रुद्रप्रयाग में आयुष विभाग ने रक्षाबंधन पर बांटी औषधीय पादपों के बीज युक्त राखियां
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।आयुष विभाग रुद्रप्रयाग द्वारा एक नई पहल के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर जनमानस में पर्यावरण एवं औषधीय पादपों के जागरूकता हेतु राजकीय चिकित्सालयों के माध्यम से औषधीय पादपों के बीज युक्त राखियों का वितरण किया गया। बीज युक्त पादपों का वितरण आयुष विभाग के 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के द्वारा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में स्कूल व विद्यालयों एवं पर्यावरण मित्रों में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की जनता में इस रक्षाबंधन पर पर्यावरण की सुरक्षा पर जागरूकता के साथ-साथ औषधीय पादपों की उपयोगिता पर जागरूकता बढ़ाना है। राशियों का वितरण जनपद के 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिर चन्द्रापुरी,कोटमा,लदोली,जलई,सिरसौली,तैला,लमगौण्डी,तुनेटा,बैरांगणा,सिद्वसौड,बरसूडी,पाण्डवथली,पौंठी,खेडाखाल,खरगेड,बाडव एवं नारायणकोटी में किया गया।इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डाॅ.रघुवीर सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देष्य भाई-बहन के इस पवित्र त्यौहार पर हम न केवल अपने भाई-बहनों की रक्षा का संकल्प लें,अपितु प्रकृति की रक्षा का भी व्रत लें। यह राखी आपको प्रकृति एवं आयुर्वेद से जोड़ने का एक प्रयास भी है। रक्षा बन्धन के उपरान्त इस राखी को मिट्टी में गाढ़ दें,जिससे कि राखी में उपस्थित बीज अंकुरित हो सकें।
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रुद्रप्रयाग में आयुष विभाग ने रक्षाबंधन पर बांटी औषधीय पादपों के बीज युक्त राखियां
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।आयुष विभाग रुद्रप्रयाग द्वारा एक नई पहल के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर जनमानस में पर्यावरण एवं औषधीय पादपों के जागरूकता हेतु राजकीय चिकित्सालयों के माध्यम से औषधीय पादपों के बीज युक्त राखियों का वितरण किया गया। बीज युक्त पादपों का वितरण आयुष विभाग के 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के द्वारा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में स्कूल व विद्यालयों एवं पर्यावरण मित्रों में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की जनता में इस रक्षाबंधन पर पर्यावरण की सुरक्षा पर जागरूकता के साथ-साथ औषधीय पादपों की उपयोगिता पर जागरूकता बढ़ाना है। राशियों का वितरण जनपद के 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिर चन्द्रापुरी,कोटमा,लदोली,जलई,सिरसौली,तैला,लमगौण्डी,तुनेटा,बैरांगणा,सिद्वसौड,बरसूडी,पाण्डवथली,पौंठी,खेडाखाल,खरगेड,बाडव एवं नारायणकोटी में किया गया।इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डाॅ.रघुवीर सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देष्य भाई-बहन के इस पवित्र त्यौहार पर हम न केवल अपने भाई-बहनों की रक्षा का संकल्प लें,अपितु प्रकृति की रक्षा का भी व्रत लें। यह राखी आपको प्रकृति एवं आयुर्वेद से जोड़ने का एक प्रयास भी है। रक्षा बन्धन के उपरान्त इस राखी को मिट्टी में गाढ़ दें,जिससे कि राखी में उपस्थित बीज अंकुरित हो सकें।