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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। बीरचंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान में चिकित्सा ज्योतिष विषय पर हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं विकास परिषद के तत्वावधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान और ज्योतिष के पारस्परिक संबंधों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे तथा चिकित्सा ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ.दीपक द्विवेदी ने किया। परिषद के अध्यक्ष आचार्य भाष्करानन्द अणथ्वाल प्रो.रामानन्द गैरोला एवं डॉ.प्रकाश चमोली ने चिकित्सा ज्योतिष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ज्योतिष के माध्यम से रोगों की प्रवृत्ति दीर्घकालिक बीमारियों के संकेत जातक की दशाओं तथा राशियों के आधार पर शरीर के विभिन्न अंगों का अध्ययन किया जा सकता है। वक्ताओं ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न ग्रहों का मानव शरीर के अंगों से संबंध माना गया है। उदाहरणस्वरूप सूर्य का संबंध हड्डियों और मज्जा से चन्द्रमा का स्नायु तंत्र एवं सर्दी-जुकाम से तथा मंगल का संबंध सूजन शल्य चिकित्सा और गांठ जैसी समस्याओं से बताया गया। डॉ.प्रकाश चमोली ने ब्रह्माण्ड खगोल विज्ञान भचक्र तथा मानव शरीर की संरचना पर अपने विचार रखते हुए कहा कि मानव शरीर में लगभग 75 प्रतिशत जल होने के कारण प्रकृति एवं ब्रह्मांडीय गतिविधियों का प्रभाव शरीर पर देखा जा सकता है। प्रो.रामानन्द गैरोला ने राशियों के अनुसार शरीर के विभिन्न अंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटे की भांति चन्द्रमा का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि अवसाद एवं मानसिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के व्यवहार और बीमारी में भी समय-समय पर परिवर्तन देखने को मिलता है। परिषद के अध्यक्ष आचार्य भाष्करानन्द अणथ्वाल ने कहा कि चिकित्सा ज्योतिष आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद के समन्वय से रोगियों का मनोबल बढ़ाने में सहायक हो सकती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के परामर्श के साथ योग मंत्र जाप शुभ मुहूर्त एवं प्रश्न कुंडली जैसे उपायों का उपयोग रोगियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महामृत्युंजय मंत्र जाप तथा हृदय रोगियों के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ सकारात्मक मानसिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। संगोष्ठी के समापन अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना एवं वित्त नियंत्रक प्रशांत कुमार शर्मा एमएस डा राकेश रावत ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनहित में आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े ऐसे विषयों पर समय-समय पर संगोष्ठियों का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे समाज को नई जानकारी प्राप्त हो और विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा मिले।

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