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मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में सीपीआर प्रशिक्षण: डॉक्टरों छात्रों व कर्मचारियों ने सीखी जीवन बचाने की तकनीक

प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय सामाचार में भारत सरकार के निर्देश एवं तत्वावधान में सोमवार को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में कॉलेज के फैकल्टी सदस्य,सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट,डॉक्टर,एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थी,पैरामेडिकल छात्र, एसएसडब्ल्यू और अन्य कर्मचारी शामिल हुए।कार्यक्रम का उद्देश्य आपात स्थिति में जीवन रक्षक कौशल (Life Saving Skills) के प्रति चिकित्सा समुदाय और आम नागरिकों को जागरूक करना है।चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश रावत ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस प्रकार की सीपीआर ट्रेनिंग संकट की घड़ी में किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार की यह पहल शहरी ही नहीं,ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने प्रतिभागियों को सीपीआर तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति की दिल की धड़कन बंद हो जाए, सांस रुक जाए या पल्स न चल रही हो,तो तत्काल सीपीआर देना ही जीवनरक्षक कदम होता है।उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान हृदय और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलती है और समय रहते सीपीआर मिलने पर व्यक्ति को नई जिंदगी मिल सकती है।देशभर में मनाया जा रहा है सीपीआर सप्ताह भारत सरकार के निर्देशानुसार 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में “सीपीआर सप्ताह” आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में यह कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।पहले दिन डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने नर्सिंग अधिकारियों,वार्डबॉय और सुरक्षा कर्मियों को सीपीआर की बारीकियां सिखाईं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सीपीआर देने की विधि को प्रायोगिक रूप से सीखा और आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तत्परता दिखाई।सीपीआर देना हर व्यक्ति को आना चाहिए। प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के निर्देश पर मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से इस प्रशिक्षण को स्कूलों और अन्य संस्थानों तक ले जाने की जो पहल की गई है,वह जीवन बचाने में मील का पत्थर साबित होगी।-प्रो.आशुतोष सयाना,प्राचार्य,राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।

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