डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में कारगिल विजय दिवस पर वीर जवानों को नमन
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र एवम देवभूमि विचार मंच के संयुक्त तत्वाधान में आज कारगिल विजय दिवस मनाया गया।कारगिल विजय दिवस हमारे देश के वीर जवानों के साहस,बलिदान,और अटल संकल्प का प्रतीकस्वरूप भारतीय इतिहास याद किया जाएगा। 26 वर्ष पूर्व,हमारे बहादुर सैनिकों ने कारगिल की बर्फीली चोटियों पर अपने अदम्य साहस और अडिग संकल्प से दुश्मन को धूल चटा कर हमारी मातृभूमि की रक्षा की थी। इन कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमारे जवानों ने धैर्य और साहस का परिचय दिया। हमारे वीर सैनिकों ने लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर,अत्यंत प्रतिकूल मौसम में,सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मनों को हराने का अद्वितीय पराक्रम दिखाया।कारगिल युद्ध सिर्फ एक सैन्य संघर्ष नहीं था,बल्कि यह हमारे राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक था।इस संघर्ष में 527 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी,और 1300 से अधिक घायल हुए। इन वीरों के बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्रता की हवा में सांस ले रहे हैं। कई युवा सैनिकों एवम सैन्य अधिकारियों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।जिनमें कैप्टन विक्रम बत्रा,कैप्टन अनुज नय्यर,लेफ्टिनेंट मनोज पांडे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव,राइफलमैन संजय कुमार आदि ने अदम्य साहस का परिचय देकर देश की रक्षा की।कारगिल विजय दिवस के रूप में हर वर्ष हम सभी अपने वीर जवानों की याद कर यह संकल्प लेते हैं कि हम उनके बलिदान को स्मरण करेंगे और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे।अध्यक्षीय उद्बोधन में केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कारगिल विजय दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी श्रोताओं के बीच रखी। प्रो.सेमवाल ने कारगिल युद्ध से पहले के भारत पाक संबंधों,पूर्ववर्ती विभिन्न युद्धों,अंतरराष्ट्रीय संबंधों एवम कई अन्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। डॉ.रोहित महर आंतरिक सुरक्षा और संबंधित खतरों के बारे में अपना वक्तव्य दिया। डॉ.वरुण बड़थ्वाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में तथा नागरिक कर्तव्य के बारे में विचार व्यक्त किए। डॉ.प्रकाश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भरता एवं सैन्य बलों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय से विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे। जिनमें डॉ.वरुण बड़थ्वाल,डॉ.रोहित मगर,डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,बृजेश राजभर सहित अनेक शोधार्थी और छात्र छात्राएं भी उपस्थित रहे।
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डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में कारगिल विजय दिवस पर वीर जवानों को नमन
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र एवम देवभूमि विचार मंच के संयुक्त तत्वाधान में आज कारगिल विजय दिवस मनाया गया।कारगिल विजय दिवस हमारे देश के वीर जवानों के साहस,बलिदान,और अटल संकल्प का प्रतीकस्वरूप भारतीय इतिहास याद किया जाएगा। 26 वर्ष पूर्व,हमारे बहादुर सैनिकों ने कारगिल की बर्फीली चोटियों पर अपने अदम्य साहस और अडिग संकल्प से दुश्मन को धूल चटा कर हमारी मातृभूमि की रक्षा की थी। इन कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमारे जवानों ने धैर्य और साहस का परिचय दिया। हमारे वीर सैनिकों ने लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर,अत्यंत प्रतिकूल मौसम में,सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मनों को हराने का अद्वितीय पराक्रम दिखाया।कारगिल युद्ध सिर्फ एक सैन्य संघर्ष नहीं था,बल्कि यह हमारे राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक था।इस संघर्ष में 527 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी,और 1300 से अधिक घायल हुए। इन वीरों के बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्रता की हवा में सांस ले रहे हैं। कई युवा सैनिकों एवम सैन्य अधिकारियों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।जिनमें कैप्टन विक्रम बत्रा,कैप्टन अनुज नय्यर,लेफ्टिनेंट मनोज पांडे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव,राइफलमैन संजय कुमार आदि ने अदम्य साहस का परिचय देकर देश की रक्षा की।कारगिल विजय दिवस के रूप में हर वर्ष हम सभी अपने वीर जवानों की याद कर यह संकल्प लेते हैं कि हम उनके बलिदान को स्मरण करेंगे और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे।अध्यक्षीय उद्बोधन में केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कारगिल विजय दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी श्रोताओं के बीच रखी। प्रो.सेमवाल ने कारगिल युद्ध से पहले के भारत पाक संबंधों,पूर्ववर्ती विभिन्न युद्धों,अंतरराष्ट्रीय संबंधों एवम कई अन्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। डॉ.रोहित महर आंतरिक सुरक्षा और संबंधित खतरों के बारे में अपना वक्तव्य दिया। डॉ.वरुण बड़थ्वाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में तथा नागरिक कर्तव्य के बारे में विचार व्यक्त किए। डॉ.प्रकाश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भरता एवं सैन्य बलों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय से विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे। जिनमें डॉ.वरुण बड़थ्वाल,डॉ.रोहित मगर,डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,बृजेश राजभर सहित अनेक शोधार्थी और छात्र छात्राएं भी उपस्थित रहे।