प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान आज से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। घाटी के खुलने के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए हिमालय की गोद में बसे इस प्राकृतिक स्वर्ग के द्वार खुल गए हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी अपनी अद्भुत जैव विविधता और हजारों प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जून माह के प्रारंभ में घाटी को पर्यटकों के लिए खोला गया है। घाटी आमतौर पर अक्टूबर के अंत तक अथवा बर्फबारी शुरू होने तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। मानसून के आगमन के साथ ही घाटी में फूलों का खिलना शुरू हो जाता है और जुलाई से सितंबर के बीच इसका सौंदर्य अपने चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान यहां ब्रह्म कमल ब्लू पोस्ता कोबरा लिली सहित सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ और आकर्षक फूल खिलते हैं जिससे पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों की चादर से ढकी हुई दिखाई देती है। फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना पड़ता है। इसके बाद घांघरिया से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रवेश द्वार से घाटी में प्रवेश किया जाता है। घाटी के भीतर पर्यटकों को केवल दिन के समय भ्रमण की अनुमति होती है और सूर्यास्त से पहले वापस लौटना अनिवार्य होता है। फूलों की घाटी खुलने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय होटल व्यवसायियों घोड़ा-खच्चर संचालकों और अन्य स्थानीय लोगों में भी उत्साह का माहौल है। आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस अवसर पर चौकी प्रभारी अमनदीप सिंह वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा कई पर्यटक मौजूद रहे।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान आज से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। घाटी के खुलने के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए हिमालय की गोद में बसे इस प्राकृतिक स्वर्ग के द्वार खुल गए हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी अपनी अद्भुत जैव विविधता और हजारों प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जून माह के प्रारंभ में घाटी को पर्यटकों के लिए खोला गया है। घाटी आमतौर पर अक्टूबर के अंत तक अथवा बर्फबारी शुरू होने तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। मानसून के आगमन के साथ ही घाटी में फूलों का खिलना शुरू हो जाता है और जुलाई से सितंबर के बीच इसका सौंदर्य अपने चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान यहां ब्रह्म कमल ब्लू पोस्ता कोबरा लिली सहित सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ और आकर्षक फूल खिलते हैं जिससे पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों की चादर से ढकी हुई दिखाई देती है। फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना पड़ता है। इसके बाद घांघरिया से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रवेश द्वार से घाटी में प्रवेश किया जाता है। घाटी के भीतर पर्यटकों को केवल दिन के समय भ्रमण की अनुमति होती है और सूर्यास्त से पहले वापस लौटना अनिवार्य होता है। फूलों की घाटी खुलने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय होटल व्यवसायियों घोड़ा-खच्चर संचालकों और अन्य स्थानीय लोगों में भी उत्साह का माहौल है। आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस अवसर पर चौकी प्रभारी अमनदीप सिंह वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा कई पर्यटक मौजूद रहे।