प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने तथा स्थानीय संसाधनों को आजीविका का माध्यम बनाने के संकल्प के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से विकासखंड नंदानगर की ग्राम पंचायत पूर्णकिला निवासी अनिता देवी ने माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। वह माल्टा आंवला और बुरांश जैसे स्थानीय उत्पादों से जूस जैम अचार सहित विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं और वर्तमान में इससे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। अनिता देवी गंगा महिला ग्राम संगठन के अंतर्गत प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं तथा नंदादेवी स्वायत्त सहकारिता की सदस्य हैं। क्षेत्र में माल्टा आंवला और बुरांश जैसे स्थानीय उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता तथा इनके प्रसंस्कृत उत्पादों की बाजार में मांग को देखते हुए उन्होंने माइक्रो फूड प्रोसेसिंग को अपने व्यक्तिगत उद्यम के रूप में अपनाया। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय जरूरत और बाजार की संभावनाओं के अनुरूप व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। लाभार्थी अपनी सहकारिता यानी सीएलएफ के माध्यम से आवेदन करती हैं और चयन के बाद परियोजना द्वारा व्यवसाय के अनुरूप एक लाख रुपये से तीन लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें 30 हजार रुपये से 75 हजार रुपये तक परियोजना अनुदान यानी सब्सिडी, 50 हजार रुपये से 1.50 लाख रुपये तक बैंक ऋण तथा 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक लाभार्थी का स्वयं का अंश या व्यक्तिगत व्यय शामिल है। इसी प्रक्रिया के तहत अनिता देवी का चयन माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्यम के लिए किया गया। परियोजना से प्राप्त सहयोग एवं मार्गदर्शन से उन्होंने अपनी यूनिट स्थापित की और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फल एवं अन्य उत्पादों का प्रसंस्करण कर मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना शुरू किया। अनिता देवी द्वारा तैयार किए जा रहे माल्टा आंवला और बुरांश आधारित उत्पादों के साथ जूस जैम अचार आदि को स्थानीय बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध होने के साथ ही अनिता देवी को अपने गांव में रहकर नियमित आमदनी का जरिया मिला है। स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण से जहां उनकी उपज का बेहतर उपयोग हो रहा है वहीं इससे स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। अपने उद्यम के माध्यम से अनिता देवी ने स्वयं के लिए रोजगार का अवसर सृजित करने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी कार्य से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया है। उनका कहना है कि ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। उद्यम शुरू करने के बाद उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और अब वह अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ना चाहती हैं।
