अवस्था में थे। दुर्भाग्यवश एक नवजात ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया जबकि दूसरे नवजात का नीक्कू वार्ड में उपचार किया गया और स्वस्थ होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.सीएम शर्मा के नेतृत्व में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी सीनियर रेजीडेंट डॉ.अजय गोस्वामी सहित पीजी डॉक्टरों और नीक्कू वार्ड के नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पीजी डॉक्टरों में डॉ.महेश डॉ. धीरज डॉ.दानिश डॉ.जाहिद डॉ.अंजलि एवं डॉ.आशीष के साथ ही नीक्कू वार्ड की इंचार्ज विजय फोनिया के साथ साहिबा नेहा सुमन श्वेता पंकज सोमती मनीष और सानवी सहित नर्सिंग स्टाफ ने नवजातों की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बेस अस्पताल का नीक्कू वार्ड अब केवल गंभीर नवजातों के उपचार का केंद्र नहीं बल्कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों और उनके परिजनों के लिए उम्मीद भरोसे और नई जिंदगी की एक मजबूत किरण बनता जा रहा है।
अल्पना के बच्चे को मिला ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब
करीब दो महीने तक नीक्कू वार्ड में उपचार के बाद जब अल्पना का नवजात स्वस्थ होकर घर जाने के लिए तैयार हुआ तो बाल रोग विभाग के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने इस पल को यादगार बना दिया। बच्चे को ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब दिया गया। नवजात को कैप और हुड पहनाकर बधाई दी गई तथा नीक्कू वार्ड में केक काटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के इस आत्मीय व्यवहार से बच्चे के पिता और दादी भी भावुक हो गए। परिजनों ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके लिए केवल इलाज ही नहीं किया बल्कि मुश्किल समय में परिवार का हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि बेस अस्पताल की टीम ने उनके घर की खुशियां वापस लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निजी अस्पताल में लाखों का खर्च बेस अस्पताल में नि:शुल्क उपचार
प्रो.सीएम शर्मा ने कहा कि अत्यंत प्री-मैच्योर नवजातों को लंबे समय तक वेंटिलेटर विशेष दवाओं मॉनिटरिंग और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। निजी अस्पतालों में ऐसे उपचार पर परिवार को 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसके विपरीत बेस चिकित्सालय में पात्र मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि नीक्कू वार्ड की पूरी टीम का प्रयास है कि गंभीर अवस्था में आने वाले प्रत्येक नवजात को समय पर विशेषज्ञ उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों एवं नीक्कू वार्ड के पूरे स्टाफ को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। वहीं नीक्कू वार्ड में अपने बच्चों को स्वस्थ होकर घर ले जाने वाले लोगों ने डॉक्टरों के आभार में पत्र लिखकर दिए हैं जिन्हें बोर्ड पर लगाया गया है। समय से पहले प्रसव के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिला को नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर अल्ट्रासाउंड व आवश्यक जांच कराएं पौष्टिक आहार लें पर्याप्त आराम करें और किसी भी तरह के संक्रमण या असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। पेट में लगातार दर्द कमर में खिंचाव पानी आना रक्तस्राव या नियमित अंतराल पर संकुचन महसूस हों तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। समय पर जांच और सही चिकित्सा सलाह से प्री-मैच्योर डिलीवरी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ.दीप्ति शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर गायनी विभाग बेस अस्पताल 25 से 30 सप्ताह में जन्मे नवजातों को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते तथा संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। नीक्कू वार्ड की पूरी टीम ने बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन लगातार निगरानी और परिजनों के सहयोग से इन नन्ही जिंदगियों को बचाने का प्रयास किया। 25 सप्ताह में जन्मे 700 ग्राम के शिशु को स्वस्थ कर घर भेजना पूरी टीम के लिए बेहद संतोष का क्षण है। डॉ.सीएम शर्मा एचओडी बाल रोग विभाग प्री-मैच्योर नवजातों को नया जीवन देना बेस अस्पताल की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकीय टीम की समर्पित मेहनत का परिणाम है। इस उपलब्धि के लिए टीम बाल रोग विभाग टीम नीक्कू वार्ड के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को बधाई। संस्थान व हर विभाग की प्राथमिकता मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। डॉ.सीएमएस रावत प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
