प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में निराश्रित एवं पालतू पशुओं के प्रभावी प्रबंधन और पशु कल्याण सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार में नगर निगम और नगर निकायों के साथ पशुपालन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने पशुओं के पंजीकरण और निगरानी के साथ गौशालाओं के संचालन तथा पशु चिकित्सा सेवाओं और हेल्पलाइन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निराश्रित एवं पालतू पशुओं के पंजीकरण और प्रभावी निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर प्रत्येक पशु का विवरण उपलब्ध होना चाहिए। इसके माध्यम से पशुओं की संख्या और पंजीकरण की स्थिति सहित अन्य आवश्यक जानकारियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए ताकि पशुओं के प्रबंधन और निगरानी में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने नगर निगम और सभी नगर निकाय क्षेत्रों में संचालित डेयरियों का विस्तृत सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। सर्वेक्षण के दौरान डेयरियों की संख्या और उनमें रखे गए पशुओं की संख्या के साथ पंजीकृत पशुओं का पूरा विवरण संकलित किया जाए। उन्होंने कहा कि पशुओं से संबंधित आंकड़ों का अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। जिलाधिकारी ने पशु हेल्पलाइन नंबर 1962 पर शिकायतों का उचित जवाब नहीं मिलने और पशु एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया। व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने स्वयं हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल किया। कॉल पर अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संबंधित कार्मिकों की जवाबदेही निर्धारित करने और उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि पशुओं के उपचार और रेस्क्यू से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए तथा पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था की प्रभावी निगरानी की जाए ताकि जरूरतमंद पशुओं को समय पर सहायता मिल सके। जिलाधिकारी ने नगर निगम और नगर निकाय क्षेत्रों के प्रमुख प्रवेश एवं निकासी मार्गों पर कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि पशुओं की आवाजाही पर निगरानी रखी जा सके। उन्होंने निराश्रित गौवंशीय पशुओं को पकड़ने और उनके समुचित प्रबंधन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद में संचालित गौशालाओं में निराश्रित पशुओं के रखरखाव और चारे-पानी की व्यवस्था के साथ साफ-सफाई तथा चिकित्सकीय उपचार निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। गौशालाओं की नियमित निगरानी करते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं और पशुओं की स्थिति का आकलन किया जाए। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को प्रभावी निगरानी करने और गौशाला प्रबंधकों को व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए कड़े निर्देश जारी करने को कहा। शहर में पालतू एवं निराश्रित श्वानों के प्रबंधन को लेकर जिलाधिकारी ने पंजीकरण व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने श्वान के काटने से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए रैपिड रेस्क्यू टीम के माध्यम से आवश्यक कदम उठाने को कहा। साथ ही संबंधित श्वानों को नियमानुसार पशु जन्म नियंत्रण केंद्र यानी एबीसी सेंटर में 10 दिवसीय निगरानी और आइसोलेशन में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्वानों से संबंधित शिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई की जाए। आमजन की सुरक्षा के साथ पशु कल्याण के निर्धारित मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने बंदरों के आतंक से प्रभावित मानव आबादी वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित मानकों और नियमों के अनुसार बंदरों का रेस्क्यू किया जाए ताकि आमजन को राहत मिलने के साथ वन्यजीव संरक्षण संबंधी प्रावधानों का भी पालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पशुओं के प्रबंधन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। इससे पशु कल्याण के साथ जनसुरक्षा और नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा। बैठक में वरिष्ठ पशुपालन अधिकारी नगर निगम डॉ. वी.के.अग्रवाल और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के.चंद सहित नगर निगम देहरादून के डॉ.रोहित गहलोत उपस्थित रहे। इसके अलावा नगर निगम ऋषिकेश और नगर निगम देहरादून के साथ सभी नगर निकायों के संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक बैठक में शामिल हुए।
