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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उच्च शिक्षा व्यवस्था को डेटा तकनीक पारदर्शिता एवं परिणाम आधारित बनाने की दिशा में विद्या समीक्षा केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह केंद्र राजकीय महाविद्यालयों में उपलब्ध ढांचागत सुविधाओं, छात्र संख्या एवं मूलभूत सुविधाओं का ऑनलाइन डेटा उपलब्ध कराने के साथ ही शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति में भी सहायक होगा। विभागीय गतिविधियों को गति देने में उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे और राजकीय महाविद्यालयों से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध हैं।यह बात उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने 24 सितंबर को विद्यालयी शिक्षा निदेशालय ननूरखेड़ा स्थित उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय एवं विद्या समीक्षा केंद्र के लोकार्पण के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत राज्य में विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत विद्या समीक्षा केंद्र का सफल संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्रीय कार्यालय एवं विद्या समीक्षा केंद्र का निर्माण किया गया है। डॉ.रावत ने कहा कि यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का पहला विद्या समीक्षा केंद्र होगा। इस केंद्र के माध्यम से सभी राजकीय महाविद्यालयों के आधारभूत ढांचे विद्यार्थियों की उपस्थिति परीक्षा परिणाम एवं शिक्षकों की कार्यप्रणाली की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी। साथ ही शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति की प्रक्रिया तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का कार्य भी विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से योजनाओं की प्रगति संसाधनों के उपयोग और संस्थानों के प्रदर्शन की समीक्षा कर उच्च शिक्षा को और गुणवत्तापरक बनाया जाएगा। प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर उसका उपयोग नीति निर्माण में भी किया जाएगा। राज्य के बजट दस्तावेज में भी विद्या समीक्षा केंद्र के लिए बजट प्रावधान का उल्लेख किया गया है। इस अवसर पर स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत की नीतियों एवं कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ रावत ने विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जो शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ.देवेंद्र भसीन एवं डॉ.जयपाल सिंह चौहान ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड है। डॉ रावत के मार्गदर्शन में प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन मजबूती से किया जा रहा है। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र शिक्षक एवं शोध के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिसका लाभ छात्र-छात्राएं उठा रहे हैं। कार्यक्रम में विधायक रायपुर उमेश शर्मा काऊ उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र भसीन डॉ.जयपाल सिंह चौहान पूर्व सलाहकार रूसा प्रो एमएसएम रावत प्रो.केडी पुरोहित निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो.संगीता गुप्ता डॉ.ममता ड्यूंडी नैथानी निदेशक बेसिक शिक्षा केएस रावत रूसा नोडल डॉ.अनीता रावत सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
*लक्ष्य पवित्र हो तो निर्णय सफल होते हैं डॉ धन सिंह रावत*
कार्यक्रम के दौरान डॉ रावत ने कहा कि लक्ष्य पवित्र हो तो निर्णय सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि देश में उत्तराखंड अकेला राज्य है जिसने छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व दिया है। इस निर्णय को देशभर में सराहा गया और कई विश्वविद्यालय अब अपने यहां छात्राओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसके पास अपनी भूमि एवं भवन नहीं है। सभी महाविद्यालयों में शत-प्रतिशत प्राचार्य एवं फैकल्टी हैं। छात्रों के प्रोत्साहन के लिए विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। विद्यालयी शिक्षा की भांति उच्च शिक्षा में भी उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भक्त दर्शन उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है।

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