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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग एवं मौल्यार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के उपलक्ष्य में उत्तराखंड की महिला किसान उद्यमी स्थानीय ज्ञान से वैश्विक लक्ष्यों तक सतत आजीविका का मार्ग विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलपति प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह ने अपने वक्तव्य की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिला उद्यमियों का आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने पहाड़ी महिलाओं द्वारा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में किए जा रहे कृषि कार्य की सराहना की और पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की समाज के विकास में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक परिवार को एक उत्पाद के रूप में विकसित करने की अवधारणा को अपनाने की बात कही। साथ ही पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक नवाचार के साथ जोड़कर उत्तराखंड के विकास को गति देने पर बल दिया। प्रोफेसर ए के बागी ने पहाड़ी उत्पादों के संरक्षण के साथ-साथ पारिस्थितिकी की विविधता को बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए आधुनिक परिवहन व्यवस्था और बेहतर योजनाओं की आवश्यकता है जिसमें विश्वविद्यालय और महिला उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कृषि विज्ञान संकायाध्यक्ष ए के नेगी ने कहा कि कृषि में उद्यम को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पुरानी कृषि परंपराएं विलुप्त हो रही हैं जिन्हें पुनः अपनाने की जरूरत है। साथ ही डिजिटल माध्यमों के जरिए बाजार तक पहुंच बनाने और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से नीति आधारित मॉडल तैयार करने पर जोर दिया। ममता पांगती ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं को उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं के प्राकृतिक ज्ञान को वैश्विक स्तर से जोड़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहचान दिलाने की बात कही। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने पहाड़ी महिलाओं को पहाड़ की रीढ़ बताते हुए उनके साहस और परिश्रम की सराहना की। उन्होंने महिला किसानों को कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष आर एस नेगी ने महिला कृषि उद्यमिता और सतत कृषि को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया तथा जमीनी स्तर के उद्यमियों विशेषज्ञों और गैर लाभकारी संगठनों के समन्वय पर जोर दिया। राष्ट्रीय सह संयोजक दुर्गा सिंह भंडारी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉक्टर संतोष ने उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अंकित सती और शोध छात्रा प्रतिभा द्वारा किया गया।

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