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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत मेडिकल प्रमाण पत्रों के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने वाले बीमार शिक्षकों को अब दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण से गुजरना होगा। इसके लिए निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं ताकि फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्रों के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। साथ ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त एवं शारीरिक रूप से अक्षम शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिए पूरी तरह तैयार है और विभागीय स्तर पर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय उच्च स्तरीय बैठक में स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। विशेष रूप से मेडिकल प्रमाण पत्रों की आड़ में स्थानांतरण का लाभ लेने वाले शिक्षकों पर इस बार सख्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण में मेडिकल आधार पर मिलने वाली छूट का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक को निदेशालय स्तर पर शीघ्र विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मेडिकल बोर्ड शिक्षकों के स्वास्थ्य संबंधी दावों की पुष्टि के लिए उनका दोबारा चिकित्सकीय परीक्षण करेगा। इसके साथ ही माता-पिता सास-ससुर पति-पत्नी अथवा बच्चों के नाम पर गंभीर बीमारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए स्वास्थ्य प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी। राज्य स्तरीय चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता का भी सत्यापन कराया जाएगा। डॉ.रावत ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में कोई स्वास्थ्य प्रमाण पत्र फर्जी अथवा तथ्यों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पूर्व वर्षों में कुछ शिक्षकों द्वारा फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्रों के आधार पर स्थानांतरण अधिनियम के प्रावधानों का लाभ उठाकर अपनी पसंद के विद्यालयों में तैनाती प्राप्त करने की शिकायतें लगातार प्राप्त हुई हैं। ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी वास्तव में गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं अथवा शारीरिक रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी ताकि उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो। इसके लिए सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में गंभीर रूप से बीमार एवं शारीरिक रूप से अक्षम शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सूची तैयार कर शीघ्र निदेशालय को उपलब्ध कराएं जिससे समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। स्थानांतरण के लिए शिक्षा विभाग को मिला 55 दिन का अतिरिक्त समय डॉ.धन सिंह रावत ने बताया कि शिक्षा विभाग के अनुरोध पर शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए समय विस्तार तथा स्थानांतरण अधिनियम से छूट की मांग कार्मिक विभाग से की गई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर शिक्षा विभाग को शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए 55 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान करने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू कर शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद विद्यालयों में रिक्त पदों के सापेक्ष आवश्यकतानुसार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

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