प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र तथा उद्योगिनी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में औषधीय और सुगंधित पादपों के संरक्षण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण कार्यशाला में उद्योगिनी संस्था से जुड़े चमोली जनपद के ब्लॉक समन्वयकों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य औषधीय और सुगंधित पौधों के संरक्षण वैज्ञानिक खेती पौध प्रसार नर्सरी प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग के संबंध में प्रतिभागियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारी देना है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र औषधीय पौधों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है लेकिन अत्यधिक दोहन आवासीय क्षति और जलवायु परिवर्तन के कारण कई महत्वपूर्ण प्रजातियां संकट में पहुंच गई हैं। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान और जन जागरूकता के माध्यम से इन पौधों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में शोध शिक्षा संस्थान के डॉ.अजय कुमार चौहान ने वर्चुअल माध्यम से फसल मॉडलिंग और फसल उत्पादन के विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक कंप्यूटर आधारित फसल मॉडलिंग तकनीक की सहायता से फसलों की वृद्धि उत्पादन और जलवायु परिस्थितियों के प्रभाव का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इन तकनीकों का उपयोग कृषि अनुसंधान फसल प्रबंधन और भविष्य की कृषि योजनाओं के निर्माण में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उद्योगिनी संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवम पंत ने कहा कि औषधीय पौधों के सतत संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय समुदायों और किसानों के लिए नए आजीविका अवसर भी प्रदान करते हैं। कार्यशाला में डॉ.विजय लक्ष्मी त्रिवेदी ने जलवायु परिवर्तन से औषधीय पादपों पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। वहीं स्पेस बॉन के संस्थापक डॉ.अजीत ने दूरसंवेदी तकनीक ड्रोन तकनीक और डिजिटल निगरानी उपकरणों के माध्यम से फसलों की स्थिति वृद्धि और रोगों की पहचान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर हैप्रेक संस्थान की डॉ.बबिता पाटनी कार्यक्रम संयोजक डॉ सुदीप सेमवाल डॉ.प्रदीप डोभाल डॉ.जयदेव चौहान डॉ.राजीव वशिष्ठ डॉ मुनमुन डॉ.नमिता देवेश सत्यम अनिकेत शिवांगी बिपिन और मुकेश सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
