प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। अगर सीखने का जज़्बा और कुछ नया करने का साहस हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड कीर्तिनगर के ग्राम बंडाशा निवासी मंजू देवी ने इस सोच को अपनी मेहनत और लगन से साकार कर दिखाया है। आज वे मशरूम उत्पादन के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। मंजू देवी एक साधारण ग्रामीण परिवार से हैं और प्रगतिशील स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। उनके गांव में महिलाओं का व्यवसाय या उद्यमिता की ओर बढ़ना सामान्य बात नहीं थी। सामाजिक सोच सीमित संसाधन और तकनीकी जानकारी का अभाव उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका उद्देश्य ऐसा कार्य करना था जिससे परिवार की आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसी दौरान उन्हें मशरूम उत्पादन के बारे में जानकारी मिली। कम लागत कम जगह और अधिक लाभ की संभावना ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया। शुरुआत में उन्होंने अपने घर के एक छोटे से कमरे में मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्हें रीप परियोजना तथा कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन सब्सट्रेट तैयार करना तापमान एवं नमी का प्रबंधन रोग नियंत्रण तथा विपणन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उत्पादन शुरू किया। नई तकनीकों और लगातार मेहनत का परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। उनके फार्म में उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम का उत्पादन होने लगा जिसकी स्थानीय बाजारों और रेस्तरां में अच्छी मांग बनी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और मशरूम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन भी शुरू किया। आज मशरूम उत्पादन उनके परिवार की आय का मजबूत स्रोत बन चुका है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और परिवार का जीवन स्तर भी पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। मंजू देवी की सफलता ने पूरे क्षेत्र में नई सोच को जन्म दिया है। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर कई ग्रामीण महिलाएं मशरूम उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने लगी हैं। वे समय-समय पर अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को प्रशिक्षण लेने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मंजू देवी का कहना है कि सही प्रशिक्षण तकनीकी मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका का प्रेरणादायक उदाहरण है। आज उनकी पहचान केवल एक मशरूम उत्पादक के रूप में नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सफल उद्यमी और प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि मेहनत सीखने की इच्छा और सही मार्गदर्शन से हर सपना साकार किया जा सकता है।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। अगर सीखने का जज़्बा और कुछ नया करने का साहस हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड कीर्तिनगर के ग्राम बंडाशा निवासी मंजू देवी ने इस सोच को अपनी मेहनत और लगन से साकार कर दिखाया है। आज वे मशरूम उत्पादन के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। मंजू देवी एक साधारण ग्रामीण परिवार से हैं और प्रगतिशील स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। उनके गांव में महिलाओं का व्यवसाय या उद्यमिता की ओर बढ़ना सामान्य बात नहीं थी। सामाजिक सोच सीमित संसाधन और तकनीकी जानकारी का अभाव उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका उद्देश्य ऐसा कार्य करना था जिससे परिवार की आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसी दौरान उन्हें मशरूम उत्पादन के बारे में जानकारी मिली। कम लागत कम जगह और अधिक लाभ की संभावना ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया। शुरुआत में उन्होंने अपने घर के एक छोटे से कमरे में मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्हें रीप परियोजना तथा कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन सब्सट्रेट तैयार करना तापमान एवं नमी का प्रबंधन रोग नियंत्रण तथा विपणन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उत्पादन शुरू किया। नई तकनीकों और लगातार मेहनत का परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। उनके फार्म में उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम का उत्पादन होने लगा जिसकी स्थानीय बाजारों और रेस्तरां में अच्छी मांग बनी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और मशरूम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन भी शुरू किया। आज मशरूम उत्पादन उनके परिवार की आय का मजबूत स्रोत बन चुका है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और परिवार का जीवन स्तर भी पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। मंजू देवी की सफलता ने पूरे क्षेत्र में नई सोच को जन्म दिया है। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर कई ग्रामीण महिलाएं मशरूम उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने लगी हैं। वे समय-समय पर अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को प्रशिक्षण लेने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मंजू देवी का कहना है कि सही प्रशिक्षण तकनीकी मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका का प्रेरणादायक उदाहरण है। आज उनकी पहचान केवल एक मशरूम उत्पादक के रूप में नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सफल उद्यमी और प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि मेहनत सीखने की इच्छा और सही मार्गदर्शन से हर सपना साकार किया जा सकता है।