प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक क्रियाकलाप केंद्र में एमएमटीटीसी के तत्वावधान में पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण विषय पर 16 फरवरी से 21 फरवरी तक आयोजित छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का समापन समारोह संपन्न हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरूजी और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और मुख्य अतिथि प्रो.पवन सिन्हा को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.पवन सिन्हा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता स्थिरता और क्षमता निर्माण का वास्तविक आधार हमारी स्वदेशी ज्ञान परंपरा में निहित है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि क्रायोजेनिक तकनीक जैसी स्वदेशी तकनीक ने भारत को वैज्ञानिक रूप से सशक्त और वैश्विक स्तर पर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी चुनौतियों का सामना करने में देशी अनुसंधान और तकनीकी क्षमता निर्णायक रही। प्रो.सिन्हा ने प्राचीन गुरुकुल पद्धति पंचकोशीय विकास स्त्री स्वतंत्रता लोकतांत्रिक परंपरा कौटिल्य के राज्यशास्त्र और वेदांत व आधुनिक विज्ञान के अंतर्संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल अतीत का गौरव है बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक दृष्टि भी प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना नहीं बल्कि चरित्र विवेक और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण के रूप में बताया। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी अतिथियों वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक दृष्टि को सुदृढ़ करते हैं और पारंपरिक ज्ञान व समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला और अकादमिक शोध में प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।समारोह में संकायाध्यक्ष प्रो.मोहन सिंह पंवार चौरास परिसर निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो ओपी गुसाईं डॉ.अमरजीत परिहार और यूजीसी के पर्यवेक्षक प्रो. आरएल नारायण सिम्हा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। अंत में डॉ.राहुल कुंवर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में कुल 95 शिक्षक और शोधार्थियों ने भाग लिया जिन्हें समापन के अंतिम दिन प्रमाणपत्र वितरित किए गए
Spread the love
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक क्रियाकलाप केंद्र में एमएमटीटीसी के तत्वावधान में पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण विषय पर 16 फरवरी से 21 फरवरी तक आयोजित छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का समापन समारोह संपन्न हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरूजी और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और मुख्य अतिथि प्रो.पवन सिन्हा को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.पवन सिन्हा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता स्थिरता और क्षमता निर्माण का वास्तविक आधार हमारी स्वदेशी ज्ञान परंपरा में निहित है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि क्रायोजेनिक तकनीक जैसी स्वदेशी तकनीक ने भारत को वैज्ञानिक रूप से सशक्त और वैश्विक स्तर पर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी चुनौतियों का सामना करने में देशी अनुसंधान और तकनीकी क्षमता निर्णायक रही। प्रो.सिन्हा ने प्राचीन गुरुकुल पद्धति पंचकोशीय विकास स्त्री स्वतंत्रता लोकतांत्रिक परंपरा कौटिल्य के राज्यशास्त्र और वेदांत व आधुनिक विज्ञान के अंतर्संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल अतीत का गौरव है बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक दृष्टि भी प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना नहीं बल्कि चरित्र विवेक और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण के रूप में बताया। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी अतिथियों वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक दृष्टि को सुदृढ़ करते हैं और पारंपरिक ज्ञान व समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला और अकादमिक शोध में प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।समारोह में संकायाध्यक्ष प्रो.मोहन सिंह पंवार चौरास परिसर निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो ओपी गुसाईं डॉ.अमरजीत परिहार और यूजीसी के पर्यवेक्षक प्रो. आरएल नारायण सिम्हा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। अंत में डॉ.राहुल कुंवर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में कुल 95 शिक्षक और शोधार्थियों ने भाग लिया जिन्हें समापन के अंतिम दिन प्रमाणपत्र वितरित किए गए