वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विश्वविद्यालय में हुआ सामूहिक गायन प्रधानमंत्री का लाइव संबोधन देखा गया
श्रीनगर गढ़वाल। 7 नवंबर भारत सरकार के निर्देशानुसार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आज एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर स्थित ACL सभागार में आयोजित हुआ,जिसकी अध्यक्षता प्रभारी कुलपति प्रोफेसर एम.एस.एम.रौथाण ने की तथा संयोजन अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ,जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों,अधिकारियों,कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने एकजुट होकर भाग लिया।सभागार देशभक्ति के उत्साह और राष्ट्रीय एकता की भावना से ओतप्रोत हो उठा।इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वंदे मातरम के 150 वर्ष पर आधारित राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस गीत को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बताते हुए देशवासियों से राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।प्रो.एम.एस.एम.रौथाण ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह गीत हमें एकता,त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव की भावना को सशक्त बनाता रहेगा।वहीं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो ओ पी गुसाईं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र जीवन राष्ट्र के भविष्य की नींव है। वंदे मातरम का सामूहिक गायन युवाओं में देशभक्ति,अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को जागृत करता है। विश्वविद्यालय वर्षभर इस विषय पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों संगोष्ठियों,वाद-विवाद प्रतियोगिताओं,निबंध लेखन और सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन करेगा ताकि यह अमृत वर्ष प्रेरणादायी रूप में स्मरणीय बन सके।कार्यक्रम में मुख्य नियंता प्रो.एस सी सती,प्रो.एचसी नैनवाल,प्रो.मंजुला राणा,प्रो.वाई एस फर्स्वाण,प्रो.अतुल ध्यानी समेत विभिन्न विभागों के शिक्षक,अधिकारी,कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने वंदे मातरम के माध्यम से भारतीय संस्कृति,स्वतंत्रता चेतना और एकता के भाव को पुनःअभिव्यक्त किया।
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वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विश्वविद्यालय में हुआ सामूहिक गायन प्रधानमंत्री का लाइव संबोधन देखा गया
श्रीनगर गढ़वाल। 7 नवंबर भारत सरकार के निर्देशानुसार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आज एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर स्थित ACL सभागार में आयोजित हुआ,जिसकी अध्यक्षता प्रभारी कुलपति प्रोफेसर एम.एस.एम.रौथाण ने की तथा संयोजन अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ,जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों,अधिकारियों,कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने एकजुट होकर भाग लिया।सभागार देशभक्ति के उत्साह और राष्ट्रीय एकता की भावना से ओतप्रोत हो उठा।इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वंदे मातरम के 150 वर्ष पर आधारित राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस गीत को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बताते हुए देशवासियों से राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।प्रो.एम.एस.एम.रौथाण ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं,बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह गीत हमें एकता,त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव की भावना को सशक्त बनाता रहेगा।वहीं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो ओ पी गुसाईं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र जीवन राष्ट्र के भविष्य की नींव है। वंदे मातरम का सामूहिक गायन युवाओं में देशभक्ति,अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को जागृत करता है। विश्वविद्यालय वर्षभर इस विषय पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों संगोष्ठियों,वाद-विवाद प्रतियोगिताओं,निबंध लेखन और सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन करेगा ताकि यह अमृत वर्ष प्रेरणादायी रूप में स्मरणीय बन सके।कार्यक्रम में मुख्य नियंता प्रो.एस सी सती,प्रो.एचसी नैनवाल,प्रो.मंजुला राणा,प्रो.वाई एस फर्स्वाण,प्रो.अतुल ध्यानी समेत विभिन्न विभागों के शिक्षक,अधिकारी,कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने वंदे मातरम के माध्यम से भारतीय संस्कृति,स्वतंत्रता चेतना और एकता के भाव को पुनःअभिव्यक्त किया।