प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। राजपुर विधानसभा क्षेत्र के अमरीक हॉल में अटल सुशासन सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन,राष्ट्रनिर्माण और वैचारिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व,उनके सुशासन मॉडल और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने अटल जी की नीतियों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए उन्हें देश की राजनीति और शासन व्यवस्था की दिशा तय करने वाला बताया। मुख्य वक्ता भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने राष्ट्रनिर्माण का अटल मॉडल विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल प्रधानमंत्री नहीं थे,बल्कि वे भारत की आत्मा को समझने वाले दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी का राष्ट्रनिर्माण मॉडल संवाद,सहमति,लोकतांत्रिक मूल्यों और सर्वसमावेशी विकास पर आधारित था। उन्होंने यह भी कहा कि अटल जी की सोच और नीतियां आज भी देश की राजनीति को दिशा दे रही हैं और वर्तमान सरकार उसी अटल विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए सबका साथ,सबका विकास,सबका विश्वास के मंत्र पर कार्य कर रही है। प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और उनकी वैचारिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल जी का जीवन सादगी,सिद्धांतों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया और सत्ता में आने पर सुशासन की मजबूत नींव रखी। पोखरण परमाणु परीक्षण,स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और विदेश नीति में भारत की सशक्त पहचान अटल जी की दूरदृष्टि के प्रमुख उदाहरण हैं। राजपुर विधायक खजान दास ने अटल जी का सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत का संकल्प विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अटल जी ने जिस सुशासन की परिकल्पना की थी,आज उसे साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें सामाजिक समरसता,पारदर्शी शासन,भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प शामिल है। अटल जी की सोच और मोदी सरकार की कार्यशैली मिलकर भारत को 2047 तक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं से अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को अपनाने और राष्ट्रसेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। सम्मेलन में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने अटल जी के आदर्शों पर चलने और संगठन को मजबूत करने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम संयोजक अक्षत जैन ने सभी अतिथियों,वक्ताओं और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के वैचारिक सम्मेलन समाज में सकारात्मक सोच और राष्ट्रहित के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन में राज्य मंत्री पुनीत मित्तल,श्याम अग्रवाल,भगवत प्रसाद मकवाना,मधु भट्ट,प्रदेश पदाधिकारी हरीश डोरा,आशीष नागरथ,उपाध्यक्ष सुनील शर्मा,ओम कक्कड़,अंबेडकर नगर मंडल प्रभारी प्रदीप कुमार,उमा नरेश तिवारी,साक्षी शंकर,अवधेश तिवारी,अंकुर जैन,मंडल अध्यक्ष पंकज शर्मा, पूनम शर्मा,राहुल पवार सहित पार्षदगण,कार्यकर्ता,बुद्धिजीवी वर्ग,समाजसेवी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अटल सुशासन सम्मेलन न केवल अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि का अवसर बना,बल्कि उनके विचारों को वर्तमान और भविष्य के भारत से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ।
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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। राजपुर विधानसभा क्षेत्र के अमरीक हॉल में अटल सुशासन सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन,राष्ट्रनिर्माण और वैचारिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व,उनके सुशासन मॉडल और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने अटल जी की नीतियों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए उन्हें देश की राजनीति और शासन व्यवस्था की दिशा तय करने वाला बताया। मुख्य वक्ता भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने राष्ट्रनिर्माण का अटल मॉडल विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल प्रधानमंत्री नहीं थे,बल्कि वे भारत की आत्मा को समझने वाले दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी का राष्ट्रनिर्माण मॉडल संवाद,सहमति,लोकतांत्रिक मूल्यों और सर्वसमावेशी विकास पर आधारित था। उन्होंने यह भी कहा कि अटल जी की सोच और नीतियां आज भी देश की राजनीति को दिशा दे रही हैं और वर्तमान सरकार उसी अटल विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए सबका साथ,सबका विकास,सबका विश्वास के मंत्र पर कार्य कर रही है। प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और उनकी वैचारिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल जी का जीवन सादगी,सिद्धांतों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया और सत्ता में आने पर सुशासन की मजबूत नींव रखी। पोखरण परमाणु परीक्षण,स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और विदेश नीति में भारत की सशक्त पहचान अटल जी की दूरदृष्टि के प्रमुख उदाहरण हैं। राजपुर विधायक खजान दास ने अटल जी का सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत का संकल्प विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अटल जी ने जिस सुशासन की परिकल्पना की थी,आज उसे साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें सामाजिक समरसता,पारदर्शी शासन,भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प शामिल है। अटल जी की सोच और मोदी सरकार की कार्यशैली मिलकर भारत को 2047 तक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं से अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को अपनाने और राष्ट्रसेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया। सम्मेलन में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने अटल जी के आदर्शों पर चलने और संगठन को मजबूत करने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम संयोजक अक्षत जैन ने सभी अतिथियों,वक्ताओं और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के वैचारिक सम्मेलन समाज में सकारात्मक सोच और राष्ट्रहित के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन में राज्य मंत्री पुनीत मित्तल,श्याम अग्रवाल,भगवत प्रसाद मकवाना,मधु भट्ट,प्रदेश पदाधिकारी हरीश डोरा,आशीष नागरथ,उपाध्यक्ष सुनील शर्मा,ओम कक्कड़,अंबेडकर नगर मंडल प्रभारी प्रदीप कुमार,उमा नरेश तिवारी,साक्षी शंकर,अवधेश तिवारी,अंकुर जैन,मंडल अध्यक्ष पंकज शर्मा, पूनम शर्मा,राहुल पवार सहित पार्षदगण,कार्यकर्ता,बुद्धिजीवी वर्ग,समाजसेवी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अटल सुशासन सम्मेलन न केवल अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि का अवसर बना,बल्कि उनके विचारों को वर्तमान और भविष्य के भारत से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ।