प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार पौड़ी गढ़वाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) पहुंचे। उन्होंने द्वीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा वानिकी औद्यानिकी और कृषि के 283 छात्रों को स्नातक स्नातकोत्तर पीएचडी डिग्रियां व उपाधियां प्रदान की गई। इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पार्क में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके उपरांत उन्होंने सभा कक्ष ई-गवर्नेंस पोर्टल व ई-फाइलिंग डिजिटाइजेशन मॉड्यूल का उद्घाटन किया। प्रशासनिक शैक्षणिक भवन एवं ट्रांसिट हॉस्टल निर्माण कार्य का शिलान्यास बहुद्देशीय भवन का लोकार्पण किया। तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने बीएससी ऑनर्स के साक्षी वर्मा प्रदीप कुमार संजना बिष्ट मैत्रेय नौटियाल युक्ता लोहनी को स्वर्ण पदक प्रदान किया। जबकि इशिता नेगी सवेरा पंवार श्वेता सेमवाल सुहर्षिता बहुगुणा को रजत पदक से सम्मानित किया। राज्यपाल ने उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्ति का अवसर नहीं बल्कि जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे उनके परिश्रम समर्पण और अनुशासन का परिणाम बताया। राज्यपाल ने कहा कि कृषि औद्यानिकी और वानिकी उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन क्षेत्रों में नवाचार व आधुनिक तकनीक अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करें तथा पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसर में बदलें। उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए शोध को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया और स्वर्ण व रजत पदक विजेताओं को बधाई देते हुए सभी विद्यार्थियों को ईमानदारी नैतिकता और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर पद्मश्री कृषि वैज्ञानिक डॉ.पीएल गौतम व प्रगतिशील किसान प्रेम चंद शर्मा को शॉल ओढ़ाकर वी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों द्वारा यूनिवर्सिटी स्मारिका कॉफी टेबल बुक विश्वविद्यालय का विजन डॉक्यूमेंट 2027 प्रोसिडिंग 14वीं ब्रेन स्टोर्मिंग सेशन पुस्तकों का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीक्षांत समारोह में उपस्थितों को वर्चुअल माध्यम से उपाधि प्राप्त कर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस विश्विद्यालय में नवाचार का परिवेश है। उन्होंने कहा कि कृषि औद्यानिकी और वानिकी केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं है बल्कि सांस्कृतिक धरोवर व पर्यावरणीय पहचान के अभिन्न अंग है। आज आप केवल एक उपाधि प्राप्त नहीं कर रहे हैं बल्कि जिम्मेदारी को भी स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखकर राज्य और राष्ट्र के कल्याण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा अर्जित ज्ञान और कौशल पर्वतीय कृषि की चुनौतियों को अवसर में बदलेगा। कृषि एवं कृषक मंत्री गणेश जोशी ने सभी 283 उपाधि प्राप्तकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का समर्पित शैक्षणिक वातावरण और नवाचार से देश विदेश में नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद भले ही कृषि क्षेत्रफल कम हुआ है लेकिन उत्पादन 3 लाख टन बड़ा है।उन्होंने उत्तराखण्ड के उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट विदेशों तक पहुंचाने और इसे विश्वपटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आप जो कुछ भी यहां से सीख कर जा रहे हैं उससे लोगों का जीवन बदलना है। इस अवसर पर कुलपति प्रो.परविंदर कौशल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान शिक्षा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों की आय बढ़ाने उन्नत तकनीकों के प्रसार तथा पर्वतीय कृषि को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषि क्षेत्र में नवाचार लाने के लिए करें। इस अवसर पर कॉलेज के डीन डॉ. एके जोशी रजिस्ट्रार डॉ.एसपी सती डायरेक्टर रिसर्च केएस पंत डीएफओ महातिम यादव संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ठाकुर सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार पौड़ी गढ़वाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) पहुंचे। उन्होंने द्वीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा वानिकी औद्यानिकी और कृषि के 283 छात्रों को स्नातक स्नातकोत्तर पीएचडी डिग्रियां व उपाधियां प्रदान की गई। इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पार्क में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके उपरांत उन्होंने सभा कक्ष ई-गवर्नेंस पोर्टल व ई-फाइलिंग डिजिटाइजेशन मॉड्यूल का उद्घाटन किया। प्रशासनिक शैक्षणिक भवन एवं ट्रांसिट हॉस्टल निर्माण कार्य का शिलान्यास बहुद्देशीय भवन का लोकार्पण किया। तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने बीएससी ऑनर्स के साक्षी वर्मा प्रदीप कुमार संजना बिष्ट मैत्रेय नौटियाल युक्ता लोहनी को स्वर्ण पदक प्रदान किया। जबकि इशिता नेगी सवेरा पंवार श्वेता सेमवाल सुहर्षिता बहुगुणा को रजत पदक से सम्मानित किया। राज्यपाल ने उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्ति का अवसर नहीं बल्कि जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे उनके परिश्रम समर्पण और अनुशासन का परिणाम बताया। राज्यपाल ने कहा कि कृषि औद्यानिकी और वानिकी उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन क्षेत्रों में नवाचार व आधुनिक तकनीक अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करें तथा पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसर में बदलें। उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए शोध को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया और स्वर्ण व रजत पदक विजेताओं को बधाई देते हुए सभी विद्यार्थियों को ईमानदारी नैतिकता और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर पद्मश्री कृषि वैज्ञानिक डॉ.पीएल गौतम व प्रगतिशील किसान प्रेम चंद शर्मा को शॉल ओढ़ाकर वी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों द्वारा यूनिवर्सिटी स्मारिका कॉफी टेबल बुक विश्वविद्यालय का विजन डॉक्यूमेंट 2027 प्रोसिडिंग 14वीं ब्रेन स्टोर्मिंग सेशन पुस्तकों का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीक्षांत समारोह में उपस्थितों को वर्चुअल माध्यम से उपाधि प्राप्त कर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस विश्विद्यालय में नवाचार का परिवेश है। उन्होंने कहा कि कृषि औद्यानिकी और वानिकी केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं है बल्कि सांस्कृतिक धरोवर व पर्यावरणीय पहचान के अभिन्न अंग है। आज आप केवल एक उपाधि प्राप्त नहीं कर रहे हैं बल्कि जिम्मेदारी को भी स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखकर राज्य और राष्ट्र के कल्याण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा अर्जित ज्ञान और कौशल पर्वतीय कृषि की चुनौतियों को अवसर में बदलेगा। कृषि एवं कृषक मंत्री गणेश जोशी ने सभी 283 उपाधि प्राप्तकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का समर्पित शैक्षणिक वातावरण और नवाचार से देश विदेश में नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद भले ही कृषि क्षेत्रफल कम हुआ है लेकिन उत्पादन 3 लाख टन बड़ा है।उन्होंने उत्तराखण्ड के उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट विदेशों तक पहुंचाने और इसे विश्वपटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आप जो कुछ भी यहां से सीख कर जा रहे हैं उससे लोगों का जीवन बदलना है। इस अवसर पर कुलपति प्रो.परविंदर कौशल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान शिक्षा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों की आय बढ़ाने उन्नत तकनीकों के प्रसार तथा पर्वतीय कृषि को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषि क्षेत्र में नवाचार लाने के लिए करें। इस अवसर पर कॉलेज के डीन डॉ. एके जोशी रजिस्ट्रार डॉ.एसपी सती डायरेक्टर रिसर्च केएस पंत डीएफओ महातिम यादव संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ठाकुर सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।