प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ.कोशल कुमार और डॉ.नितिन बिष्ट द्वारा मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण बहुआयामी दृष्टिकोण के माध्यम से समकालीन मुद्दों की समझ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। यह प्रकाशन शैक्षणिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होने के साथ-साथ वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप तैयार की गई है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के बहुआयामी पहलुओं जैसे भावनात्मक संतुलन जीवन के विभिन्न चरणों में आने वाली चुनौतियाँ मनोवैज्ञानिक विकार उनके समाधान और प्रभावी हस्तक्षेप की रणनीतियों का व्यापक और सुव्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में समकालीन संदर्भों के साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है जिससे यह और अधिक उपयोगी बनती है। डॉ.कोशल कुमार ने बताया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों शोधार्थियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के लिए एक उत्कृष्ट संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। वहीं डॉ.नितिन बिष्ट ने कहा कि यह पुस्तक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता शोधपरक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिखी गई है। सम्मान और शैक्षणिक संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लेखकों ने इस पुस्तक की प्रतियाँ कुलपति तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक को भेंट कीं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कुलपति प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ.कोशल कुमार और डॉ.नितिन बिष्ट को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ.कोशल कुमार और डॉ.नितिन बिष्ट द्वारा मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण बहुआयामी दृष्टिकोण के माध्यम से समकालीन मुद्दों की समझ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। यह प्रकाशन शैक्षणिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होने के साथ-साथ वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप तैयार की गई है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के बहुआयामी पहलुओं जैसे भावनात्मक संतुलन जीवन के विभिन्न चरणों में आने वाली चुनौतियाँ मनोवैज्ञानिक विकार उनके समाधान और प्रभावी हस्तक्षेप की रणनीतियों का व्यापक और सुव्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में समकालीन संदर्भों के साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है जिससे यह और अधिक उपयोगी बनती है। डॉ.कोशल कुमार ने बताया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों शोधार्थियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के लिए एक उत्कृष्ट संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। वहीं डॉ.नितिन बिष्ट ने कहा कि यह पुस्तक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता शोधपरक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिखी गई है। सम्मान और शैक्षणिक संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लेखकों ने इस पुस्तक की प्रतियाँ कुलपति तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक को भेंट कीं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कुलपति प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ.कोशल कुमार और डॉ.नितिन बिष्ट को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।