अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी ने फिश हैचरी गढ़वाल विश्वविद्यालय को हस्तांतरित
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।17 नवम्बर अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी द्वारा निर्मित फिश हैचरी अब गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रबंधन में संचालित होगी। कम्पनी ने फिश हैचरी को औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया है। फिश हैचरी में उत्तराखंड की राज्य मछली महासीर टॉर प्यूटिटोरा का संरक्षण और पालन किया जाता है। आईयूसीएन ने इस प्रजाति को वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। यह मछली हर वर्ष मैदानी क्षेत्रों की नदियों से पहाड़ी जलधाराओं में प्रजनन के लिए पहुंचती है। पहाड़ी नदियों में इसकी संख्या बढ़ाने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय का जंतु विज्ञान विभाग लंबे समय से शोध कार्य कर रहा है। अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी ने वर्ष 2015 में इस फिश हैचरी का निर्माण कराया था और रखरखाव का कार्य भी कम्पनी के सहयोग से चल रहा था। सोमवार को विश्वविद्यालय के चौरास स्थित जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित बैठक में फिश हैचरी को आधिकारिक रूप से विभाग को सौंप दिया गया। अब इसका पूरा संचालन और प्रबंधन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। बैठक में अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी की ओर से महाप्रबंधक मानव संसाधन अरुण कुमार सिंह तथा जंतु विज्ञान विभाग की ओर से प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो.मंजु प्रकाश गुसाई,प्रो.ओम प्रकाश गुसाईं,प्रो.दीपक सिंह,फिश हैचरी संयोजक प्रो.आर.एस.फर्त्याल,विजय आनंद बहुगुणा,डॉ.आनंद कुमार,डॉ.जीतेन्द्र सिंह राणा और अजय भूषण उपस्थित रहे।
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अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी ने फिश हैचरी गढ़वाल विश्वविद्यालय को हस्तांतरित
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।17 नवम्बर अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी द्वारा निर्मित फिश हैचरी अब गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रबंधन में संचालित होगी। कम्पनी ने फिश हैचरी को औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया है। फिश हैचरी में उत्तराखंड की राज्य मछली महासीर टॉर प्यूटिटोरा का संरक्षण और पालन किया जाता है। आईयूसीएन ने इस प्रजाति को वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। यह मछली हर वर्ष मैदानी क्षेत्रों की नदियों से पहाड़ी जलधाराओं में प्रजनन के लिए पहुंचती है। पहाड़ी नदियों में इसकी संख्या बढ़ाने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय का जंतु विज्ञान विभाग लंबे समय से शोध कार्य कर रहा है। अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी ने वर्ष 2015 में इस फिश हैचरी का निर्माण कराया था और रखरखाव का कार्य भी कम्पनी के सहयोग से चल रहा था। सोमवार को विश्वविद्यालय के चौरास स्थित जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित बैठक में फिश हैचरी को आधिकारिक रूप से विभाग को सौंप दिया गया। अब इसका पूरा संचालन और प्रबंधन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। बैठक में अलकनंदा हाइड्रोपावर कम्पनी की ओर से महाप्रबंधक मानव संसाधन अरुण कुमार सिंह तथा जंतु विज्ञान विभाग की ओर से प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो.मंजु प्रकाश गुसाई,प्रो.ओम प्रकाश गुसाईं,प्रो.दीपक सिंह,फिश हैचरी संयोजक प्रो.आर.एस.फर्त्याल,विजय आनंद बहुगुणा,डॉ.आनंद कुमार,डॉ.जीतेन्द्र सिंह राणा और अजय भूषण उपस्थित रहे।