प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के दिशा-निर्देशन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रुद्रप्रयाग के मार्गदर्शन में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पायल सिंह की अध्यक्षता में "कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम)" के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य तथा विषय-वस्तु की जानकारी दी गई। अपने अध्यक्षीय संबोधन में सचिव पायल सिंह ने कहा कि प्रत्येक महिला को सुरक्षित सम्मानजनक एवं भयमुक्त कार्यस्थल पर कार्य करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का लैंगिक उत्पीड़न महिला की गरिमा के साथ-साथ उसके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों का भी उल्लंघन है। उन्होंने सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में पॉश अधिनियम-2013 के अनुरूप आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन सुनिश्चित करने शिकायतों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण करने तथा कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता एवं संवेदनशील कार्य संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल दिया। प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने पॉश अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों अधिनियम की आवश्यकता कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की परिभाषा उसके विभिन्न स्वरूपों नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों आंतरिक शिकायत समिति के गठन उसकी कार्यप्रणाली तथा शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रोजेक्टर के माध्यम से जागरूकता वीडियो प्रदर्शित किए गए तथा पावर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण के जरिए व्यावहारिक उदाहरणों के साथ विषय को सरल ढंग से समझाया गया। कार्यशाला के दौरान महिला सुरक्षा एवं अधिकारों से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों महिलाओं के संरक्षण के लिए संचालित योजनाओं तथा उपलब्ध संस्थागत सहायता तंत्र की भी जानकारी प्रतिभागियों को दी गई। साथ ही सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल के निर्माण में नियोक्ता और प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर्स (पीएलवी) द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न उनके कानूनी अधिकारों शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा समाज एवं संस्थानों की जिम्मेदारियों को सरल और प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। प्रतिभागियों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता लोक अदालत विधिक जागरूकता कार्यक्रमों तथा अन्य कानूनी सेवाओं की जानकारी देते हुए पात्र व्यक्तियों से इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई। समापन अवसर पर सचिव पायल सिंह ने सभी प्रतिभागियों से महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने तथा सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है। अंत में सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के दिशा-निर्देशन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रुद्रप्रयाग के मार्गदर्शन में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पायल सिंह की अध्यक्षता में “कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम)” के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य तथा विषय-वस्तु की जानकारी दी गई। अपने अध्यक्षीय संबोधन में सचिव पायल सिंह ने कहा कि प्रत्येक महिला को सुरक्षित सम्मानजनक एवं भयमुक्त कार्यस्थल पर कार्य करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का लैंगिक उत्पीड़न महिला की गरिमा के साथ-साथ उसके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों का भी उल्लंघन है। उन्होंने सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में पॉश अधिनियम-2013 के अनुरूप आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन सुनिश्चित करने शिकायतों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण करने तथा कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता एवं संवेदनशील कार्य संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल दिया। प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने पॉश अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों अधिनियम की आवश्यकता कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की परिभाषा उसके विभिन्न स्वरूपों नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों आंतरिक शिकायत समिति के गठन उसकी कार्यप्रणाली तथा शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रोजेक्टर के माध्यम से जागरूकता वीडियो प्रदर्शित किए गए तथा पावर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण के जरिए व्यावहारिक उदाहरणों के साथ विषय को सरल ढंग से समझाया गया। कार्यशाला के दौरान महिला सुरक्षा एवं अधिकारों से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों महिलाओं के संरक्षण के लिए संचालित योजनाओं तथा उपलब्ध संस्थागत सहायता तंत्र की भी जानकारी प्रतिभागियों को दी गई। साथ ही सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल के निर्माण में नियोक्ता और प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर्स (पीएलवी) द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न उनके कानूनी अधिकारों शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा समाज एवं संस्थानों की जिम्मेदारियों को सरल और प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। प्रतिभागियों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता लोक अदालत विधिक जागरूकता कार्यक्रमों तथा अन्य कानूनी सेवाओं की जानकारी देते हुए पात्र व्यक्तियों से इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई। समापन अवसर पर सचिव पायल सिंह ने सभी प्रतिभागियों से महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने तथा सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है। अंत में सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।