प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद रुद्रप्रयाग में आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता समन्वय क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को मदमहेश्वर कुंड छेनागाड़ केदारनाथ पैदल मार्ग तथा नरकोटा सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान अगस्त्यमुनि खेल मैदान को स्ट्रेचिंग एरिया के रूप में चिन्हित कर राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन किया गया। मॉक ड्रिल के तहत विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों का वास्तविक परिस्थितियों की तरह अभ्यास कराया गया। मदमहेश्वर क्षेत्र में देर रात भारी वर्षा के बाद अचानक जलस्तर बढ़ने से फ्लैश फ्लड की स्थिति दर्शाई गई। तेज बहाव और मलबे के कारण ट्रेक मार्ग पर स्थित एक प्रमुख पैदल पुल के बह जाने से रांसी गौंडार और मदमहेश्वर के बीच संपर्क टूटने का परिदृश्य तैयार किया गया। इस दौरान लगभग 300 से 500 ट्रेकर्स तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के फंसने की स्थिति बनाई गई। खराब मौसम और भूस्खलन के बीच राहत एवं बचाव दलों ने सुरक्षित निकासी का सफल अभ्यास किया। कुंड क्षेत्र में मंदाकिनी और मध्यमहेश्वर गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर भारी भूस्खलन की स्थिति का अभ्यास किया गया। इसके तहत मार्ग अवरुद्ध होने से लगभग 5,000 से 7,000 तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। प्रशासन ने यातायात नियंत्रण भीड़ प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं एवं आपूर्ति को बनाए रखने की कार्ययोजना का अभ्यास किया। छेनागाड़ क्षेत्र में बादल फटने की काल्पनिक घटना के तहत अचानक आई बाढ़ और मलबे के प्रवाह का दृश्य तैयार किया गया। इसमें आवासीय भवनों गौशालाओं और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने तथा लोगों के घायल और लापता होने की सूचना पर एसडीआरएफ एनडीआरएफ पुलिस स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान संचालित किया। केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगल चट्टी भीमबली और लिनचोली के बीच भूस्खलन और रॉक फॉल की स्थिति बनाई गई। मार्ग बाधित होने से लगभग 3,000 से 5,000 तीर्थयात्रियों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। राहत दलों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने तथा संचार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का अभ्यास किया। नरकोटा क्षेत्र में सड़क कटाव और रॉक फॉल के कारण राजमार्ग क्षतिग्रस्त होने तथा वाहनों के फंसने की स्थिति का अभ्यास किया गया। इस दौरान लगभग 3,000 से 4,000 यात्रियों के प्रभावित होने का परिदृश्य तैयार किया गया। पुलिस यातायात पुलिस राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से वैकल्पिक होल्डिंग एरिया बनाकर यातायात प्रबंधन और राहत व्यवस्था का सफल अभ्यास किया। पूरे मॉक ड्रिल के दौरान एसडीआरएफ एनडीआरएफ पुलिस स्वास्थ्य विभाग लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जिला प्रशासन तथा स्थानीय स्वयंसेवकों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रभावी समन्वय तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाना था। मॉक ड्रिल के दौरान जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि सभी विभागों एवं एजेंसियों ने निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जिलाधिकारी ने सभी टीमों की सराहना करते हुए कहा कि मॉक ड्रिल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी विलंब के प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नियमित अभ्यास आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत सक्षम और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद रुद्रप्रयाग में आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता समन्वय क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को मदमहेश्वर कुंड छेनागाड़ केदारनाथ पैदल मार्ग तथा नरकोटा सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान अगस्त्यमुनि खेल मैदान को स्ट्रेचिंग एरिया के रूप में चिन्हित कर राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन किया गया। मॉक ड्रिल के तहत विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों का वास्तविक परिस्थितियों की तरह अभ्यास कराया गया। मदमहेश्वर क्षेत्र में देर रात भारी वर्षा के बाद अचानक जलस्तर बढ़ने से फ्लैश फ्लड की स्थिति दर्शाई गई। तेज बहाव और मलबे के कारण ट्रेक मार्ग पर स्थित एक प्रमुख पैदल पुल के बह जाने से रांसी गौंडार और मदमहेश्वर के बीच संपर्क टूटने का परिदृश्य तैयार किया गया। इस दौरान लगभग 300 से 500 ट्रेकर्स तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के फंसने की स्थिति बनाई गई। खराब मौसम और भूस्खलन के बीच राहत एवं बचाव दलों ने सुरक्षित निकासी का सफल अभ्यास किया। कुंड क्षेत्र में मंदाकिनी और मध्यमहेश्वर गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर भारी भूस्खलन की स्थिति का अभ्यास किया गया। इसके तहत मार्ग अवरुद्ध होने से लगभग 5,000 से 7,000 तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। प्रशासन ने यातायात नियंत्रण भीड़ प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं एवं आपूर्ति को बनाए रखने की कार्ययोजना का अभ्यास किया। छेनागाड़ क्षेत्र में बादल फटने की काल्पनिक घटना के तहत अचानक आई बाढ़ और मलबे के प्रवाह का दृश्य तैयार किया गया। इसमें आवासीय भवनों गौशालाओं और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने तथा लोगों के घायल और लापता होने की सूचना पर एसडीआरएफ एनडीआरएफ पुलिस स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान संचालित किया। केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगल चट्टी भीमबली और लिनचोली के बीच भूस्खलन और रॉक फॉल की स्थिति बनाई गई। मार्ग बाधित होने से लगभग 3,000 से 5,000 तीर्थयात्रियों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। राहत दलों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने तथा संचार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का अभ्यास किया। नरकोटा क्षेत्र में सड़क कटाव और रॉक फॉल के कारण राजमार्ग क्षतिग्रस्त होने तथा वाहनों के फंसने की स्थिति का अभ्यास किया गया। इस दौरान लगभग 3,000 से 4,000 यात्रियों के प्रभावित होने का परिदृश्य तैयार किया गया। पुलिस यातायात पुलिस राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से वैकल्पिक होल्डिंग एरिया बनाकर यातायात प्रबंधन और राहत व्यवस्था का सफल अभ्यास किया। पूरे मॉक ड्रिल के दौरान एसडीआरएफ एनडीआरएफ पुलिस स्वास्थ्य विभाग लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जिला प्रशासन तथा स्थानीय स्वयंसेवकों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रभावी समन्वय तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाना था। मॉक ड्रिल के दौरान जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि सभी विभागों एवं एजेंसियों ने निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जिलाधिकारी ने सभी टीमों की सराहना करते हुए कहा कि मॉक ड्रिल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी विलंब के प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नियमित अभ्यास आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत सक्षम और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।