Spread the love

प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला में डॉ.आलोक सागर गौतम तथा उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा अंकित कुमार और सरस्वती रावत द्वारा जनहित को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में हो रही जंगलों की आग तथा उससे उत्पन्न वायु गुणवत्ता में गिरावट के परिप्रेक्ष्य में 30 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:45 बजे चौरास परिसर में वायु गुणवत्ता का द्वितीय बुलेटिन जारी किया गया।
मुख्य बिंदु
श्रीनगर गढ़वाल में वायु प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत ख़राब श्रेणी में स्थिर पर्वतीय क्षेत्र में बढ़ता वायु प्रदूषण श्रीनगर गढ़वाल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 275 से 336 के बीच जंगलों की आग और ब्लैक कार्बन से बिगड़ी हवा हालात गंभीर श्रीनगर गढ़वाल में हवा लगातार खराब से बहुत खराब श्रेणी में बायोमास बर्निंग और मौसमीय कारकों से बढ़ा प्रदूषण वैज्ञानिक अध्ययन में लगातार खराब वायु गुणवत्ता सामने आई पर्वतीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण लगातार चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है। भारत में वायु गुणवत्ता का आकलन राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों के अंतर्गत किया जाता है जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लागू करता है। इसके तहत पीएम 2.5 पीएम 10 सल्फर डाइऑक्साइड नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ओजोन कार्बन मोनोऑक्साइड और अमोनिया जैसे प्रमुख प्रदूषकों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर मापा जाता है। इन्हीं मापदंडों के आधार पर वायु गुणवत्ता सूचकांक निर्धारित किया जाता है जिसे अच्छा संतोषजनक मध्यम खराब बहुत खराब और गंभीर श्रेणियों में विभाजित किया गया है। डॉ.आलोक सागर गौतम तथा उनकी शोध टीम द्वारा किए गए अध्ययन में 18 अप्रैल 2026 से 29 अप्रैल 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार श्रीनगर गढ़वाल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 275 से 336 के बीच दर्ज किया गया जो अधिकांश दिनों में खराब से बहुत खराब श्रेणी में रहा। 18 से 23 अप्रैल के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक में तेज वृद्धि देखी गई जहां यह 275 से बढ़कर लगभग 340 तक पहुंच गया जबकि 24 से 29 अप्रैल के बीच यह 320 से 336 के बीच उच्च स्तर पर स्थिर बना रहा। यह दर्शाता है कि प्रारंभिक दिनों में प्रदूषण तेजी से बढ़ा और बाद के दिनों में लगातार उच्च स्तर पर बना रहा। मौसम संबंधी कारकों के विश्लेषण से भी महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। 24 से 27 अप्रैल के बीच तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास और आर्द्रता अपेक्षाकृत कम रही जिससे शुष्क और गर्म परिस्थितियां बनीं जो प्रदूषकों के संचय में सहायक होती हैं। वहीं 28 और 29 अप्रैल को तापमान में गिरावट लगभग 25.4 डिग्री सेल्सियस तक और आर्द्रता में वृद्धि 60 प्रतिशत से अधिक देखी गई जिससे वातावरण में नमी बढ़ी और प्रदूषकों के प्रसार में कुछ सहायता मिली। हवा की गति सामान्यतः कम रही हालांकि 25 और 29 अप्रैल को तेज हवाओं के कारण आंशिक प्रभाव देखा गया। बायोमास बर्निंग और ब्लैक कार्बन के आंकड़े इस समस्या को और स्पष्ट करते हैं। 18 से 23 अप्रैल के बीच ब्लैक कार्बन में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई जिसमें 23 अप्रैल को औसत 4714 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तथा अधिकतम 13213 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया जो अत्यधिक प्रदूषण का संकेत है। इस अवधि में बायोमास बर्निंग का योगदान 55 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 72 प्रतिशत तक पहुंच गया। 24 से 29 अप्रैल के दौरान बायोमास बर्निंग का प्रतिशत 63 से 77 प्रतिशत के बीच बना रहा जबकि ब्लैक कार्बन में कमी का रुझान देखा गया जो मौसमीय परिवर्तनों के कारण प्रदूषकों के फैलाव को दर्शाता है। डॉ.आलोक सागर गौतम तथा उनकी शोध टीम के अनुसार जंगलों में आग बढ़ता तापमान शुष्क मौसम स्थानीय दहन गतिविधियां और ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन इस बढ़ते प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। सुझाव एवं सिफारिशें वनाग्नि की घटनाओं की निगरानी और त्वरित नियंत्रण के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए कचरा पत्तियां और कृषि अवशेष जलाने पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया जाए आम जनता को वायु गुणवत्ता और उसके स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए बहुत खराब वायु गुणवत्ता के दौरान बच्चों बुजुर्गों और रोगियों को बाहर कम निकलने की सलाह दी जाए और मास्क का उपयोग बढ़ाया जाए वृक्षारोपण और हरित क्षेत्रों का विस्तार किया जाए जिससे प्रदूषकों का प्राकृतिक अवशोषण हो सके
निष्कर्ष
श्रीनगर गढ़वाल में 18 अप्रैल से 29 अप्रैल 2026 के दौरान वायु गुणवत्ता लगातार खराब से बहुत खराब श्रेणी में बनी रही जो क्षेत्र में गंभीर प्रदूषण की स्थिति को दर्शाती है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रारंभिक दिनों में प्रदूषण तेजी से बढ़ा जबकि बाद के दिनों में यह उच्च स्तर पर स्थिर हो गया। बायोमास बर्निंग ब्लैक कार्बन की अधिक मात्रा शुष्क और गर्म मौसम तथा कम हवा की गति जैसे कारक इस स्थिति के प्रमुख कारण रहे। यद्यपि कुछ दिनों में मौसमीय परिवर्तनों के कारण प्रदूषकों के फैलाव में हल्की कमी देखी गई फिर भी समग्र स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अतः वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वनाग्नि प्रबंधन स्थानीय दहन पर नियंत्रण जनजागरूकता और सतत वैज्ञानिक निगरानी जैसे ठोस एवं समन्वित प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है अन्यथा यह समस्या भविष्य में और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Whatsapp