प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। वरिष्ठ पत्रकार बेणीराम उनियाल ने उत्तराखंड के विकास को लेकर समावेशी एवं न्यायपूर्ण विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां की जल जंगल जमीन नदियां खनिज संपदा जलविद्युत क्षमता तथा पर्यटन राज्य की आर्थिक उन्नति के प्रमुख आधार हैं। इन संसाधनों के प्रभावी उपयोग से सड़क ऊर्जा पर्यटन और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है जो राज्य की प्रगति का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि उसका लाभ राज्य के स्थानीय समाज युवाओं किसानों और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचे। उनका कहना है कि आज भी उत्तराखंड के अनेक क्षेत्रों में पलायन सीमित रोजगार के अवसर कृषि से घटती आय और स्थानीय उद्यमों के सामने अनेक चुनौतियां बनी हुई हैं जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। बेणीराम उनियाल ने कहा कि यह विषय विकास का विरोध नहीं है, बल्कि विकास को अधिक समावेशी संतुलित और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक और रचनात्मक विमर्श है। यदि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग विकास के लिए किया जा रहा है तो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़े उन्हें रोजगार के अधिक अवसर मिलें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए तथा प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभ में उनकी प्रभावी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को ऐसे विकास मॉडल की आवश्यकता है जिसमें आधारभूत संरचना के निर्माण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था कृषि पर्यटन लघु उद्योग हस्तशिल्प और स्वरोजगार को भी समान महत्व दिया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि विकास तभी वास्तविक संतुलित और स्थायी माना जाएगा जब उसका प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए ऐसी नीतियां और योजनाएं बनाई जानी चाहिए जो पलायन को रोकने के साथ-साथ गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार सृजन उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दें। वरिष्ठ पत्रकार बेणीराम उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड का भविष्य तभी अधिक सशक्त समृद्ध और आत्मनिर्भर बन सकेगा जब प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त विकास का लाभ राज्य के स्थानीय नागरिकों तक न्यायपूर्ण संतुलित और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय समाज की भागीदारी और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके और उत्तराखंड समग्र एवं समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़े।
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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। वरिष्ठ पत्रकार बेणीराम उनियाल ने उत्तराखंड के विकास को लेकर समावेशी एवं न्यायपूर्ण विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां की जल जंगल जमीन नदियां खनिज संपदा जलविद्युत क्षमता तथा पर्यटन राज्य की आर्थिक उन्नति के प्रमुख आधार हैं। इन संसाधनों के प्रभावी उपयोग से सड़क ऊर्जा पर्यटन और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है जो राज्य की प्रगति का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि उसका लाभ राज्य के स्थानीय समाज युवाओं किसानों और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचे। उनका कहना है कि आज भी उत्तराखंड के अनेक क्षेत्रों में पलायन सीमित रोजगार के अवसर कृषि से घटती आय और स्थानीय उद्यमों के सामने अनेक चुनौतियां बनी हुई हैं जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। बेणीराम उनियाल ने कहा कि यह विषय विकास का विरोध नहीं है, बल्कि विकास को अधिक समावेशी संतुलित और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक और रचनात्मक विमर्श है। यदि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग विकास के लिए किया जा रहा है तो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़े उन्हें रोजगार के अधिक अवसर मिलें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए तथा प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभ में उनकी प्रभावी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को ऐसे विकास मॉडल की आवश्यकता है जिसमें आधारभूत संरचना के निर्माण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था कृषि पर्यटन लघु उद्योग हस्तशिल्प और स्वरोजगार को भी समान महत्व दिया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि विकास तभी वास्तविक संतुलित और स्थायी माना जाएगा जब उसका प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए ऐसी नीतियां और योजनाएं बनाई जानी चाहिए जो पलायन को रोकने के साथ-साथ गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार सृजन उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दें। वरिष्ठ पत्रकार बेणीराम उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड का भविष्य तभी अधिक सशक्त समृद्ध और आत्मनिर्भर बन सकेगा जब प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त विकास का लाभ राज्य के स्थानीय नागरिकों तक न्यायपूर्ण संतुलित और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय समाज की भागीदारी और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके और उत्तराखंड समग्र एवं समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़े।