Spread the love

देवभूमि के पहाड़ों में हरियाली और जीवन बचाने की पुकार: चीड़ हटाओ बांज लगाओ आंदोलन

प्रदीप कुमार श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की महान धरती एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण की नई गूंज से भर उठी है। श्री उमेश्वर धाम देवप्रयाग से लेकर श्री बद्रीनाथ धाम तक 12 सितम्बर से 21 सितम्बर 2025 तक निकाली जा रही चीड़ हटाओ,बांज लगाओ पदयात्रा ने न केवल पर्यावरण प्रेमियों को,बल्कि आम ग्रामीणों,युवाओं और महिलाओं को भी गहरी प्रेरणा दी है। यह पदयात्रा मात्र एक अभियान नहीं,बल्कि पर्वतीय जीवन और प्राकृतिक संतुलन को बचाने की ऐतिहासिक पुकार है। पर्वतीय क्षेत्र में अनियंत्रित चीड़ के जंगलों के फैलाव ने जहां जलस्रोतों को सूखा दिया है,वहीं खेत-खलिहान और बाग-बगीचों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। चीड़ का अत्यधिक प्रसार आगजनी और जैव विविधता के लिए खतरा बन चुका है। इसके विपरीत,बांज,बुरांश,देवदार जैसे वृक्ष हिमालयी जलवायु के संरक्षक और जलधाराओं के पोषक हैं। पदयात्रा संयोजकों की अपील-मुख्य संयोजक रमेश बौड़ाई पर्यावरण प्रेमी ने कहा आज पहाड़ की नदियां सूख रही हैं,ग्लेशियर पिघल रहे हैं और गांव खाली हो रहे हैं। यह पदयात्रा केवल विरोध नहीं,बल्कि समाधान की यात्रा है। चीड़ हटाकर बांज और बुरांश लगाने से ही हमारी धरोहर,जलधाराएं और खेती बचेंगी। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है और इसमें हर नागरिक को जुड़ना होगा। श्रीश्री 108 सूरजगिरी महाराज जुना अखाड़ा,नागा साधु ने कहा गंगा की धारा और हिमालय की छाया तब तक जीवित रहेगी,जब तक हम जल देने वाले वृक्षों का सम्मान करेंगे। चीड़ हटाना और बांज लगाना केवल आंदोलन नहीं,बल्कि आध्यात्मिक तपस्या है। उत्तम नेगी गांव प्रेमी व पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा गांव और जंगल का रिश्ता टूटा तो पहाड़ खाली हो जाएंगे। हमें पलायन रोकना है तो जल-स्रोत और खेतों की हरियाली लौटानी होगी। बांज और बुरांश ही गांवों को जीवन देंगे। सतेन्द्र रावत सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा चीड़ की आग से गांव हर साल जलते हैं। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर सुरक्षित भविष्य के लिए पेड़ लगाएं। यह लड़ाई सिर्फ पर्यावरण की नहीं,बल्कि हमारी पीढ़ियों के अस्तित्व की है। समाजसेवी गम्मा सिंह ने कहा कि पर्यावरण बचाना है तो हमें अपने जल जंगल का संरक्षण करना होगा,बांज के जड़ों का पानी हमें स्वस्थ जीवन देता है। यह आंदोलन केवल पेड़ लगाने का नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल,जंगल और जमीन बचाने का संकल्प है। देवभूमि की पुकार है-चीड़ हटाओ,बांज लगाओ,हरियाली से जीवन सजाओ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed