प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। अगस्त्यमुनि ब्लॉक की बछणस्यूं पट्टी में 16 वर्षीय नाबालिग की जबरन सगाई कराए जाने की शिकायत कंट्रोल रूम में मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित की। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और परिजनों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए कड़ी चेतावनी दी। इसके बाद परिजनों ने लिखित आश्वासन दिया कि बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसका विवाह नहीं कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट चाइल्ड हेल्पलाइन के परियोजना समन्वयक सुरेंद्र सिंह केस वर्कर अखिलेश तथा मिशन शक्ति की जेंडर स्पेशलिस्ट अंजनी को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। जांच के दौरान टीम को पता चला कि चार दिन पहले ही बालिका की सगाई पौड़ी निवासी एक युवक से कर दी गई थी। पूछताछ में सामने आया कि बालिका पिछले दो वर्षों से उक्त युवक के संपर्क में थी और उसी से विवाह करने का दबाव परिजनों पर बना रही थी। इसी दबाव के चलते परिवार ने उसकी सगाई करा दी। जांच टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से पहले बालिका का विवाह कराना दंडनीय अपराध है जिसके लिए दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही बताया गया कि नाबालिग से संबंध होने की स्थिति में युवक के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित रूप से आश्वासन दिया कि बालिका के बालिग होने से पहले उसका विवाह नहीं कराया जाएगा। टीम ने संबंधित युवक को भी पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया है ताकि उसे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधानों की जानकारी दी जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित आयु से पहले बालिका का विवाह कराया गया तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Spread the love
प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। अगस्त्यमुनि ब्लॉक की बछणस्यूं पट्टी में 16 वर्षीय नाबालिग की जबरन सगाई कराए जाने की शिकायत कंट्रोल रूम में मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित की। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और परिजनों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए कड़ी चेतावनी दी। इसके बाद परिजनों ने लिखित आश्वासन दिया कि बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसका विवाह नहीं कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट चाइल्ड हेल्पलाइन के परियोजना समन्वयक सुरेंद्र सिंह केस वर्कर अखिलेश तथा मिशन शक्ति की जेंडर स्पेशलिस्ट अंजनी को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। जांच के दौरान टीम को पता चला कि चार दिन पहले ही बालिका की सगाई पौड़ी निवासी एक युवक से कर दी गई थी। पूछताछ में सामने आया कि बालिका पिछले दो वर्षों से उक्त युवक के संपर्क में थी और उसी से विवाह करने का दबाव परिजनों पर बना रही थी। इसी दबाव के चलते परिवार ने उसकी सगाई करा दी। जांच टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से पहले बालिका का विवाह कराना दंडनीय अपराध है जिसके लिए दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही बताया गया कि नाबालिग से संबंध होने की स्थिति में युवक के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित रूप से आश्वासन दिया कि बालिका के बालिग होने से पहले उसका विवाह नहीं कराया जाएगा। टीम ने संबंधित युवक को भी पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया है ताकि उसे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधानों की जानकारी दी जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित आयु से पहले बालिका का विवाह कराया गया तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।