प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के संवर्धन में विशेष योगदान देने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय के हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ.विजय कांत पुरोहित को नयार घाटी पर्यावरण संरक्षण सम्मान समलौंण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पिछले 25 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों के कृषि संवर्धन एवं स्थानीय किसानों को आजीविका के अवसर प्रदान करने जैसे उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया। वर्ष 1974 में ग्राम किमनी,तहसील थराली,जनपद चमोली में जन्मे डॉ.पुरोहित ने वनस्पति विज्ञान,प्राणी विज्ञान एवं वानिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।उन्होंने एच.एन.बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पादप शरीर क्रिया विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की,जिसने उन्हें पादप जीव विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मजबूत आधार प्रदान किया।वर्तमान में डॉ.पुरोहित उच्च हिमालयी क्षेत्र में औषधीय और सुगंधित पौधों के प्रचार, प्रसार और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केन्द्र एच ए पी पी आर सी,कृषि और संबद्ध विज्ञान स्कूल,गढ़वाल विश्वविद्यालय,श्रीनगर के निदेशक भी हैं। डाॅ.पुरोहित के नेतृत्व में चलाए गए पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम जैसे घर-घर तेजपात,एक घर एक पौधा,घर से घर तक,और बंजर भूमि को मिश्रित जंगल के रूप में विकसित कर आजीविका का विकल्प स्थानीय किसानों और महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। उनके प्रयासों से उत्तराखंड के सात पहाड़ी जिलों के 4000 से अधिक पुरुष और महिला किसान औषधीय और सुगंधित पौधों के संवर्धन में सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। डाॅ.पुरोहित ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई किसान कार्यशालाओं,सेमिनारों और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया है और छात्रों को उनके शोध प्रबंध और पीएचडी कार्य में मार्गदर्शन भी प्रदान किया है।उनके शोध और योगदान को देखते हुए उन्हें भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी),ग्री गंगा गौरव सम्मान,2023 और गौरा देवी पर्यावरण सम्मान,2025 जैसे पुरस्कार भी मिल चुके हैं।डाॅ.पुरोहित को यह सम्मान उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं मैती आंदोलन के प्रेरक कल्याण सिंह रावत द्वारा प्रदान किया गया।गढ़वाल विश्वविद्यालय परिवार ने इस अवसर पर खुशी व्यक्त की और डॉ.पुरोहित के योगदान की सराहना की।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के संवर्धन में विशेष योगदान देने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय के हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ.विजय कांत पुरोहित को नयार घाटी पर्यावरण संरक्षण सम्मान समलौंण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पिछले 25 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों के कृषि संवर्धन एवं स्थानीय किसानों को आजीविका के अवसर प्रदान करने जैसे उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया। वर्ष 1974 में ग्राम किमनी,तहसील थराली,जनपद चमोली में जन्मे डॉ.पुरोहित ने वनस्पति विज्ञान,प्राणी विज्ञान एवं वानिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।उन्होंने एच.एन.बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पादप शरीर क्रिया विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की,जिसने उन्हें पादप जीव विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मजबूत आधार प्रदान किया।वर्तमान में डॉ.पुरोहित उच्च हिमालयी क्षेत्र में औषधीय और सुगंधित पौधों के प्रचार, प्रसार और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केन्द्र एच ए पी पी आर सी,कृषि और संबद्ध विज्ञान स्कूल,गढ़वाल विश्वविद्यालय,श्रीनगर के निदेशक भी हैं। डाॅ.पुरोहित के नेतृत्व में चलाए गए पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम जैसे घर-घर तेजपात,एक घर एक पौधा,घर से घर तक,और बंजर भूमि को मिश्रित जंगल के रूप में विकसित कर आजीविका का विकल्प स्थानीय किसानों और महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। उनके प्रयासों से उत्तराखंड के सात पहाड़ी जिलों के 4000 से अधिक पुरुष और महिला किसान औषधीय और सुगंधित पौधों के संवर्धन में सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। डाॅ.पुरोहित ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई किसान कार्यशालाओं,सेमिनारों और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया है और छात्रों को उनके शोध प्रबंध और पीएचडी कार्य में मार्गदर्शन भी प्रदान किया है।उनके शोध और योगदान को देखते हुए उन्हें भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी),ग्री गंगा गौरव सम्मान,2023 और गौरा देवी पर्यावरण सम्मान,2025 जैसे पुरस्कार भी मिल चुके हैं।डाॅ.पुरोहित को यह सम्मान उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं मैती आंदोलन के प्रेरक कल्याण सिंह रावत द्वारा प्रदान किया गया।गढ़वाल विश्वविद्यालय परिवार ने इस अवसर पर खुशी व्यक्त की और डॉ.पुरोहित के योगदान की सराहना की।