प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विश्व जूनोटिक रोग दिवस के अवसर पर एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं द्वारा जन-जागरूकता रैली निकाली गई। रैली का उद्देश्य आमजन को पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (जूनोटिक रोगों) के प्रति जागरूक करना तथा उनके बचाव एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी देना था। इस वर्ष विश्व जूनोटिक रोग दिवस की थीम "सामुदायिक सहभागिता से जूनोटिक रोगों की रोकथाम" रही। इसी उद्देश्य को लेकर कॉलेज परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया गया जिसमें छात्रों ने हाथों में जागरूकता संदेशों से युक्त तख्तियां लेकर लोगों को स्वच्छता पशुओं की नियमित जांच समय पर टीकाकरण तथा व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना के निर्देशन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से फील्ड प्रैक्टिस एरिया में विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाकर स्थानीय समुदाय को जूनोटिक रोगों की पहचान बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया गया। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.विनीता रावत ने कहा ने कहा कि जूनोटिक रोग ऐसे संक्रामक रोग हैं जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं। इनकी रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है बल्कि इसके लिए पशुपालन विभाग स्थानीय समुदाय और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।जागरूकता स्वच्छता और समय पर टीकाकरण के माध्यम से इन रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.जानकी बर्तवाल ने कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और समुदाय को इस अभियान से जोड़ना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति पशुओं के सुरक्षित रखरखाव स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करे तो कई गंभीर संक्रामक रोगों को फैलने से रोका जा सकता है। विभाग के डॉ.सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए 'वन हेल्थ' की अवधारणा को अपनाना आवश्यक है जिसमें मनुष्य पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना जाता है। तीनों के बीच संतुलन और सामंजस्य बनाए रखकर ही इन बीमारियों के खतरे को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ.अनिल कुमार डॉ.जितेन्द्र चन्द्र देवराड़ी सहित अन्य संकाय सदस्य एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। क्या हैं जूनोटिक रोग जूनोटिक रोग वे संक्रामक बीमारियां हैं जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती हैं। ये वायरस बैक्टीरिया परजीवी या फंगस के कारण होती हैं और संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क उनके काटने या खरोंच दूषित भोजन पानी अथवा पर्यावरण के माध्यम से फैल सकती हैं। रेबीज ब्रुसेलोसिस लेप्टोस्पायरोसिस एंथ्रेक्स बर्ड फ्लू स्वाइन फ्लू निपाह वायरस संक्रमण स्क्रब टाइफस टॉक्सोप्लाज्मोसिस और साल्मोनेला संक्रमण प्रमुख जूनोटिक रोग हैं। डाक्टरों की सलाह है कि इन रोगों से बचाव के लिए पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना पशुओं के संपर्क के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना दूध और मांस को अच्छी तरह पकाकर सेवन करना बीमार या आवारा पशुओं से अनावश्यक संपर्क से बचना पशु के काटने या खरोंच लगने पर तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेना तथा व्यक्तिगत और आसपास की स्वच्छता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। साथ ही मनुष्य पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी जूनोटिक रोगों की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विश्व जूनोटिक रोग दिवस के अवसर पर एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं द्वारा जन-जागरूकता रैली निकाली गई। रैली का उद्देश्य आमजन को पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (जूनोटिक रोगों) के प्रति जागरूक करना तथा उनके बचाव एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी देना था। इस वर्ष विश्व जूनोटिक रोग दिवस की थीम “सामुदायिक सहभागिता से जूनोटिक रोगों की रोकथाम” रही। इसी उद्देश्य को लेकर कॉलेज परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया गया जिसमें छात्रों ने हाथों में जागरूकता संदेशों से युक्त तख्तियां लेकर लोगों को स्वच्छता पशुओं की नियमित जांच समय पर टीकाकरण तथा व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना के निर्देशन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से फील्ड प्रैक्टिस एरिया में विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाकर स्थानीय समुदाय को जूनोटिक रोगों की पहचान बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया गया। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.विनीता रावत ने कहा ने कहा कि जूनोटिक रोग ऐसे संक्रामक रोग हैं जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं। इनकी रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है बल्कि इसके लिए पशुपालन विभाग स्थानीय समुदाय और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।जागरूकता स्वच्छता और समय पर टीकाकरण के माध्यम से इन रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.जानकी बर्तवाल ने कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और समुदाय को इस अभियान से जोड़ना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति पशुओं के सुरक्षित रखरखाव स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करे तो कई गंभीर संक्रामक रोगों को फैलने से रोका जा सकता है। विभाग के डॉ.सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को अपनाना आवश्यक है जिसमें मनुष्य पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना जाता है। तीनों के बीच संतुलन और सामंजस्य बनाए रखकर ही इन बीमारियों के खतरे को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ.अनिल कुमार डॉ.जितेन्द्र चन्द्र देवराड़ी सहित अन्य संकाय सदस्य एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। क्या हैं जूनोटिक रोग जूनोटिक रोग वे संक्रामक बीमारियां हैं जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती हैं। ये वायरस बैक्टीरिया परजीवी या फंगस के कारण होती हैं और संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क उनके काटने या खरोंच दूषित भोजन पानी अथवा पर्यावरण के माध्यम से फैल सकती हैं। रेबीज ब्रुसेलोसिस लेप्टोस्पायरोसिस एंथ्रेक्स बर्ड फ्लू स्वाइन फ्लू निपाह वायरस संक्रमण स्क्रब टाइफस टॉक्सोप्लाज्मोसिस और साल्मोनेला संक्रमण प्रमुख जूनोटिक रोग हैं। डाक्टरों की सलाह है कि इन रोगों से बचाव के लिए पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना पशुओं के संपर्क के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना दूध और मांस को अच्छी तरह पकाकर सेवन करना बीमार या आवारा पशुओं से अनावश्यक संपर्क से बचना पशु के काटने या खरोंच लगने पर तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेना तथा व्यक्तिगत और आसपास की स्वच्छता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। साथ ही मनुष्य पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी जूनोटिक रोगों की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।