प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी केंद्र पुणे के सहयोग से अंतर-विश्वविद्यालय सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट आइकार्ड की स्थापना की गई है। यह पहल खगोल विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईयूसीएए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्थापित एक स्वायत्त संस्थान है जिसकी स्थापना वर्ष 1992 में की गई थी और यह खगोल भौतिकी के क्षेत्र में शिक्षण प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइकार्ड केंद्र की स्थापना का उद्देश्य खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नवाचारी शिक्षण विधियों को प्रोत्साहित करना संरचित दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम संचालित करना तथा विभिन्न स्तरों पर कार्यशालाएं स्कूल और शैक्षणिक बैठकें आयोजित कर शिक्षा को सुदृढ़ बनाना है। इस केंद्र के माध्यम से समय-समय पर विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनमें स्कूली और विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षक तथा छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। इन गतिविधियों का संचालन आईयूसीएए द्वारा प्राप्त अनुदान से किया जाएगा जिससे शोध और शिक्षण दोनों को मजबूती मिलेगी। केंद्र के संयोजक प्रो हेमवती नंदन ने बताया कि यह केंद्र विद्यार्थियों शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए एक प्रेरक मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा मिलेगा और खगोल विज्ञान तथा खगोल भौतिकी के क्षेत्र में अंतरविषयक अध्ययन को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक समझ के बीच की दूरी को कम करने में भी सहायक होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह ने केंद्र की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान के प्रसार कार्यक्रमों को और अधिक मजबूती मिलेगी। वहीं कुल सचिव प्रो वाई पी रैवानी ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी केंद्र पुणे के सहयोग से अंतर-विश्वविद्यालय सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट आइकार्ड की स्थापना की गई है। यह पहल खगोल विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईयूसीएए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्थापित एक स्वायत्त संस्थान है जिसकी स्थापना वर्ष 1992 में की गई थी और यह खगोल भौतिकी के क्षेत्र में शिक्षण प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइकार्ड केंद्र की स्थापना का उद्देश्य खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नवाचारी शिक्षण विधियों को प्रोत्साहित करना संरचित दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम संचालित करना तथा विभिन्न स्तरों पर कार्यशालाएं स्कूल और शैक्षणिक बैठकें आयोजित कर शिक्षा को सुदृढ़ बनाना है। इस केंद्र के माध्यम से समय-समय पर विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनमें स्कूली और विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षक तथा छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। इन गतिविधियों का संचालन आईयूसीएए द्वारा प्राप्त अनुदान से किया जाएगा जिससे शोध और शिक्षण दोनों को मजबूती मिलेगी। केंद्र के संयोजक प्रो हेमवती नंदन ने बताया कि यह केंद्र विद्यार्थियों शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए एक प्रेरक मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा मिलेगा और खगोल विज्ञान तथा खगोल भौतिकी के क्षेत्र में अंतरविषयक अध्ययन को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक समझ के बीच की दूरी को कम करने में भी सहायक होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह ने केंद्र की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान के प्रसार कार्यक्रमों को और अधिक मजबूती मिलेगी। वहीं कुल सचिव प्रो वाई पी रैवानी ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया है।