जिला पंचायत वार्ड बजीरा को ओबीसी महिला घोषित करने पर सभी ओबीसी जाति के लोगों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग
प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के अंनन्तिम आरक्षण सूची प्रकाशित होने पर जिला पंचायत वार्ड बजीरा को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित करने पर निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य व विधायक प्रतिनिधि भूपेंद्र सिंह भंडारी ने आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री,जिला निवार्चन अधिकारी,जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग व अन्य पिछड़ी जाति आयोग उत्तराखण्ड को ज्ञापन भेजकर कहा है कि ओबीसी के तहत जितने नाम मतदाता सूची में अंकित हैं,उन सबको ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किया जाय।भूपेंद्र सिंह भंडारी ने ज्ञापन में कहा है कि पंचायत चुनाव 2025 के लिए 8 बजीरा जिलापंचायत वार्डओबीसी महिला हेतु आरक्षित की गयी है। कहा कि सीट निर्धारण के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के साथ सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस वर्मा एकल समिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर बजीरा वार्ड की ओबीसी जनसंख्या 2102 के साथ ही त्रिजुगीनारायण वार्ड ओबीसी जनसंख्या 734 तथा सिल्लाबमण गांव की ओबीसी जनसंख्या 896 है,प्रथम दृष्टया आरक्षण के लिए व निर्धारण को देखते हुये इस सीट का ओबीसी महिला हेतु आरक्षित होना उचित प्रतीत होता है,लेकिन भूपेंद्र भंडारी ने कहा है कि प्रश्न यह है कि जितनी जनसंख्या ओबीसी की दिखाई गई है उन सबको ओबीसी प्रमाण पत्र जारी क्यों नहीं किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि कारण एवं वास्तविकता यह है कि यह क्षेत्र विशेष पूर्व में राजशाही का हिस्सा रहा है। राजशाही व्यवस्था में ही इस क्षेत्र विशेष में कौम सोनार शब्द का उदय हुआ।ओबीसी की सूची में सोनार जाति होने पर इस लाभ की परिधि में इस क्षेत्र विशेष की पंवार,बुटोला जाति को भी स्थान मिल गया ओर कुछ समय तक सभी को ओबीसी के सभी लाभ भी प्राप्त हुए। लेकिन वर्ष 2016 में अन्य पिछड़ी जाति आयोग का फैसला आया है कि इस क्षेत्र विशेष की केवल उसी जाति को ओबीसी की श्रेणी में रखा जायेगा जिनकी बंदोबस्ती की मूल प्रविष्टि में कौम सोनार दर्ज हो। उन्होंने कहा है कि इस फैसले के प्रभाव से सम्पूर्ण पंवार जाति के लोग ओबीसी की परिधि से बाहर हो गये। जबकि लगभग 50% बुटोला जाति के लोग भी ओबीसी की परिधि से बाहर हो गये। उन्होंने इसे अव्यवहारिकता ओर असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि इससे दो सगे भाई ही एक ओबीसी व दूसरा सामान्य जाति की श्रेणी में आ गया है। जिससे न्याय व्यवस्था पर ही सवाल सुलगते हैं ओर दोहरा मापदंड झलकता है। उन्होंने इस दोहरे मापदण्ड पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा है कि जब इस क्षेत्र विशेष में ओबीसी जनसंख्या का आधार 2011 की गणना ओर बीएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट को माना गया है,तो फिर ओबीसी लाभ दिये जाने का आधार वर्ष 2016 का अन्य पिछड़ी जाति आयोग का फैसला क्यों लागू किया गया है। कहा कि सीट का निर्धारण तो सम्पूर्ण ओबीसी की जनसंख्या के आधार पर किया गया,जबकि प्रमाणपत्र जारी करने व उससे प्राप्त लाभ लेने का अधिकार मात्र 20% लोगों को ही क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इस सम्बन्ध में उन्होंने सोमवार को बतौर जिला निवार्चन अधिकारी व जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से लम्बी वार्ता की ओर
जिलाधिकारी डाॅ.सौरभ गहरवार ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी लिखित आपत्ति पर वे उन्हें लिखित सूचना से अवगत करायेंगे,जिसे वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में
जायेंगे। कहा कि जिलाधिकारी की लिखित सूचना प्राप्त होते ही इस क्षेत्र विशेष के सभी नागरिकों से विचार-विमर्श कर इस दोहरे मापदण्ड को न्यालय में चुनौती देंगे,क्योंकि इस दोहरी व्यवस्था का समाधान नितान्त आवश्यक है ओर कहा कि आरक्षण हेतु मूल आत्मा पर भी प्रश्न चिन्ह है। उन्होंने कहा कि कागजी आंकड़े ने सबसे कम जनसंख्या वाली सीट को आरक्षित भी कर दिया है। उन्होंने बीएस. वर्मा एकल आयोग के आंकड़ों को रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है।उन्होंने इस क्षेत्र विशेष के गलत आंकड़ों को प्रस्तुत करने वालों की भी जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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जिला पंचायत वार्ड बजीरा को ओबीसी महिला घोषित करने पर सभी ओबीसी जाति के लोगों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग
प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के अंनन्तिम आरक्षण सूची प्रकाशित होने पर जिला पंचायत वार्ड बजीरा को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित करने पर निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य व विधायक प्रतिनिधि भूपेंद्र सिंह भंडारी ने आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री,जिला निवार्चन अधिकारी,जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग व अन्य पिछड़ी जाति आयोग उत्तराखण्ड को ज्ञापन भेजकर कहा है कि ओबीसी के तहत जितने नाम मतदाता सूची में अंकित हैं,उन सबको ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किया जाय।भूपेंद्र सिंह भंडारी ने ज्ञापन में कहा है कि पंचायत चुनाव 2025 के लिए 8 बजीरा जिलापंचायत वार्डओबीसी महिला हेतु आरक्षित की गयी है। कहा कि सीट निर्धारण के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के साथ सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस वर्मा एकल समिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर बजीरा वार्ड की ओबीसी जनसंख्या 2102 के साथ ही त्रिजुगीनारायण वार्ड ओबीसी जनसंख्या 734 तथा सिल्लाबमण गांव की ओबीसी जनसंख्या 896 है,प्रथम दृष्टया आरक्षण के लिए व निर्धारण को देखते हुये इस सीट का ओबीसी महिला हेतु आरक्षित होना उचित प्रतीत होता है,लेकिन भूपेंद्र भंडारी ने कहा है कि प्रश्न यह है कि जितनी जनसंख्या ओबीसी की दिखाई गई है उन सबको ओबीसी प्रमाण पत्र जारी क्यों नहीं किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि कारण एवं वास्तविकता यह है कि यह क्षेत्र विशेष पूर्व में राजशाही का हिस्सा रहा है। राजशाही व्यवस्था में ही इस क्षेत्र विशेष में कौम सोनार शब्द का उदय हुआ।ओबीसी की सूची में सोनार जाति होने पर इस लाभ की परिधि में इस क्षेत्र विशेष की पंवार,बुटोला जाति को भी स्थान मिल गया ओर कुछ समय तक सभी को ओबीसी के सभी लाभ भी प्राप्त हुए। लेकिन वर्ष 2016 में अन्य पिछड़ी जाति आयोग का फैसला आया है कि इस क्षेत्र विशेष की केवल उसी जाति को ओबीसी की श्रेणी में रखा जायेगा जिनकी बंदोबस्ती की मूल प्रविष्टि में कौम सोनार दर्ज हो। उन्होंने कहा है कि इस फैसले के प्रभाव से सम्पूर्ण पंवार जाति के लोग ओबीसी की परिधि से बाहर हो गये। जबकि लगभग 50% बुटोला जाति के लोग भी ओबीसी की परिधि से बाहर हो गये। उन्होंने इसे अव्यवहारिकता ओर असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि इससे दो सगे भाई ही एक ओबीसी व दूसरा सामान्य जाति की श्रेणी में आ गया है। जिससे न्याय व्यवस्था पर ही सवाल सुलगते हैं ओर दोहरा मापदंड झलकता है। उन्होंने इस दोहरे मापदण्ड पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा है कि जब इस क्षेत्र विशेष में ओबीसी जनसंख्या का आधार 2011 की गणना ओर बीएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट को माना गया है,तो फिर ओबीसी लाभ दिये जाने का आधार वर्ष 2016 का अन्य पिछड़ी जाति आयोग का फैसला क्यों लागू किया गया है। कहा कि सीट का निर्धारण तो सम्पूर्ण ओबीसी की जनसंख्या के आधार पर किया गया,जबकि प्रमाणपत्र जारी करने व उससे प्राप्त लाभ लेने का अधिकार मात्र 20% लोगों को ही क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इस सम्बन्ध में उन्होंने सोमवार को बतौर जिला निवार्चन अधिकारी व जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से लम्बी वार्ता की ओर
जिलाधिकारी डाॅ.सौरभ गहरवार ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी लिखित आपत्ति पर वे उन्हें लिखित सूचना से अवगत करायेंगे,जिसे वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में
जायेंगे। कहा कि जिलाधिकारी की लिखित सूचना प्राप्त होते ही इस क्षेत्र विशेष के सभी नागरिकों से विचार-विमर्श कर इस दोहरे मापदण्ड को न्यालय में चुनौती देंगे,क्योंकि इस दोहरी व्यवस्था का समाधान नितान्त आवश्यक है ओर कहा कि आरक्षण हेतु मूल आत्मा पर भी प्रश्न चिन्ह है। उन्होंने कहा कि कागजी आंकड़े ने सबसे कम जनसंख्या वाली सीट को आरक्षित भी कर दिया है। उन्होंने बीएस. वर्मा एकल आयोग के आंकड़ों को रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है।उन्होंने इस क्षेत्र विशेष के गलत आंकड़ों को प्रस्तुत करने वालों की भी जवाबदेही तय करने की मांग की है।