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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। संस्कृत भाषा की मधुरता भारतीय संस्कृति की झलक और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा से बुधवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हरिपुर का परिसर जीवंत हो उठा। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित खंडस्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता 2026-27 में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत की विविध विधाओं में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी भाषायी दक्षता और मंचीय प्रतिभा का परिचय देने के साथ ही संस्कृत भाषा के प्रति अपनी रुचि एवं जुड़ाव को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत सहायक निदेशक डॉ.चंद्रप्रसाद घिल्डियाल एवं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हरिपुर की प्रधानाचार्य शिखा भट्ट ने किया। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य राम चौधरी एवं यमुनानगर अध्यक्ष सुनील सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिभागी विद्यार्थी एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। खंड संयोजक डॉ.अंजू श्रीवास्तव ने बताया कि प्रतियोगिता में संस्कृत नाटक समूहगान समूह नृत्य वाद-विवाद आशुभाषण एवं श्लोकोच्चारण जैसी विभिन्न विधाओं में विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। संस्कृत नाटक के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ दोनों वर्गों में पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज कालसी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृत समूहगान के वरिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज कोटी तथा कनिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज लखवाड़ प्रथम रहे। संस्कृत समूह नृत्य के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ दोनों वर्गों में राजकीय इंटर कॉलेज मुन्धान ने प्रथम स्थान हासिल किया। संस्कृत वाद-विवाद के कनिष्ठ वर्ग में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उपाल्टा तथा वरिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज कोटी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृत आशुभाषण के वरिष्ठ वर्ग में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय समाल्टा तथा कनिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज नागथात प्रथम रहे। श्लोकोच्चारण के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ दोनों वर्गों में राजकीय इंटर कॉलेज मुन्धान ने प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास भाषायी कौशल और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावी प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से उनके जुड़ाव को भी मजबूत करती हैं। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण एवं रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

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