प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन ऑडिटोरियम में ‘खेलो इंडिया संवाद—खेल की बात प्रधानमंत्री के साथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन सुना और खेल फिटनेस तथा युवा सहभागिता से जुड़े विषयों पर संवाद किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ओलंपिक खेलों की संभावनाओं को विकसित करने और युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को खेलों के जरिए राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प से जुड़ने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के विचारों को सुनना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें जीवन और कार्य व्यवहार में भी ग्रहण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खेलों के लिए केवल संसाधनों से अधिक जुनून अनुशासन और निरंतर परिश्रम की आवश्यकता होती है। विद्यार्थियों को आलस्य से दूर रहकर अपनी प्रतिभा को पहचानना चाहिए। विश्वविद्यालय में खेलों के लिए आवश्यक संसाधन विकसित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में खेलों के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव आया है और विद्यार्थियों को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे परिवार विश्वविद्यालय और राष्ट्र का गौरव बढ़े। कुलपति ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपस्थित विद्यार्थियों को संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और अनुशासित युवा ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं। कार्यक्रम में विधायक विनोद कंडारी ने प्रधानमंत्री के युवाओं के प्रति दृष्टिकोण और उनके प्रेरणादायी विचारों से सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं समाज को अभावग्रस्त और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा तथा विकास में सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर राष्ट्रीय खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सुरेंद्र सिंह केनवाशी ने अपने खेल जीवन के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। भारतीय सेना में रहते हुए नौकायन के माध्यम से देश को अनेक पदक दिलाने वाले केनवाशी ने युवाओं को खेलों के प्रति निरंतर जागरूक और समर्पित रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री के खेल एवं विकसित भारत के सपनों को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी सविता गुरुंग ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने जूडो में भारत को कई राष्ट्रीय पदक दिलाने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि खेल को केवल शौक के रूप में नहीं बल्कि रोजगार और कैरियर की संभावनाओं से जोड़कर भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं के लिए आज अनेक नए अवसर उपलब्ध हैं। निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन के माध्यम से युवा खेलों को अपने भविष्य की मजबूत कड़ी बना सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अतिथियों एवं मंच पर उपस्थित खेल प्रतिभाओं से खेल प्रशिक्षण कैरियर संसाधनों प्रतियोगिताओं तथा खेलों में उपलब्ध अवसरों से संबंधित विभिन्न जिज्ञासाएं साझा कीं। अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। कार्यक्रम संयोजक डॉ.राकेश नेगी ने माननीय सांसद अनिल बलूनी का संदेश पढ़ते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। मोहित बिष्ट ने अतिथियों प्रतिभागियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बिड़ला परिसर निदेशक प्रो.एचबीएस चौहान अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओपी गुसाईं संकायाध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो.मोहन पंवार प्रो.दीपक कुमार प्रो.एसएस बिष्ट प्रो.अनिल नौटियाल प्रो.जेपी मेहता प्रो.ममता आर्य सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक अधिकारी कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
