Spread the love

प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा जनपद में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्य लाभार्थियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी आशीष रावत ने बताया कि महिला बकरी पालन योजना के तहत गरीब निराश्रित विधवा एवं तलाकशुदा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 35 हजार रुपये की लागत की एक यूनिट उपलब्ध कराई जाती है। इसमें तीन बकरियां और एक बकरा शामिल होता है। गत वित्तीय वर्ष में जनपद की 20 महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया गया। उन्होंने बताया कि राज्य सेक्टर बकरी पालन योजना के तहत गत वित्तीय वर्ष में 84 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। योजना के तहत एक यूनिट में 10 बकरियां और एक बकरा उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त सहकारी संस्था के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है जिससे लाभार्थी पांच अतिरिक्त बकरियां खरीदकर अपनी आय बढ़ा सकें। इसी प्रकार राज्य सेक्टर बकरी पालन योजना एसईपी के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। गत वित्तीय वर्ष में 31 महिलाओं का चयन कर उन्हें लाभान्वित किया गया। योजना के तहत 10 बकरियां और एक बकरा उपलब्ध कराने के साथ ही सहकारी संस्था के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण भी दिया जाता है। अनुसूचित जाति की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए गो पालन योजना भी संचालित की जा रही है। गत वित्तीय वर्ष में 21 महिलाओं का चयन कर उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया गया। वहीं अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए भेड़ पालन योजना के तहत गत वर्ष 25 लाभार्थियों का चयन कर उन्हें 10 भेड़ और एक भेड़ा उपलब्ध कराया गया। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए भी गो पालन योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत एक गाय की यूनिट स्थापित करने के लिए 40 हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसमें 90 प्रतिशत राज्यांश और 10 प्रतिशत लाभार्थी का अंश होता है। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद में बॉयलर पालन योजना के माध्यम से भी ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। योजना के तहत लाभार्थियों को बॉयलर पालन के लिए बाड़ा तैयार करने में विभागीय सहायता देने के साथ ही बॉयलर चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। लाभार्थियों को 60 हजार रुपये का अनुदान भी दिया जाता है। गत वर्ष 25 लाभार्थियों को इस योजना का लाभ मिला। इसके साथ ही ग्राम्य गो सेवक योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा नंदियों के संरक्षण और पालन-पोषण के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना के तहत लाभार्थी पांच आवारा नंदियों का पालन-पोषण करते हैं और इसके लिए उन्हें प्रतिमाह 12 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाती है। इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ ही आवारा गोवंश के संरक्षण एवं पालन-पोषण में भी मदद मिल रही है। पशुपालन विभाग की इन योजनाओं के माध्यम से जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे उनकी आजीविका को मजबूती मिलने के साथ ही आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *