कांवड़ यात्रा: बेहोश यात्री को पुलिस व एसडीआरएफ ने समय पर पहुंचाया अस्पताल पेश की मानवता की मिसाल
प्रदीप कुमार
नीलकंठ-पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।वर्तमान में चल रही कांवड़ यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन हेतु श्री नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंच रही है। इसी दौरान कांवड़ यात्रा पर आये निशांत 26 वर्ष,निवासी मेरठ यात्रा के दौरान नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर पैदल रास्ते से जा रहे थे जो अचानक रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़े। यात्रा मार्ग पर बढ़ती भीड़ और गर्मी के बीच यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती थी,लेकिन मौके पर ड्यूटी में तैनात पुलिस टीम व एसडीआरएफ ने तुरंत मानवीय संवेदनशीलता और कार्यकुशलता का परिचय दिया।पुलिस व एसडीआरएफ टीम ने बिना देरी किए स्ट्रेचर की सहायता से पैदल मार्ग से निशांत को सुरक्षित रूप से मुख्य सड़क तक पहुंचाया,जहाँ पहले से सूचना पर तैयार एम्बुलेंस ने घायल यात्री को चिकित्सकीय उपचार हेतु निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया। कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में पुलिस का यह मानवीय चेहरा श्रद्धा,संवेदना और सेवा का प्रतीक बनकर सामने आया है। पुलिस टीम के जवानों का यह प्रयास एक उदाहरण है कि वर्दी में केवल अनुशासन नहीं,संवेदना भी होती है।
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कांवड़ यात्रा: बेहोश यात्री को पुलिस व एसडीआरएफ ने समय पर पहुंचाया अस्पताल पेश की मानवता की मिसाल
प्रदीप कुमार
नीलकंठ-पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।वर्तमान में चल रही कांवड़ यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन हेतु श्री नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंच रही है। इसी दौरान कांवड़ यात्रा पर आये निशांत 26 वर्ष,निवासी मेरठ यात्रा के दौरान नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर पैदल रास्ते से जा रहे थे जो अचानक रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़े। यात्रा मार्ग पर बढ़ती भीड़ और गर्मी के बीच यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती थी,लेकिन मौके पर ड्यूटी में तैनात पुलिस टीम व एसडीआरएफ ने तुरंत मानवीय संवेदनशीलता और कार्यकुशलता का परिचय दिया।पुलिस व एसडीआरएफ टीम ने बिना देरी किए स्ट्रेचर की सहायता से पैदल मार्ग से निशांत को सुरक्षित रूप से मुख्य सड़क तक पहुंचाया,जहाँ पहले से सूचना पर तैयार एम्बुलेंस ने घायल यात्री को चिकित्सकीय उपचार हेतु निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया। कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में पुलिस का यह मानवीय चेहरा श्रद्धा,संवेदना और सेवा का प्रतीक बनकर सामने आया है। पुलिस टीम के जवानों का यह प्रयास एक उदाहरण है कि वर्दी में केवल अनुशासन नहीं,संवेदना भी होती है।