प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स की ओर से माउंट त्रिशूल पर पर्वतारोहण अभियान को बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर रुड़की से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 7,120 मीटर यानी 23,360 फीट ऊंचे माउंट त्रिशूल के लिए शुरू किया गया यह अभियान गढ़वाल हिमालय की कठिन चोटियों में से एक पर चढ़ाई के चुनौतीपूर्ण प्रयास की शुरुआत है। समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल रहे। कोर ऑफ इंजीनियर्स के कई अनुभवी अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। ये अधिकारी पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने अभियान दल के सदस्यों से बातचीत भी की। गढ़वाल हिमालय में 7,120 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट त्रिशूल अत्यधिक ऊंचाई कठिन मार्गों और अनिश्चित मौसम जैसी चुनौतियां प्रस्तुत करता है। अभियान के दौरान टीम की शारीरिक सहनशक्ति तकनीकी दक्षता मानसिक मजबूती और ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता की परीक्षा होगी। अनुभवी अधिकारियों जूनियर कमीशंड अधिकारियों और अन्य रैंक के जवानों से गठित अभियान दल ने मिशन के लिए व्यापक तैयारी की है। इसमें ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूल ढलने गहन शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण शामिल है। चढ़ाई के दौरान आने वाली तकनीकी और रसद संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक योजना तैयार की गई है। समारोह की शुरुआत अभियान दल के नेता की विस्तृत प्रस्तुति और अभियान संबंधी जानकारी से हुई। इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम चढ़ाई एवं अंतिम प्रयास के मार्ग सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा हिमालय के कठिन मार्गों और तेजी से बदलते मौसम से निपटने के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजामों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की शारीरिक फिटनेस मानसिक मजबूती और टीम भावना के उच्च स्तर की सराहना की। उन्होंने सैपर्स की रोमांच और पर्वतारोहण उपलब्धियों की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए नेतृत्व सहनशक्ति अनुशासन टीम वर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने जैसे गुणों को विकसित करने में ऐसे अभियानों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये गुण सैन्य तैयारी में विशेषकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कोर के अनुभवी पर्वतारोहियों की मौजूदगी ने समारोह की अहमियत को और बढ़ाया। यह कोर ऑफ इंजिनियर्स के भीतर रोमांच साहस और पेशेवर उत्कृष्टता की स्थायी परंपरा को दर्शाता है। समारोह के समापन पर अभियान दल के नेता को औपचारिक एक्सपेडिशन फ्लैग सौंपा गया। इसके साथ ही दल को बेस कैंप की यात्रा और इसके बाद माउंट त्रिशूल पर चढ़ाई के लिए औपचारिक रूप से रवाना किया गया। यह अभियान कोर ऑफ इंजिनियर्स की गौरवशाली पर्वतारोहण परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही कठिन से कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना के साहस दृढ़ता टीमवर्क और उत्कृष्टता की भावना को प्रदर्शित करता है।
