प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। रुद्रप्रयाग जिले के विकासखंड जखोली के बजीरा गांव निवासी मेहनती काश्तकार महावीर सिंह राणा ने कीवी उत्पादन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा पेश की है। उन्होंने अपने खेतों में कीवी का उत्पादन कर न केवल अपनी आजीविका का साधन तैयार किया है बल्कि आसपास के काश्तकारों को भी कीवी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का काम किया है। महावीर सिंह राणा द्वारा उत्पादित कई क्विंटल कीवी रुद्रप्रयाग सहित अन्य स्थानों की मंडियों में भेजी जा चुकी है। बाजार में कीवी की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्र के अन्य काश्तकार भी इसके उत्पादन के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। जखोली विकासखंड के बजीरा लस्या क्षेत्र में महावीर सिंह राणा ने अपने खेतों में कीवी के पौधे लगाए थे जो अब फल देने लगे हैं। वह इससे पहले भी कई क्विंटल कीवी बाहर की मंडियों में भेज चुके हैं। उत्पाद की लगातार मिल रही मांग से वह काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यदि उनके उत्पाद को इसी तरह आसानी से बाजार उपलब्ध होता रहा तो वह आगामी समय में कीवी का उत्पादन और अधिक बढ़ाएंगे। पहाड़ में कीवी उत्पादन की पहल कर रहे महावीर सिंह राणा आसपास के काश्तकारों को भी इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य बजीरा वार्ड नीता बुटोला ने कहा कि कीवी उत्पादन स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार का एक बड़ा जरिया बन सकता है। उन्होंने बताया कि बजीरा गांव निवासी महावीर सिंह राणा ने मूल रूप से विदेशों में होटल में नौकरी कर अपने रोजगार की शुरुआत की थी। अपनी मिट्टी से लगाव होने के कारण वह कई साल पहले होटल की नौकरी छोड़कर वापस अपने गांव लौट आए। गांव लौटने के बाद उन्होंने अपने खेतों में कीवी के पौधे लगाए और अब ये पौधे फल देने लगे हैं। महावीर सिंह राणा का कहना है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद बजीरा के हिलाऊं क्षेत्र की जलवायु सब्जी और फल उत्पादन के लिए अनुकूल है। वह खेती से विमुख हो रहे पर्वतीय किसानों को दोबारा खेतों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। उन्होंने इस बार अपने खेतों में कई क्विंटल कीवी का उत्पादन किया है।
