प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल।विकासखण्ड जखोली की ग्राम पंचायत कोट बांगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विशाल भण्डारे एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ है। समापन अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कहा अच्छी बातें कहीं से भी मिले उसे जीवन में अवश्य धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे गुण शत्रु में भी दिखते हों तो उनको सराहने का साहस भी अवश्य होना चाहिए। कहा कि प्रशंसा सुनना जितना आसान होता है,प्रशंसा को पचा पाना उतना ही कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि स्वयं की ज्यादा प्रशंसा सुनने से व्यक्ति के भीतर अहम जन्म लेता है,तो अधिक सम्मान की प्राप्ति भी जीवन उत्थान के मार्ग में सदैव बाधक होती है और दूसरों की प्रशंसा करना स्वयं के अहम का नाश करते हुए अपने को सहज ही दूसरों के प्रेम और सम्मान का अधिकारी बना देती है। उन्होंने कहा कि राजा बलि की प्रशंसा करके ही भगवान वामन ने तीन लोक सहज में प्राप्त कर लिए थे।दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करना एवं उन अच्छे गुणों को अपने जीवन में धारण करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन में उन्नति का मार्ग है।समापन अवसर पर बेदप्रकाश सेमवाल,प्रीति सेमवाल,राजेन्द्र सेमवाल,तुलसी सेमवाल,भानु सेमवाल,पुनीता सेमवाल,आयुष सेमवाल,कल्पेश्वरी सेमवाल,गुड्डी नौडियाल,सुनिता मैठानी,समाजिक कार्यकर्ता चिरंजी प्रसाद सेमवाल,संगीता भट्ट,विपिन सेमवाल,दीक्षा सेमवाल,अनमोल सेमवाल,रक्षा सेमवाल आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।
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विशाल भण्डार के साथ हुआ भगवत कथा का समापन
प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल।विकासखण्ड जखोली की ग्राम पंचायत कोट बांगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विशाल भण्डारे एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ है। समापन अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कहा अच्छी बातें कहीं से भी मिले उसे जीवन में अवश्य धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे गुण शत्रु में भी दिखते हों तो उनको सराहने का साहस भी अवश्य होना चाहिए। कहा कि प्रशंसा सुनना जितना आसान होता है,प्रशंसा को पचा पाना उतना ही कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि स्वयं की ज्यादा प्रशंसा सुनने से व्यक्ति के भीतर अहम जन्म लेता है,तो अधिक सम्मान की प्राप्ति भी जीवन उत्थान के मार्ग में सदैव बाधक होती है और दूसरों की प्रशंसा करना स्वयं के अहम का नाश करते हुए अपने को सहज ही दूसरों के प्रेम और सम्मान का अधिकारी बना देती है। उन्होंने कहा कि राजा बलि की प्रशंसा करके ही भगवान वामन ने तीन लोक सहज में प्राप्त कर लिए थे।दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करना एवं उन अच्छे गुणों को अपने जीवन में धारण करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन में उन्नति का मार्ग है।समापन अवसर पर बेदप्रकाश सेमवाल,प्रीति सेमवाल,राजेन्द्र सेमवाल,तुलसी सेमवाल,भानु सेमवाल,पुनीता सेमवाल,आयुष सेमवाल,कल्पेश्वरी सेमवाल,गुड्डी नौडियाल,सुनिता मैठानी,समाजिक कार्यकर्ता चिरंजी प्रसाद सेमवाल,संगीता भट्ट,विपिन सेमवाल,दीक्षा सेमवाल,अनमोल सेमवाल,रक्षा सेमवाल आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।