प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से डॉ.आर एस टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट सभागार कक्ष रुद्रप्रयाग में तीन दिवसीय आउटरीच प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के प्रथम दिन संबंधित लोक सूचना अधिकारी सहायक लोक सूचना अधिकारी और पटल सहायकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान उप निदेशक एवं कार्यक्रम अधिकारी प्रशिक्षण पूनम पाठक तथा एडवोकेट राजेश डिमरी ने अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम और सेवा का अधिकार अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षकों ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की बारीकियों की जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों को होनी चाहिए। साथ ही सूचना से जुड़े प्रत्येक पहलू को गंभीरता से समझते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को भी इसके प्रति जागरूक करने और आरटीआई आवेदनों का अधिनियम-2005 के प्रावधानों के अनुसार समय पर निस्तारण करने तथा उनकी सतत मॉनिटरिंग करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय डिजिटलाइजेशन का है ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डिजिटल जानकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध कराना है या नहीं और यदि उपलब्ध कराना है तो उसके क्या प्रावधान हैं। इस संबंध में सभी अधिकारियों को पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। प्रशिक्षकों ने कहा कि हर आवेदन की प्रकृति को समझकर निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिनियम की धारा 2 से 11 तक का विशेष रूप से अध्ययन करने की सलाह भी दी। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी तथा सूचना का अधिकार और सेवा का अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण की नोडल अधिकारी अनिता पंवार सहित विभिन्न विभागों के लोक सूचना अधिकारी सहायक लोक सूचना अधिकारी और पटल सहायकों ने प्रतिभाग किया।
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प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से डॉ.आर एस टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट सभागार कक्ष रुद्रप्रयाग में तीन दिवसीय आउटरीच प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के प्रथम दिन संबंधित लोक सूचना अधिकारी सहायक लोक सूचना अधिकारी और पटल सहायकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान उप निदेशक एवं कार्यक्रम अधिकारी प्रशिक्षण पूनम पाठक तथा एडवोकेट राजेश डिमरी ने अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम और सेवा का अधिकार अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षकों ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की बारीकियों की जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों को होनी चाहिए। साथ ही सूचना से जुड़े प्रत्येक पहलू को गंभीरता से समझते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को भी इसके प्रति जागरूक करने और आरटीआई आवेदनों का अधिनियम-2005 के प्रावधानों के अनुसार समय पर निस्तारण करने तथा उनकी सतत मॉनिटरिंग करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय डिजिटलाइजेशन का है ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डिजिटल जानकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध कराना है या नहीं और यदि उपलब्ध कराना है तो उसके क्या प्रावधान हैं। इस संबंध में सभी अधिकारियों को पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। प्रशिक्षकों ने कहा कि हर आवेदन की प्रकृति को समझकर निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिनियम की धारा 2 से 11 तक का विशेष रूप से अध्ययन करने की सलाह भी दी। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी तथा सूचना का अधिकार और सेवा का अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण की नोडल अधिकारी अनिता पंवार सहित विभिन्न विभागों के लोक सूचना अधिकारी सहायक लोक सूचना अधिकारी और पटल सहायकों ने प्रतिभाग किया।