प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र तथा मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 27 अक्टूबर 2026 को शुरू हुए इस संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों उद्देश्यों तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन से परिचित कराना है। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के 96 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी डीन सीडीपी प्रो.नंदिनी श्रीवास्तव यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के डॉ.सोमेश थपलियाल एवं डॉ.अमरजीत सिंह परिहार मानव रचना विश्वविद्यालय के उपनिदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.संजय कुमार तथा पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. प्रियंका सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात प्रो. प्रियंका सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों रूपरेखा तथा अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डाला। अपने स्वागत संबोधन में प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक बहुआयामी कौशल आधारित विद्यार्थी केंद्रित तथा रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता एवं व्यावसायिक क्षमताओं का विकास करना है ताकि वे नई शिक्षा नीति की भावना को कक्षाओं में प्रभावी रूप से लागू कर सकें। मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के कुलपति प्रो.संजय श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में बहुविषयक शिक्षा विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण तथा परिणामोन्मुख शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करने और नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोणों को अपने शिक्षण एवं शोध कार्यों में अपनाने का आह्वान किया। यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के डॉ.सोमेश थपलियाल ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की समय-सारणी उपस्थिति मूल्यांकन प्रतिपुष्टि तथा प्रमाणपत्र प्राप्त करने संबंधी दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उद्घाटन सत्र के अंत में डॉ.संजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान नई दिल्ली के विशेषज्ञ प्रो. कुमार सुरेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कौशल शिक्षा की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए अनेक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनका एक प्रमुख उद्देश्य कौशल शिक्षा को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि परंपरागत रूप से व्यावसायिक शिक्षा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा सामान्य उच्च शिक्षा को अलग-अलग धाराओं के रूप में देखा जाता रहा है। इसके परिणामस्वरूप कौशल आधारित शिक्षा को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सामान्य शिक्षा और कौशल शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल है जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता रोजगारपरक कौशल तथा नवाचार की क्षमता प्रदान करने पर बल देती है। कार्यक्रम के द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो.संदीप कुलश्रेष्ठ ने अंतरपीढ़ीगत संबंधों की अवधारणा उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा ज्ञान के हस्तांतरण में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंतरपीढ़ीगत संबंध केवल परिवार के वरिष्ठ एवं युवा सदस्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये अनुभव ज्ञान संस्कृति भाषा जीवन मूल्यों तथा परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। परिवार और समाज में विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद एवं पारस्परिक सम्मान से ज्ञान की निरंतरता बनी रहती है तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है। प्रो.कुलश्रेष्ठ ने भाषा के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है बल्कि ज्ञान संस्कृति परंपरा और सामाजिक पहचान की संवाहक भी है। मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों स्थानीय ज्ञान लोकपरंपराओं तथा पूर्वजों के अनुभवों से जोड़ना संभव है। उन्होंने भाषा संस्कृति और ज्ञान के बीच अंतर्संबंध को स्पष्ट करते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओं बहुभाषिकता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रोत्साहित करती है। इस दृष्टि से विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद को बढ़ावा देना बुजुर्गों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण करना तथा लोककथाओं लोकगीतों पारंपरिक ज्ञान और जीवनानुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। प्रो.कुलश्रेष्ठ ने यह भी कहा कि आधुनिक जीवनशैली रोजगार के लिए पलायन एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति तथा डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता के कारण विभिन्न पीढ़ियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद में कमी आई है। ऐसी स्थिति में परिवार शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों को मिलकर संवाद सहयोग एवं पारस्परिक सम्मान की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अंतरपीढ़ीगत संबंध एकतरफा नहीं बल्कि परस्पर सीखने की प्रक्रिया हैं। जहां वरिष्ठ पीढ़ी अपने अनुभव जीवन मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान को साझा करती है वहीं युवा पीढ़ी तकनीक नवाचार और बदलते सामाजिक परिवेश से संबंधित नई जानकारियों के माध्यम से वरिष्ठों को सहयोग प्रदान कर सकती है। इस प्रकार दोनों पीढ़ियां एक-दूसरे से सीखते हुए समाज के समग्र विकास में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने निष्कर्षतः कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षा को पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे भाषा संस्कृति जीवनानुभव नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना आवश्यक है। अंतरपीढ़ीगत संवाद इस उद्देश्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न आयामों कौशल आधारित शिक्षा भारतीय भाषाओं सांस्कृतिक विरासत तथा ज्ञान के अंतरण जैसे विषयों पर विचार करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम शिक्षकों की क्षमता संवर्धन के साथ-साथ उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
