संघ शताब्दी वर्ष पर रुद्रप्रयाग में पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन का आह्वान
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सर्व स्पर्शी,सर्वग्राही विश्व का सबसे बडा संगठन-नारायण राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ रुद्रप्रयाग के शताब्दी वर्ष विजय दशमी पर बेलनी बस्ती मे ओमप्रकाश सेमवाल प्रधानाचार्य की अध्यक्षता मे विद्या मदिर मे संघ शताब्दी कार्यक्रम हुआ।संघ के मुख्य वक्ता नारायण प्रान्त धर्म जागरण प्रमुख ने कहा कि तेत्रा युग मे मर्यादा पुरुषोतम श्री राम ने चौदह वर्ष के वनवास मे वनवासी,गिरिवासी,वंचित,शोषित समाज के बीच रहकर जन जागरण द्वारा समाज को संगठित,शिक्षित एवं संस्कारित किया उसी संगठन शक्ति से अत्याचारी,महाबली दशानन् का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी।श्रीराम ने पूरे जीवन में अपने आचरण द्वारा सामाजिक समरसता एवं कर्तव्य का पालन कर हमारे लिए आदर्श स्थापित किया।उन्ही आदर्शो पर डॉ.केशव राव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त एवं स्वतन्त्रता सेनानी द्वारा कांग्रेस छोड़कर 1925 में व्यक्तित्व निर्माण के लिए विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना नागपुर में की थी।संघ आज 60 देशो में सनातन विचारों पर कार्य करते हुए विभिन्न उपेक्षा,उपहास एवं प्रतिबन्धो से संघर्ष करते हुए विश्व का सबसे बड़ा स्वयसेवी एवं स्वावलम्बी सगठन है। सौ वर्षों में संघ ने लाखो कार्यकर्ता,शाखाए,सहायक सगठनो का व्यापक नेटवर्क तैयार कर विदेशो तक भारतीय संस्कृति एव सेवाकार्य बाढ,भूकम्प,महामारी कोरोना जैसी आपदाओं मे सेवा कार्य,शिक्षा संस्थानों,छात्रावासो और सेवा परियोजनाओं की स्थापना की गई।वनवासी एव वंचित क्षेत्रों में सेवा कर सामाजिक समरसता और जाति भेद मिटाते हुए सभी के लिए एक कुआ,एक मन्दिर,एक शमशान के लिए प्रयासरत है।उन्होंने कहा संघ द्वारा सेवा,सगठन और सस्कार को आधार बनाकर राष्ट्र को एकात्म मानवदर्शन और सांस्कृतिक राष्ट्रीयत्व की राह पर अग्रसर करने का प्रयास कर रहा है।स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की भूमिका पर कहा कि डॉक्टर हेडगेवार असहयोग आंदोलन में राजद्रोह के आरोप में 1 वर्ष जेल में रहे।स्वतन्त्रता बाद सघ की भूमिका पर कहा कि भारत विभाजन मे लाखो हिन्दुओ की सुरक्षा और पुर्नवास हेतु संघ ने वास्तुहारा समिति बनायी कशमीर,हैदरावाद,गोवा आन्दोलनों मे सघ का योगदान रहा 1962 व 65 तथा 1971 के युद्धो मे भारतीय सेना की मदद की संघ सेवाकार्य से प्रभावित प्रधानमंत्री नेहरू के आमन्त्रण पर 26 जनवरी 1963 की गणतन्त्र परेड में 3000 गणवेशधारी स्वयसेवको ने संघ घोष के साथ संचलन किया। 1975 के आपातकाल मे भूमिगत सगठन के रूप में लोकतन्त्र की रक्षा की,रामजन्म भूमि आन्दोलन 1990 से संघ की सहमति का कालखण्ड चल रहा है जिसमे संघ आयाम एवं श्रेणी रचना संस्कार देने का कार्य एव पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन हेतु कुटुम्ब प्रवोधन मे स्वभाषा,भोजन,भजन,भ्रमण,भवन,भूषा सामाजिक समरसता,पर्यावरण,स्वदेशी,नागरिक शिष्टाचार,सामाजिक सदभाव गतिविधियां कार्यरत है। वर्तमान स्थिति पर उन्होंने कहा कि टैरिफ द्वारा भारत को कमजोर करने की कोशिश,षडयन्त्रो द्वारा जातीय संघर्ष,हिन्दुत्व व हिन्दू दर्शन से घृणा,लव जेहाद,लैण्ड जेहाद,जनसंख्या असन्तुलन,पलायन,रोजगार संसाधनो पर कब्जा,कौशल विकास में हिन्दू शिथिलता,ग्राम स्वालम्बन,रीति-रिवाजों परम्पराओं से खिलवाड,समाज तोडनेवाले धारावाहिकों का षडयन्त्र,देशविरोधी गतिविधिया,वामपंथी एजेन्डे को समझना और सर्तकता जैसी समस्याओं से बचाने के लिए सघ के 35 सगठन कार्य कर रहे हैं।संघ प्रार्थना कर संघ घोष के साथ नगर में पथ संचलन किया गया शिवप्रसाद नगर संघ चालक,शशिमोहन उनियाल जिला प्रचार प्रमुख,सहदेव पुण्डीर,प्रियंक शर्मा,दयाल सिंह रावत नगर कार्यवाह,प्रेमसिंह नेगी सहित सैकडो गणवेश धारी स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
Spread the love
संघ शताब्दी वर्ष पर रुद्रप्रयाग में पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन का आह्वान
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सर्व स्पर्शी,सर्वग्राही विश्व का सबसे बडा संगठन-नारायण राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ रुद्रप्रयाग के शताब्दी वर्ष विजय दशमी पर बेलनी बस्ती मे ओमप्रकाश सेमवाल प्रधानाचार्य की अध्यक्षता मे विद्या मदिर मे संघ शताब्दी कार्यक्रम हुआ।संघ के मुख्य वक्ता नारायण प्रान्त धर्म जागरण प्रमुख ने कहा कि तेत्रा युग मे मर्यादा पुरुषोतम श्री राम ने चौदह वर्ष के वनवास मे वनवासी,गिरिवासी,वंचित,शोषित समाज के बीच रहकर जन जागरण द्वारा समाज को संगठित,शिक्षित एवं संस्कारित किया उसी संगठन शक्ति से अत्याचारी,महाबली दशानन् का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी।श्रीराम ने पूरे जीवन में अपने आचरण द्वारा सामाजिक समरसता एवं कर्तव्य का पालन कर हमारे लिए आदर्श स्थापित किया।उन्ही आदर्शो पर डॉ.केशव राव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त एवं स्वतन्त्रता सेनानी द्वारा कांग्रेस छोड़कर 1925 में व्यक्तित्व निर्माण के लिए विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना नागपुर में की थी।संघ आज 60 देशो में सनातन विचारों पर कार्य करते हुए विभिन्न उपेक्षा,उपहास एवं प्रतिबन्धो से संघर्ष करते हुए विश्व का सबसे बड़ा स्वयसेवी एवं स्वावलम्बी सगठन है। सौ वर्षों में संघ ने लाखो कार्यकर्ता,शाखाए,सहायक सगठनो का व्यापक नेटवर्क तैयार कर विदेशो तक भारतीय संस्कृति एव सेवाकार्य बाढ,भूकम्प,महामारी कोरोना जैसी आपदाओं मे सेवा कार्य,शिक्षा संस्थानों,छात्रावासो और सेवा परियोजनाओं की स्थापना की गई।वनवासी एव वंचित क्षेत्रों में सेवा कर सामाजिक समरसता और जाति भेद मिटाते हुए सभी के लिए एक कुआ,एक मन्दिर,एक शमशान के लिए प्रयासरत है।उन्होंने कहा संघ द्वारा सेवा,सगठन और सस्कार को आधार बनाकर राष्ट्र को एकात्म मानवदर्शन और सांस्कृतिक राष्ट्रीयत्व की राह पर अग्रसर करने का प्रयास कर रहा है।स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की भूमिका पर कहा कि डॉक्टर हेडगेवार असहयोग आंदोलन में राजद्रोह के आरोप में 1 वर्ष जेल में रहे।स्वतन्त्रता बाद सघ की भूमिका पर कहा कि भारत विभाजन मे लाखो हिन्दुओ की सुरक्षा और पुर्नवास हेतु संघ ने वास्तुहारा समिति बनायी कशमीर,हैदरावाद,गोवा आन्दोलनों मे सघ का योगदान रहा 1962 व 65 तथा 1971 के युद्धो मे भारतीय सेना की मदद की संघ सेवाकार्य से प्रभावित प्रधानमंत्री नेहरू के आमन्त्रण पर 26 जनवरी 1963 की गणतन्त्र परेड में 3000 गणवेशधारी स्वयसेवको ने संघ घोष के साथ संचलन किया। 1975 के आपातकाल मे भूमिगत सगठन के रूप में लोकतन्त्र की रक्षा की,रामजन्म भूमि आन्दोलन 1990 से संघ की सहमति का कालखण्ड चल रहा है जिसमे संघ आयाम एवं श्रेणी रचना संस्कार देने का कार्य एव पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन हेतु कुटुम्ब प्रवोधन मे स्वभाषा,भोजन,भजन,भ्रमण,भवन,भूषा सामाजिक समरसता,पर्यावरण,स्वदेशी,नागरिक शिष्टाचार,सामाजिक सदभाव गतिविधियां कार्यरत है। वर्तमान स्थिति पर उन्होंने कहा कि टैरिफ द्वारा भारत को कमजोर करने की कोशिश,षडयन्त्रो द्वारा जातीय संघर्ष,हिन्दुत्व व हिन्दू दर्शन से घृणा,लव जेहाद,लैण्ड जेहाद,जनसंख्या असन्तुलन,पलायन,रोजगार संसाधनो पर कब्जा,कौशल विकास में हिन्दू शिथिलता,ग्राम स्वालम्बन,रीति-रिवाजों परम्पराओं से खिलवाड,समाज तोडनेवाले धारावाहिकों का षडयन्त्र,देशविरोधी गतिविधिया,वामपंथी एजेन्डे को समझना और सर्तकता जैसी समस्याओं से बचाने के लिए सघ के 35 सगठन कार्य कर रहे हैं।संघ प्रार्थना कर संघ घोष के साथ नगर में पथ संचलन किया गया शिवप्रसाद नगर संघ चालक,शशिमोहन उनियाल जिला प्रचार प्रमुख,सहदेव पुण्डीर,प्रियंक शर्मा,दयाल सिंह रावत नगर कार्यवाह,प्रेमसिंह नेगी सहित सैकडो गणवेश धारी स्वयंसेवक उपस्थित रहे।