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प्रदीप कुमार
गैरसैंण/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में विकास कार्यों बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों का प्रस्ताव किया है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के लिए तैयार 7844.18 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में सड़क पेयजल ऊर्जा शहरी विकास और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अनुपूरक बजट में 4164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद तथा 3679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में प्रस्तावित हैं। इस प्रकार अनुपूरक बजट की आधे से अधिक धनराशि पूंजीगत मद में रखी गई है। मूल बजट के 111703.21 करोड़ रुपये में अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद कुल बजट का आकार 119547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा। अनुपूरक बजट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों से जुड़ा है। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए स्थानीय निकायों के लिए राज्य के कर राजस्व का हिस्सा 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इससे ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को विकास कार्यों तथा स्थानीय आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना सहित पारेषण और वितरण व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न मदों में लगभग 270 करोड़ रुपये रखे गए हैं। शहरी विकास विभाग की एशियाई विकास बैंक से पोषित योजनाओं के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये तथा पुलिस विभाग के आवासीय एवं अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। न्यायिक अवसंरचना सुविधाओं के लिए लगभग 22 करोड़ रुपये और पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के अनुरक्षण सहित लोक निर्माण विभाग के लिए 31 करोड़ रुपये तथा ग्राम्य विकास विभाग के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। अनुपूरक बजट में इन प्रावधानों के माध्यम से प्रदेश में पहले से संचालित विकास योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।

उत्तराखंड में किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में किसानों कृषि आधारित गतिविधियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विशेष महत्व दिया है। अन्नपूर्ति योजना के अंतर्गत किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह अनुपूरक बजट की प्रमुख मदों में शामिल है। राज्य सरकार ने इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को प्रोत्साहन देने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और किसानों की आजीविका से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए भी धनराशि प्रस्तावित की है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वर्षा आधारित खेती का विशेष महत्व है। अनुपूरक बजट में उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना यानी जायका के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस परियोजना का संबंध प्रदेश में जलवायु अनुकूल कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने से है। किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाने और स्थानीय कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भी बजट में स्थान दिया गया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह योजना कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़े सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सहकारिता के माध्यम से किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसान पेंशन योजना के लिए भी 9 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका के वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन और मौन पालन से संबंधित व्यवस्थाओं को भी अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए लगभग 28 करोड़ रुपये तथा नई मौन पालन नीति के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त गौ सदनों के निर्माण के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये रखे गए हैं। अनुपूरक बजट के इन प्रावधानों के माध्यम से एक ओर किसानों से कृषि उपज की खरीद की व्यवस्था को वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है तो दूसरी ओर कृषि से जुड़े छोटे उद्यमों सहकारिता और वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है।

उत्तराखंड के अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य शिक्षा और युवा कल्याण पर जोर आयुष्मान और गोल्डन कार्ड के लिए 225 करोड़ रुपये

गैरसैंण/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं शिक्षा महिला एवं बाल कल्याण और युवाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने अटल आयुष्मान योजना और राज्य कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए कुल 225 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया है। अनुपूरक बजट में आम जनता को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ रुपये तथा राज्य कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत 125 करोड़ रुपये रखे गए हैं। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज सहित नर्सिंग कॉलेजों से संबंधित कार्यों के लिए पूंजीगत मद में लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। शिक्षा में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार को भी बजट में महत्व दिया गया है। विद्यालयी शिक्षा और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी जेईई और सामान्य विधि प्रवेश परीक्षा यानी क्लैट जैसी प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। युवाओं को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए भी अनुपूरक बजट में व्यवस्था की गई है। खेल विश्वविद्यालय के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये तथा आगामी राष्ट्रीय खेलों से पूर्व खिलाड़ियों के विशेष प्रशिक्षण शिविरों के लिए 8 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। खिलाड़ियों की छात्रवृत्तियों के लिए लगभग 5.50 करोड़ रुपये और ओपन जिम की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये का भी प्रावधान है। महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं सामाजिक सुरक्षा पर भी बजट में ध्यान दिया गया है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 और पोषण अभियान के अंतर्गत लगभग 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भोजन माताओं के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये और निराश्रित विधवा पेंशन के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न कल्याणकारी पेंशन योजनाओं के लिए लगभग 93 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री बाल सानिध्य योजना के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य सुरक्षा से लेकर डिजिटल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी खेल सुविधाओं पोषण और सामाजिक सुरक्षा तक विभिन्न आवश्यकताओं के लिए धनराशि प्रस्तावित की गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य संबंधित योजनाओं के संचालन और विकास संबंधी आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।

उत्तराखंड के अनुपूरक बजट में कुंभ के लिए 290 करोड़ और गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये प्रस्तावित

गैरसैंण/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की यात्राओं से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया है। आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न अनुदानों के अंतर्गत अवस्थापना सुविधाओं हेतु कुल मिलाकर लगभग 290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हरिद्वार में कुंभ से संबंधित तैयारियों के अंतर्गत हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना को भी अनुपूरक बजट में स्थान दिया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए पूंजीगत मद में 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी नंदा राजजात यात्रा के संचालन के लिए भी पूंजीगत मद में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में नंदा राजजात यात्रा का विशेष महत्व है। अनुपूरक बजट में इस यात्रा से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए धनराशि रखी गई है। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में पेयजल व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना को भी अनुपूरक बजट में स्थान मिला है। गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पेयजल क्षेत्र में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ठेकेदारों के बकाया भुगतान सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त पेयजल विभाग की केएफडब्ल्यू परियोजना के लिए लगभग 110 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। राज्य में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को भी बजट में ध्यान दिया गया है। जोशीमठ और अन्य स्थानों पर भू-धंसाव की समस्या को देखते हुए आवश्यक कार्यों के लिए लगभग 48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार अनुपूरक बजट में एक ओर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं को वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है तो दूसरी ओर गैरसैंण सहित विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल और आपदा संबंधी कार्यों के लिए भी संसाधन रखे गए हैं।

गैरसैंण में पेयजल आपूर्ति को मिलेगा मजबूत आधार रामगंगा नदी पर बांध निर्माण के लिए 122.68 करोड़ रुपये की स्वीकृति

गैरसैंण-चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से चमोली जनपद के गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत रामगंगा नदी पर पेयजल आपूर्ति के लिए बांध निर्माण परियोजना को 122.6891 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के लिए प्रथम किश्त के रूप में 2.454 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में गैरसैंण नगर और उससे लगी आबादी की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण की योजना तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत प्रस्तावित गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल आपूर्ति के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार परियोजना की कुल लागत 12268.91 लाख रुपये अर्थात 122.6891 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें प्रथम चरण के लिए पूर्व में स्वीकृत 24.76 लाख रुपये की धनराशि भी सम्मिलित है। परियोजना के लिए प्रथम किश्त के रूप में कुल स्वीकृत लागत के लगभग दो प्रतिशत के बराबर 2.454 करोड़ रुपये की धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम आहरित कर उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। यह धनराशि परियोजना के कार्य शुरू करने के लिए टोकन धनराशि के रूप में प्रदान की गई है। शासनादेश के अनुसार प्रारंभिक धनराशि का समायोजन भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों के पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना यानी एसएएससीआई के अंतर्गत धनराशि प्राप्त होने पर राज्य सेक्टर से किया जाएगा। परियोजना के लिए आगे की धनराशि भी इसी योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था के माध्यम से परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किस्तों में किया जाएगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उपलब्ध कराई गई धनराशि का निर्धारित समयसीमा में उपयोग सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के क्रियान्वयन में निर्माण की गुणवत्ता तकनीकी उपयुक्तता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बांध एवं बैराज के निर्माण से संबंधित संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जांच एवं सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप से अपनाई जाए। सिंचाई विभाग को बांध एवं बैराज के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले क्षेत्रीय मुख्य अभियंता द्वारा कार्यस्थल का निरीक्षण किया जाएगा। पेयजल योजना के लिए सबसे मितव्ययी और तकनीकी रूप से व्यवहार्य विकल्प का चयन करते हुए यह प्रमाणित करना होगा कि इससे अधिक किफायती विकल्प उपलब्ध नहीं है। आवश्यकतानुसार मृदा परीक्षण तथा भूगर्भीय उपयुक्तता से संबंधित आख्या प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। निर्माण में उपयोग होने वाली रेत बजरी ईंट सीमेंट स्टील पाइप तथा अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड यानी एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही निर्माण कार्य का तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है। परियोजना के निर्माण के दौरान जल स्रोत में डिजाइन अवधि तक आवश्यक न्यूनतम जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बांध निर्माण के कारण डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रभावित होने वाले गांवों को निर्माण कार्य के दौरान तथा निर्माण पूरा होने के बाद भी निर्बाध रूप से जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। निर्माण कार्यों की योजना इस प्रकार तैयार करने पर जोर दिया गया है कि परियोजना के विभिन्न घटकों का चरणबद्ध एवं जोनवार निर्माण हो और निर्मित संरचनाओं का समुचित उपयोग किया जा सके। यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्य रोकना पड़े तो उसे तकनीकी सुरक्षा एवं उपयोगिता की दृष्टि से उपयुक्त चरण पर ही रोका जाएगा। परियोजना की लागत के प्रभावी प्रबंधन के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं। कार्यदायी संस्था को तकनीकी स्वीकृति देते समय केवल अपरिहार्य कार्यों एवं मदों को ही आगणन में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। निविदा स्वीकृत होने पर यदि स्वीकृत लागत की तुलना में बचत होती है तो बची हुई धनराशि शासन को वापस करनी होगी। अपरिहार्य परिस्थितियों में अतिरिक्त कार्य कराने से पहले सक्षम अधिकारी का अनुमोदन प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित दरों श्रम घटक और कार्य की गुणवत्ता के अनुरूप व्यय सुनिश्चित किया जाएगा। उपकरणों की खरीद में लागत प्रभावशीलता एवं ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखने तथा जहां तक संभव हो निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदेश में निर्मित स्थानीय सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और राज्य को राजस्व प्राप्ति को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है। परियोजना में किसी प्रकार का अनधिकृत वित्तीय विचलन नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक मद पर उसी सीमा तक व्यय किया जाएगा जितनी धनराशि स्वीकृत की गई है। प्राक्कलन का पुनरीक्षण स्वीकार नहीं किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। योजना के अंतर्गत खरीद एवं निर्माण संबंधी कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2025 सहित लागू नियमों और शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के प्रभावी अनुश्रवण के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाया जाएगा जिसमें स्वीकृत कार्य का नाम स्वीकृति वर्ष स्वीकृत लागत कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि कार्यदायी संस्था और ठेकेदार का नाम अंकित किया जाएगा। कार्य शुरू होने से पहले निर्माण के दौरान तथा कार्य समाप्त होने के बाद की तस्वीरें और वीडियो भी सुरक्षित रखे जाएंगे। कार्यदायी संस्था के साथ निर्धारित प्रारूप में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना परियोजना को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करना तथा वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का विवरण शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। संबंधित अधिशासी अभियंता को परियोजना के औचित्य आगणन की लागत एवं दरों की उपयुक्तता तथा कार्य की समयबद्धता और गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी बनाया गया है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के क्रियान्वयन में बजट मैनुअल वित्तीय हस्तपुस्तिका अधिप्राप्ति नियमावली तथा मितव्ययता से संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंचे। गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के पूर्ण होने पर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जरूरी आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र की दीर्घकालिक पेयजल आवश्यकताओं की योजना बनाने तथा भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी आधार तैयार होगा।

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