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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल/देहरादून। एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित युवा संगम कार्यक्रम का वैलिडेटरी सेशन एवं समापन समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक उपस्थित रहे। इस दौरान पश्चिम बंगाल से आए युवा प्रतिनिधियों को डॉ.निशंक ने प्रमाण पत्र वितरित किए। इन युवा प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के विभिन्न सांस्कृतिक भौगोलिक सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों का सघन भ्रमण किया। उत्तराखंड में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का आयोजन नोडल संस्थान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर से किया गया जबकि पश्चिम बंगाल की ओर से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर नोडल एजेंसी के रूप में शामिल रहा। गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह के निरंतर मार्गदर्शन एवं कुशल निगरानी में यह पूरा आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अपने संबोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश की अखंडता विविधता और सांस्कृतिक प्रगाढ़ता को मजबूत करने का एक अनुपम महायज्ञ है। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड की यह सांस्कृतिक साझेदारी देश की विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। हजारों आवेदनों की लंबी प्रक्रिया के बाद चयनित होकर आए युवा प्रतिनिधि अत्यंत भाग्यशाली हैं। आज पूरे देश की निगाहें इन युवाओं पर हैं क्योंकि वे ही आने वाले समय में विकसित भारत के मुख्य संवाहक बनेंगे। डॉ.निशंक ने अपने अनुभव साझा करते हुए उत्तराखंड की अद्वितीय पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता अध्यात्म देव संस्कृति और ज्ञान परंपरा के कारण पूरे विश्व में अनोखा स्थान रखता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस यात्रा से अर्जित अनुभवों को अपने जीवन में समाहित करें और राष्ट्रीय एकता के स्थायी दूत बनें। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों एवं वक्ताओं ने डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के कार्यकाल के योगदान को भी याद किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की रूपरेखा तय करने और इसे देशभर में आकार देने का कार्य डॉ.निशंक के नेतृत्व में संपन्न हुआ था। इसके साथ ही एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को शिक्षा कला और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से जमीनी स्तर पर उतारने के लिए तैयार की गई रूपरेखा और विजन का परिणाम आज युवा संगम जैसे बहुआयामी आयोजनों के रूप में दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय परिवार ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को दूरदर्शी दिशा देने के लिए डॉ.निशंक का आभार व्यक्त किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसे अंतरराज्यीय कार्यक्रम देश के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति भाषा खान-पान और परंपराओं को निकटता से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के युवाओं के बीच बना यह आत्मीय संबंध दोनों राज्यों के सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ नोडल अधिकारी एवं अर्थ साइंस संकाय के डीन प्रो.महावीर सिंह नेगी के स्वागत संबोधन से हुआ। प्रो.नेगी ने मुख्य अतिथि डॉ.निशंक को पुष्पगुच्छ शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया। पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों ने भी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। स्वागत भाषण देते हुए प्रो.महावीर सिंह नेगी ने कहा कि युवा संगम के सफल आयोजन से पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत साहसिक पर्यटन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से जानने-समझने का अवसर मिला है। यह अंतरराज्यीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण युवाओं के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और उनके सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में गढ़वाल विश्वविद्यालय की फैकल्टी एवं टीम सदस्यों डॉ.नरेंद्र कुमार डॉ.हिमशिखा गोस्वामी और डॉ.सर्वेश उनियाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संपूर्ण संयोजन डॉ.सर्वेश उनियाल ने किया। वहीं पश्चिम बंगाल की नोडल एजेंसी आईआईटी खड़गपुर के पांच फैकल्टी सदस्य भी पूरे भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों के साथ निरंतर उपस्थित रहे। समारोह का संचालन डॉ.हिमशिखा गोस्वामी ने किया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ.नरेंद्र कुमार ने मुख्य अतिथि डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद विश्वविद्यालय प्रशासन आईआईटी खड़गपुर की टीम तथा पश्चिम बंगाल से आए सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

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