उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पाद और संस्कृति अब GMVN-गुप्तकाशी जनपद रुद्रप्रयाग में भी नजर आएगी
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।अब उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट पहाड़ी उत्पादों की महक गुप्तकाशी पहुंच चुकी है।House of Himalayas Ltd. द्वारा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने और बाज़ार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से FSU (Flour Standing Unit) की स्थापना गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) परिसर,गुप्तकाशी में की गई है।इस FSU केंद्र में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए जैविक और हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे मंडुवा, झंगोरा,हर्बल चाय,पहाड़ी मसाले,ऊनी वस्त्र,हस्तशिल्प,स्थानीय शिल्पकला और अन्य पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित और विक्रय के लिए रखा गया है। यह न केवल पर्यटकों के लिए स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का एक आकर्षक माध्यम बनेगा,बल्कि स्थानीय कारीगरों,किसानों एवं महिलाओं के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोलेगा।यह पहल राज्य सरकार की 'वोकल फॉर लोकल' नीति को सशक्त करती है और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर जहां स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी,वहीं दूसरी ओर घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड की जैविक,सांस्कृतिक एवं पारंपरिक धरोहर को करीब से जानने और खरीदने का अवसर मिलेगा।गुप्तकाशी में इस प्रकार की पहल से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे,पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और पहाड़ी उत्पादों को एक नया बाजार भी उपलब्ध होगा।
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उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पाद और संस्कृति अब GMVN-गुप्तकाशी जनपद रुद्रप्रयाग में भी नजर आएगी
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।अब उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट पहाड़ी उत्पादों की महक गुप्तकाशी पहुंच चुकी है।House of Himalayas Ltd. द्वारा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने और बाज़ार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से FSU (Flour Standing Unit) की स्थापना गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) परिसर,गुप्तकाशी में की गई है।इस FSU केंद्र में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए जैविक और हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे मंडुवा, झंगोरा,हर्बल चाय,पहाड़ी मसाले,ऊनी वस्त्र,हस्तशिल्प,स्थानीय शिल्पकला और अन्य पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित और विक्रय के लिए रखा गया है। यह न केवल पर्यटकों के लिए स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का एक आकर्षक माध्यम बनेगा,बल्कि स्थानीय कारीगरों,किसानों एवं महिलाओं के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोलेगा।यह पहल राज्य सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ नीति को सशक्त करती है और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर जहां स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी,वहीं दूसरी ओर घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड की जैविक,सांस्कृतिक एवं पारंपरिक धरोहर को करीब से जानने और खरीदने का अवसर मिलेगा।गुप्तकाशी में इस प्रकार की पहल से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे,पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और पहाड़ी उत्पादों को एक नया बाजार भी उपलब्ध होगा।