बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों की कोशिश से मौत के मुंह से लौटी 3 साल की मासूम बच्ची
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।पौड़ी जिले के पिसोली गांव की एक तीन वर्षीय बालिका,जो कीटनाशक दवा के संपर्क में आने से अचानक बेहोश हो गई थी,उसे बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के डॉक्टरों ने दस दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रखकर 24 दिन की लंबी लड़ाई के बाद बालिका की जीवन की रक्षा कर चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टरों की मेहनत का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। डॉक्टरों की कोशिश और कीटनाशक से लड़कर मासूम ने जीती जिंदगी।अस्पताल में भर्ती बालिका के पिता शिशपाल सिंह ने बताया कि विगत माह उनकी बेटी घर पर अचानक बेहोश हो गई थी।तत्काल वे उसे पौड़ी अस्पताल ले गए,जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉ.निशा उपाध्याय ने गंभीर स्थिति को भांपते हुए उसे तुरंत जीवन रक्षक उपकरणों के साथ बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया और बालिका के संदर्भ में पूरी जानकारी बेस अस्पताल के डॉक्टरों को दी। जिससे बालिका बेस अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम पूरी तरह से तैयार थी। इसमें डॉक्टरों के आपसी समन्वय के कारण बालिका के इलाज में काफी मदद मिली। बालिका के इलाज में एक टीम वर्क का परिणाम रहा,जिसमें जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ तक सभी ने मिलकर कार्य किया। डॉक्टरों के बीच समन्वय का ही परिणाम है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए और बच्ची की जान बचाई जा सकी। बालिका के पिता शिशपाल एवं मां आरती देवी ने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी पहली बार अचानक अचेत हो गई थी और वह घबरा गए थे। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत,देखभाल और सहयोग से आज उनकी बेटी जीवन की ओर लौट आई है। उन्होंने डॉक्टरों की पूरी टीम के प्रति आभार जताया। परिजनों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत जी का भी आभार जताते हुए कहा कि उनके द्वारा बेस अस्तपाल में इलाज के लिए बेहतर डॉक्टर एवं समस्त सुविधाएं दी गई।जिससे आज उनकी बालिका ठीक हो पायी। टीम में पीजी जेआर डॉ.ज्ञान प्रकाश,डॉ.सर्वजीत कौर,डॉ.रविन्द्र,डॉ.रश्मि सहित नर्सिंग स्टाफ शामिल थे। कीटनाशक दवा के संपर्क में आने बच्ची बेहोश होने का कारण देखा गया। जिसके बाद 10 दिनों तक बालिका को लाइफ सपोर्ट में रखने के बाद इलाज चलाया गया। 24 दिनों तक चले इलाज के बाद बालिका स्वस्थ्य हो गयी। बच्ची अब बोलने के साथ ही खाना खा पा रही है। हालांकि कुछ हल्की लकवा जैसी समस्या अभी बनी हुई है,जो समय के साथ ठीक हो जाएगी। बाल रोग विभाग के जूनियर रेजीडेंट से लेकर तमाम स्टाफ ने एक टीम वर्क की भांति कार्य कर बालिका की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।डॉ.अशोक शर्मा,एसो.प्रोफेसर,बाल रोग विभाग,बेस अस्पताल श्रीनगर।
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बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों की कोशिश से मौत के मुंह से लौटी 3 साल की मासूम बच्ची
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।पौड़ी जिले के पिसोली गांव की एक तीन वर्षीय बालिका,जो कीटनाशक दवा के संपर्क में आने से अचानक बेहोश हो गई थी,उसे बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के डॉक्टरों ने दस दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रखकर 24 दिन की लंबी लड़ाई के बाद बालिका की जीवन की रक्षा कर चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टरों की मेहनत का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। डॉक्टरों की कोशिश और कीटनाशक से लड़कर मासूम ने जीती जिंदगी।अस्पताल में भर्ती बालिका के पिता शिशपाल सिंह ने बताया कि विगत माह उनकी बेटी घर पर अचानक बेहोश हो गई थी।तत्काल वे उसे पौड़ी अस्पताल ले गए,जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉ.निशा उपाध्याय ने गंभीर स्थिति को भांपते हुए उसे तुरंत जीवन रक्षक उपकरणों के साथ बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया और बालिका के संदर्भ में पूरी जानकारी बेस अस्पताल के डॉक्टरों को दी। जिससे बालिका बेस अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम पूरी तरह से तैयार थी। इसमें डॉक्टरों के आपसी समन्वय के कारण बालिका के इलाज में काफी मदद मिली। बालिका के इलाज में एक टीम वर्क का परिणाम रहा,जिसमें जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ तक सभी ने मिलकर कार्य किया। डॉक्टरों के बीच समन्वय का ही परिणाम है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए और बच्ची की जान बचाई जा सकी। बालिका के पिता शिशपाल एवं मां आरती देवी ने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी पहली बार अचानक अचेत हो गई थी और वह घबरा गए थे। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत,देखभाल और सहयोग से आज उनकी बेटी जीवन की ओर लौट आई है। उन्होंने डॉक्टरों की पूरी टीम के प्रति आभार जताया। परिजनों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत जी का भी आभार जताते हुए कहा कि उनके द्वारा बेस अस्तपाल में इलाज के लिए बेहतर डॉक्टर एवं समस्त सुविधाएं दी गई।जिससे आज उनकी बालिका ठीक हो पायी। टीम में पीजी जेआर डॉ.ज्ञान प्रकाश,डॉ.सर्वजीत कौर,डॉ.रविन्द्र,डॉ.रश्मि सहित नर्सिंग स्टाफ शामिल थे। कीटनाशक दवा के संपर्क में आने बच्ची बेहोश होने का कारण देखा गया। जिसके बाद 10 दिनों तक बालिका को लाइफ सपोर्ट में रखने के बाद इलाज चलाया गया। 24 दिनों तक चले इलाज के बाद बालिका स्वस्थ्य हो गयी। बच्ची अब बोलने के साथ ही खाना खा पा रही है। हालांकि कुछ हल्की लकवा जैसी समस्या अभी बनी हुई है,जो समय के साथ ठीक हो जाएगी। बाल रोग विभाग के जूनियर रेजीडेंट से लेकर तमाम स्टाफ ने एक टीम वर्क की भांति कार्य कर बालिका की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।डॉ.अशोक शर्मा,एसो.प्रोफेसर,बाल रोग विभाग,बेस अस्पताल श्रीनगर।