प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय मत्स्य पालक दिवस के अवसर पर जनपद रुद्रप्रयाग में जलीय जैव विविधता के संरक्षण एवं मत्स्य संसाधनों के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंदाकिनी नदी की सहायक सौरगाड़ नदी में 20 हजार महाशीर मत्स्य बीजों का संचय किया गया। भीमताल मत्स्य प्रजनन केंद्र से लाए गए महाशीर मत्स्य बीजों को वैज्ञानिक विधि से नदी में छोड़ा गया ताकि राज्य की इस महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ मत्स्य प्रजाति का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि महाशीर उत्तराखंड की प्रमुख एवं दुर्लभ मत्स्य प्रजातियों में शामिल है। इसके संरक्षण और संवर्धन से न केवल नदियों की पारिस्थितिकी मजबूत होगी बल्कि भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को भी नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों में महाशीर मत्स्य बीजों का नियमित संचय जलीय जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान मत्स्य संरक्षण नदियों की स्वच्छता तथा प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित बनाए रखने का संदेश भी दिया गया। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से नदियों में अवैध मत्स्य आखेट रोकने तथा मत्स्य संरक्षण अभियानों में सक्रिय सहयोग करने की अपील की। इस अवसर पर मुख्य कृषि अधिकारी लोकेन्द्र बिष्ट गंगा संरक्षण समिति की परियोजना अधिकारी अभिलाषा पंवार जिला मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी मत्स्य निरीक्षक गणेश अग्रवाल मत्स्य निरीक्षक अरविंद कुमार नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के सुपरवाइजर सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मत्स्य संरक्षण एवं नदियों के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने का संकल्प लेते हुए अभियान में सहभागिता निभाई।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय मत्स्य पालक दिवस के अवसर पर जनपद रुद्रप्रयाग में जलीय जैव विविधता के संरक्षण एवं मत्स्य संसाधनों के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंदाकिनी नदी की सहायक सौरगाड़ नदी में 20 हजार महाशीर मत्स्य बीजों का संचय किया गया। भीमताल मत्स्य प्रजनन केंद्र से लाए गए महाशीर मत्स्य बीजों को वैज्ञानिक विधि से नदी में छोड़ा गया ताकि राज्य की इस महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ मत्स्य प्रजाति का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि महाशीर उत्तराखंड की प्रमुख एवं दुर्लभ मत्स्य प्रजातियों में शामिल है। इसके संरक्षण और संवर्धन से न केवल नदियों की पारिस्थितिकी मजबूत होगी बल्कि भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को भी नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों में महाशीर मत्स्य बीजों का नियमित संचय जलीय जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान मत्स्य संरक्षण नदियों की स्वच्छता तथा प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित बनाए रखने का संदेश भी दिया गया। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से नदियों में अवैध मत्स्य आखेट रोकने तथा मत्स्य संरक्षण अभियानों में सक्रिय सहयोग करने की अपील की। इस अवसर पर मुख्य कृषि अधिकारी लोकेन्द्र बिष्ट गंगा संरक्षण समिति की परियोजना अधिकारी अभिलाषा पंवार जिला मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी मत्स्य निरीक्षक गणेश अग्रवाल मत्स्य निरीक्षक अरविंद कुमार नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के सुपरवाइजर सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मत्स्य संरक्षण एवं नदियों के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने का संकल्प लेते हुए अभियान में सहभागिता निभाई।