पहाड़ी स्वाद और संस्कृति का अनूठा संगम बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले में हुई पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले के अंतर्गत सोमवार को आयोजित पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता में पारंपरिक व्यंजनों की मनमोहक खुशबू और पहाड़ी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।प्रतियोगिता दो वर्गों-महिला स्वयं सहायता समूह और महिला समूह-में आयोजित की गई।प्रतिभागियों ने पारंपरिक व्यंजनों को अपने विशिष्ट स्वाद और आकर्षक साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत किया। स्वयं सहायता समूह वर्ग में तीरथ धाम समूह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया,जबकि शक्ति धाम समूह द्वितीय और भागीरथी समूह तृतीय स्थान पर रहे। महिला समूह वर्ग में रश्मि भट्ट प्रथम,जसोदा देवी द्वितीय और लक्ष्मी देवी तृतीय स्थान पर रहीं।प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने दाल के पकोड़े,कंडाली की सब्जी,स्थानीय चटनी,खीर सहित अनेक पारंपरिक व्यंजन तैयार किए,जिनकी सुगंध और स्वाद ने निर्णायकों और दर्शकों को आकर्षित किया। निर्णायक मुकेश भट्ट और सरिता कलूडा ने व्यंजनों का मूल्यांकन उनकी प्रस्तुति,स्वाद और पारंपरिकता के आधार पर किया। निर्णायकों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल पारंपरिक पाक कला के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों के उपयोग और पहाड़ी संस्कृति के संवर्धन को भी प्रोत्साहित करती हैं।
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पहाड़ी स्वाद और संस्कृति का अनूठा संगम बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले में हुई पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले के अंतर्गत सोमवार को आयोजित पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता में पारंपरिक व्यंजनों की मनमोहक खुशबू और पहाड़ी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।प्रतियोगिता दो वर्गों-महिला स्वयं सहायता समूह और महिला समूह-में आयोजित की गई।प्रतिभागियों ने पारंपरिक व्यंजनों को अपने विशिष्ट स्वाद और आकर्षक साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत किया। स्वयं सहायता समूह वर्ग में तीरथ धाम समूह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया,जबकि शक्ति धाम समूह द्वितीय और भागीरथी समूह तृतीय स्थान पर रहे। महिला समूह वर्ग में रश्मि भट्ट प्रथम,जसोदा देवी द्वितीय और लक्ष्मी देवी तृतीय स्थान पर रहीं।प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने दाल के पकोड़े,कंडाली की सब्जी,स्थानीय चटनी,खीर सहित अनेक पारंपरिक व्यंजन तैयार किए,जिनकी सुगंध और स्वाद ने निर्णायकों और दर्शकों को आकर्षित किया। निर्णायक मुकेश भट्ट और सरिता कलूडा ने व्यंजनों का मूल्यांकन उनकी प्रस्तुति,स्वाद और पारंपरिकता के आधार पर किया। निर्णायकों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल पारंपरिक पाक कला के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों के उपयोग और पहाड़ी संस्कृति के संवर्धन को भी प्रोत्साहित करती हैं।