प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। कल्याणेसर धर्मशाला महादेव मंदिर में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। कथा का आयोजन 23 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक किया जाएगा। कथा के पहले दिन व्यास हरीश चंद्र भट्ट ने भक्ति और ज्ञान तथा वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भक्ति देवी के दो पुत्र थे जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य थे। दोनों जवानी में ही वृद्ध हो गए थे। नारद जी ने उन्हें जगाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं जागे। इसके बाद सनकादिक मुनियों ने बताया कि ज्ञान और वैराग्य को जागृत करने का एक ही उपाय श्रीमद्भागवत कथा है। जैसे ही पहले दिन भागवत कथा का पहला श्लोक पढ़ा गया वैसे ही ज्ञान और वैराग्य युवा और चेतन हो गए। व्यास हरीश चंद्र भट्ट ने कहा कि जिस घर में श्रीमद्भागवत कथा होती है वहां भक्ति और ज्ञान तथा वैराग्य तीनों स्वयं आकर निवास करते हैं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र प्रसाद बर्थवाल और आचार्य पंडित चंडी प्रसाद बंगवाल तथा आचार्य पंडित प्रकाश बलूनी एवं आचार्य पंडित अंशुमन पांडे मौजूद रहे। इसके साथ ही अजय बर्थवाल और पवन रणकोटी तथा राजेंद्र रणकोटी एवं जयदयाल संस्कृति स्कूल के बच्चे सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
