प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भूगोल विभाग तथा इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर+ (Himalayan Climate Adaptation & Resilience Education) प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल गांवों में दस दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अध्ययन के उपरांत इंटर्न्स की टीम श्रीनगर गढ़वाल स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय पहुंच चुकी है जहां कार्यक्रम के अगले चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दस दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की तीन प्रमुख विषय-वस्तुओं पर गहन अध्ययन एवं व्यावहारिक कार्य किया। इनमें पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय अनुकूलन एवं जलवायु कार्रवाई जल सुरक्षा जलस्रोत संरक्षण एवं स्प्रिंग साक्षरता तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण सामुदायिक लचीलापन एवं आपदा तैयारी प्रमुख रहे। इस दौरान इंटर्न्स ने स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित किया संसाधन मानचित्रण जलस्रोतों का सर्वेक्षण स्थानीय ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण तथा ग्राम स्तर पर विभिन्न पर्यावरणीय एवं सामाजिक चुनौतियों का अध्ययन किया। कार्यक्रम के अगले चरण में प्रतिभागियों की टीम उत्तराखंड के चार चयनित पर्वतीय गांवों में इन्हीं तीन विषयों पर विस्तृत क्षेत्रीय अध्ययन करेगी। इस दौरान जलस्रोतों की वर्तमान स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सामुदायिक भागीदारी पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों तथा आपदा जोखिम एवं स्थानीय अनुकूलन क्षमता से जुड़े विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक एवं सहभागी दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाएगा। कार्यक्रम का अंतिम उद्देश्य हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के अध्ययन क्षेत्रों से प्राप्त अनुभवों क्षेत्रीय आंकड़ों तथा स्थानीय समुदायों के सुझावों के आधार पर प्रत्येक चयनित गांव के लिए तीन व्यवहारिक एवं समुदाय-केंद्रित कार्ययोजनाएं (एक्शन प्लान) तैयार करना है। इन कार्ययोजनाओं में जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ बनाने तथा आपदा-रोधी एवं सतत हिमालयी समुदायों के निर्माण के लिए ठोस सुझाव एवं कार्यनीतियां शामिल होंगी। इन योजनाओं को संबंधित ग्राम समुदायों एवं स्थानीय प्रशासन के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में विकसित किया जाएगा।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भूगोल विभाग तथा इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर+ (Himalayan Climate Adaptation & Resilience Education) प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल गांवों में दस दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अध्ययन के उपरांत इंटर्न्स की टीम श्रीनगर गढ़वाल स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय पहुंच चुकी है जहां कार्यक्रम के अगले चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दस दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की तीन प्रमुख विषय-वस्तुओं पर गहन अध्ययन एवं व्यावहारिक कार्य किया। इनमें पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय अनुकूलन एवं जलवायु कार्रवाई जल सुरक्षा जलस्रोत संरक्षण एवं स्प्रिंग साक्षरता तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण सामुदायिक लचीलापन एवं आपदा तैयारी प्रमुख रहे। इस दौरान इंटर्न्स ने स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित किया संसाधन मानचित्रण जलस्रोतों का सर्वेक्षण स्थानीय ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण तथा ग्राम स्तर पर विभिन्न पर्यावरणीय एवं सामाजिक चुनौतियों का अध्ययन किया। कार्यक्रम के अगले चरण में प्रतिभागियों की टीम उत्तराखंड के चार चयनित पर्वतीय गांवों में इन्हीं तीन विषयों पर विस्तृत क्षेत्रीय अध्ययन करेगी। इस दौरान जलस्रोतों की वर्तमान स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सामुदायिक भागीदारी पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों तथा आपदा जोखिम एवं स्थानीय अनुकूलन क्षमता से जुड़े विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक एवं सहभागी दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाएगा। कार्यक्रम का अंतिम उद्देश्य हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के अध्ययन क्षेत्रों से प्राप्त अनुभवों क्षेत्रीय आंकड़ों तथा स्थानीय समुदायों के सुझावों के आधार पर प्रत्येक चयनित गांव के लिए तीन व्यवहारिक एवं समुदाय-केंद्रित कार्ययोजनाएं (एक्शन प्लान) तैयार करना है। इन कार्ययोजनाओं में जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ बनाने तथा आपदा-रोधी एवं सतत हिमालयी समुदायों के निर्माण के लिए ठोस सुझाव एवं कार्यनीतियां शामिल होंगी। इन योजनाओं को संबंधित ग्राम समुदायों एवं स्थानीय प्रशासन के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में विकसित किया जाएगा।