प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में नवोदय विद्यालय समिति के शिक्षकों के लिए आयोजित चार दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का समापन विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों तकनीकी सत्रों एवं प्रेरक विचार-विमर्श के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नवीन शिक्षण पद्धतियों डिजिटल तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं दक्षता आधारित शिक्षण से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के तृतीय दिवस विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित पाठ योजनाओं तथा अनुभवात्मक अधिगम गतिविधियों का प्रस्तुतिकरण किया। विशेषज्ञों ने डिजिटल संसाधनों कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक आधारित मूल्यांकन तथा विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण के प्रभावी उपयोग पर प्रकाश डाला। इस दौरान PhET खान अकादमी GeoGebra एनसीईआरटी एवं एनपीटीईएल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपयोगिता भी बताई गई। प्रतिभागियों ने विज्ञान प्रयोग पर्यावरण संरक्षण भूमिका अभिनय एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित गतिविधियों के माध्यम से करके सीखने की अवधारणा प्रस्तुत की। इस अवसर पर प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग स्थित संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। प्रो.फरस्वाण ने प्राचीन पुरावशेषों मूर्तियों पांडुलिपियों एवं हिमालयी सांस्कृतिक विरासत की ऐतिहासिक महत्ता से शिक्षकों को अवगत कराया। इस भ्रमण से शिक्षकों को भारतीय इतिहास एवं संस्कृति को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंतिम दिवस व्यावसायिक विकास राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन स्व-निर्देशित अधिगम कार्यात्मक अनुसंधान एवं सतत व्यावसायिक विकास विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। प्रो.सीमा धवन डॉ.नीतू शर्मा डॉ.पुनीत वालिया डॉ. देवेंद्र सिंह एवं डॉ.आशु रौलेट सहित विशेषज्ञों ने शिक्षकों को आत्ममूल्यांकन नवाचार सहयोगात्मक अधिगम तथा शिक्षण में निरंतर सुधार के लिए प्रेरित किया। समापन समारोह में डॉ.शंकर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि डॉ.कविता भट्ट ने मंच संचालन किया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.एम.एम. सेमवाल ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। बदलते शैक्षिक परिवेश में शिक्षकों का निरंतर सीखना और नवीन शिक्षण पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। मुख्य अतिथि प्रो.दीपक कुमार ने शिक्षण में तकनीक के प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए कक्षाओं को अधिक संवादात्मक एवं विद्यार्थी केंद्रित बनाने की आवश्यकता बताई। प्रो.ए.के. नौटियाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा नैतिक मूल्यों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय पर जोर दिया। वहीं प्रो.आर.एस.नेगी ने विश्वविद्यालय एवं विद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को शिक्षा में नवाचार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम की समन्वयक प्रो.सीमा धवन ने चार दिवसीय प्रशिक्षण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं को विकसित करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विशेषज्ञों प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में डॉ.आलोक सागर गौतम डॉ.सुमनलता तिरुवा डॉ.सपना सेन डॉ.अनित कौर डॉ.रीना आर्य राम कुमार सूरज सिंह विपिन सिंह स्नेहलता प्रेरणा बहुगुणा एवं नमिता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी तथा नवोदय विद्यालय समिति के प्रतिभागी शिक्षक उपस्थित रहे। चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने शिक्षकों को आधुनिक तकनीक अनुभवात्मक अधिगम एवं नवाचार आधारित शिक्षण के नए आयामों से परिचित कराया। यह कार्यक्रम शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास की दिशा में सार्थक पहल साबित हुआ।
